डोनाल्ड ट्रम्प के भारत पर बयान से विवाद, जन्मजात नागरिकता पर नई बहस छिड़ी। जानिए क्या कहा और इसका क्या असर हो सकता है। swadesh news
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प के एक हालिया बयान ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर नई बहस छेड़ दी है। उन्होंने जन्म के आधार पर मिलने वाली अमेरिकी नागरिकता को लेकर भारत और चीन जैसे देशों पर टिप्पणी करते हुए विवाद खड़ा कर दिया है। ट्रम्प ने सोशल मीडिया पर साझा एक पत्र में “बर्थराइट सिटिजनशिप” नीति की आलोचना करते हुए कहा कि इस व्यवस्था का दुरुपयोग हो रहा है। उनके बयान में भारत को लेकर की गई टिप्पणी पर विशेष रूप से प्रतिक्रिया सामने आ रही है।
जन्म आधारित नागरिकता पर उठाए सवाल
अमेरिका में लंबे समय से लागू जन्म आधारित नागरिकता (Birthright Citizenship) व्यवस्था के तहत वहां जन्म लेने वाला हर बच्चा स्वतः नागरिक बन जाता है। यह प्रावधान 14th Amendment to the United States Constitution के तहत लागू है। ट्रम्प का दावा है कि इस नीति के कारण प्रवासी परिवार अपने बच्चों को अमेरिका में जन्म दिलाकर नागरिकता प्राप्त करते हैं और बाद में पूरे परिवार को वहां बसाने का रास्ता बनाते हैं। उन्होंने यह भी कहा कि इस मुद्दे का समाधान अदालतों के बजाय जनमत से होना चाहिए।
टेक सेक्टर में भारतीयों की भूमिका पर बयान
ट्रम्प ने कैलिफोर्निया के टेक सेक्टर का जिक्र करते हुए कहा कि वहां भारतीय और चीनी पेशेवरों का प्रभाव बढ़ा है। उनके अनुसार, हाई-टेक नौकरियों में कुछ समुदायों का वर्चस्व बनता जा रहा है, जिससे अवसरों के संतुलन पर असर पड़ रहा है। हालांकि, विशेषज्ञ मानते हैं कि भारतीय पेशेवरों की सफलता उनकी योग्यता, तकनीकी दक्षता और वैश्विक प्रतिस्पर्धा के कारण है। अमेरिका की कई प्रमुख टेक कंपनियों में भारतीय मूल के अधिकारी नेतृत्व की भूमिका में भी हैं।
प्रवासी नीतियों पर सख्ती के संकेत
डोनाल्ड ट्रम्प ने प्रवासी नीतियों को लेकर पहले भी सख्त रुख अपनाया है। जनवरी 2025 में उन्होंने एक एग्जीक्यूटिव ऑर्डर पर हस्ताक्षर कर जन्मजात नागरिकता के नियमों में बदलाव की कोशिश की थी। हालांकि, इस आदेश को अमेरिकी अदालतों में चुनौती दी गई और फिलहाल इस पर कानूनी प्रक्रिया जारी है।
अंतरराष्ट्रीय प्रतिक्रिया और भारत का दृष्टिकोण
ट्रम्प के इस बयान को लेकर वैश्विक स्तर पर मिश्रित प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं। भारत के संदर्भ में विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसे बयान द्विपक्षीय संबंधों पर सीमित प्रभाव डालते हैं, क्योंकि भारत-अमेरिका संबंध रणनीतिक और आर्थिक सहयोग पर आधारित हैं। भारत लंबे समय से वैश्विक प्रतिभा का केंद्र रहा है और भारतीय पेशेवरों ने दुनिया भर में अपनी पहचान बनाई है। आईटी, हेल्थकेयर और रिसर्च जैसे क्षेत्रों में भारतीयों का योगदान व्यापक रूप से स्वीकार किया जाता है।
क्या है ‘बर्थराइट सिटिजनशिप’ ?
अमेरिका में जन्म के आधार पर नागरिकता का प्रावधान 1868 में लागू हुआ था। इसका उद्देश्य उस समय गुलामी से मुक्त हुए लोगों को समान अधिकार देना था। समय के साथ इस कानून की व्याख्या व्यापक हुई और अब यह सभी बच्चों पर लागू होता है, चाहे उनके माता-पिता का नागरिकता स्टेटस कुछ भी हो।