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भारत विरोध में जोकर जैसी भाषा क्यों बोलने लगे पाक सेना के DG ISPR?

भारत विरोध में जोकर जैसी भाषा क्यों बोलने लगे पाक सेना के DG ISPR?

भारत विरोध में पाक सेना के DG ISPR का अजीब बयान चर्चा में है। प्रेस कॉन्फ्रेंस में मज़ाकिया भाषा ने पाकिस्तान की रणनीति पर सवाल खड़े किए।

भारत विरोध में जोकर जैसी भाषा क्यों बोलने लगे पाक सेना के dg ispr

मज़ा न करा दिया तो पैसे वापस…

सेना की प्रेस कॉन्फ्रेंस आमतौर पर नपी-तुली और रणनीतिक भाषा के लिए जानी जाती हैं लेकिन पाकिस्तान की सेना के प्रवक्ता की प्रेस ब्रीफिंग चर्चा में है और वजह है उसका लहजा. भारत के खिलाफ बयान देते हुए पाकिस्तान की सेना के DG ISPR लेफ्टिनेंट जनरल अहमद शरीफ चौधरी ने ऐसी भाषा का इस्तेमाल किया. जिसे सुनकर सवाल उठने लगे ।

प्रेस कॉन्फ्रेंस या स्टैंड-अप शो?

ऑपरेशन सिंदूर में मार खाने के बाद पाकिस्तान की सेना की यह पहली बड़ी प्रेस कॉन्फ्रेंस थी । आमतौर पर ऐसी ब्रीफिंग में नुकसान छुपाने और हालात संभालने की कोशिश होती है. लेकिन इस बार तस्वीर कुछ और ही दिखी DG ISPR ने भारत को लेकर कहा- चारों तरफ आओ ऊपर से आओ नीचे से आओ… एक बार मज़ा करा दिया. पैसे वापस। यह बयान सामने आने के बाद सोशल मीडिया पर प्रतिक्रियाओं की बाढ़ आ गई । लोग पूछने लगे—क्या यह सेना का आधिकारिक बयान है या किसी कॉमेडी शो का डायलॉग?

भाषा बदली, तेवर बदले

विशेषज्ञों का मानना है कि यह बदलाव यूं ही नहीं है पाकिस्तान की सेना पर अंदरूनी दबाव है घरेलू असंतोष, आर्थिक बदहाली और सीमाओं पर लगातार झटके। ऐसे में भारत के खिलाफ आक्रामक और हल्की भाषा इस्तेमाल करना. ध्यान भटकाने की एक कोशिश भी मानी जा रही है ।पहले जहां DG ISPR कूटनीतिक शब्दों में बात करते थे. अब वहां तंज. व्यंग्य और उकसावे की भाषा दिख रही है ।

सोशल मीडिया पर उड़ रही है खिल्ली

DG ISPR के इस बयान का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो गया. यूजर्स इसे जोकर डिप्लोमेसी मेम मटीरियल और फेल PR स्ट्रैटेजी बता रहे हैं कुछ लोगों ने लिखा-जब तर्क खत्म हो जाए. तो तमाशा शुरू होता है

सेना की साख पर सवाल

सेना की प्रेस कॉन्फ्रेंस सिर्फ बयान नहीं होती. वह एक देश की सैन्य सोच और गंभीरता को दिखाती है । ऐसे में भारत जैसे देश के खिलाफ इस तरह की भाषा पाकिस्तान की रणनीतिक मजबूरी भी दिखाती है और असहजता भी ।विशेषज्ञ मानते हैं कि इस तरह के बयान अंतरराष्ट्रीय मंच पर पाकिस्तान की स्थिति को और कमजोर ही करते हैं ।

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