ट्रम्प ने कहा कि पाकिस्तान की अपील पर ईरान के खिलाफ सीजफायर बढ़ाया, लेकिन नाकेबंदी जारी रखने का फैसला किया। इस बीच मिसाइल प्रदर्शन, धमकियां और वैश्विक तनाव बढ़ता दिख रहा है।
दुनिया एक बार फिर उस मोड़ पर खड़ी दिख रही है, जहां शांति और टकराव के बीच की दूरी बस कुछ फैसलों की रह गई है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने अचानक ईरान के साथ जारी सीजफायर को आगे बढ़ाने का ऐलान कर दिया, और वजह बताई पाकिस्तान की अपील… लेकिन कहानी इतनी सीधी नहीं है। ट्रम्प ने साफ कर दिया कि हमला भले रोका गया हो, दबाव नहीं। नाकेबंदी जारी रहेगी, और सेना अलर्ट पर है।
पाकिस्तान की अपील और ट्रम्प का फैसला
ट्रम्प के मुताबिक, पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ और सेना प्रमुख आसिम मुनीर ने उनसे सीधे अपील की थी कि ईरान को कुछ वक्त दिया जाए। वजह वहां की राजनीतिक और सैन्य नेतृत्व में कथित असहमति। ट्रम्प ने कहा, “ऐसे हालात में अगर बातचीत का मौका देना है, तो थोड़ी नरमी दिखानी होगी,” लेकिन साथ ही जोड़ा कि यह राहत स्थायी नहीं है। यह भी साफ नहीं किया गया कि यह सीजफायर कितने समय के लिए बढ़ाया गया है, जिससे अनिश्चितता बनी हुई है,
सीजफायर, लेकिन ‘पूरा ब्रेक’ नहीं
सीजफायर शब्द सुनकर जो तस्वीर बनती है, जमीन पर हालात उससे अलग हैं।
- अमेरिकी सेना को तैयार रहने का आदेश
- होर्मुज स्ट्रेट पर नाकेबंदी जारी
- आर्थिक दबाव बनाए रखने की रणनीति
ट्रम्प ने इशारों में कहा कि अगर ईरान ने “ठोस प्रस्ताव” नहीं दिया, तो यह विराम जल्दी खत्म हो सकता है।
जमीन पर क्या हो रहा है?
ईरान के अंदर हालात सामान्य नहीं दिखते। तेहरान की सड़कों पर मिसाइल प्रदर्शन, रैलियां और अमेरिका विरोधी नारे लगातार दिख रहे हैं। राजधानी के एंगेलाब स्क्वायर में बैलिस्टिक मिसाइल का सार्वजनिक प्रदर्शन हुआ यह सिर्फ ताकत दिखाना नहीं, बल्कि एक संदेश भी माना जा रहा है। उधर, होर्मुज के पास एक जहाज पर फायरिंग की खबर ने तनाव को और बढ़ा दिया है। हालांकि कोई बड़ा नुकसान नहीं हुआ, लेकिन यह इशारा काफी था कि सीजफायर के बावजूद हालात नाजुक हैं।
दुनिया की नजर होर्मुज पर
होर्मुज स्ट्रेट इस पूरे संकट का सबसे अहम बिंदु बन चुका है।
- UK और फ्रांस 30 देशों की बैठक बुला रहे हैं
- तेल सप्लाई पर खतरा बना हुआ है
- यूरोप की एयरलाइंस ने उड़ानें घटानी शुरू कर दी हैं
लुफ्थांसा जैसी बड़ी एयरलाइन ने 20 हजार उड़ानें रद्द करने का फैसला लिया है वजह, बढ़ती ईंधन कीमतें।
चीन, यूरोप और मिडिल ईस्ट… सबकी अपनी गणित
इस पूरे घटनाक्रम में हर देश अपनी-अपनी रणनीति साधता दिख रहा है। चीन में सोशल मीडिया पर इसे “रणनीतिक मौका” बताया जा रहा है, वहीं फ्रांस के राष्ट्रपति ने अमेरिका के कदमों की आलोचना की है। मिडिल ईस्ट में भी हलचल है। ईरानी कमांडरों की तरफ से साफ चेतावनी आई है अगर उनके खिलाफ किसी तीसरे देश की जमीन का इस्तेमाल हुआ, तो तेल ठिकाने भी निशाने पर होंगे।
बातचीत का रास्ता अब भी धुंधला
हालांकि सीजफायर बढ़ा है, लेकिन बातचीत की दिशा अभी साफ नहीं है। पाकिस्तान में प्रस्तावित बैठक टल गई, ईरान की तरफ से जवाब में देरी होने और अंदरूनी मतभेद की खबरें हैं IAEA ने भी चेताया है कि किसी भी समझौते में उसे शामिल करना जरूरी होगा, नहीं तो पूरा प्रयास कमजोर पड़ सकता है।