नॉर्थ कोरिया ने संविधान में नया प्रावधान जोड़ते हुए साफ किया है कि किम जोंग-उन की हत्या या नेतृत्व खत्म होने की स्थिति में तुरंत परमाणु हमला किया जाएगा।
उत्तर कोरिया ने अपनी परमाणु नीति में बड़ा बदलाव करते हुए दुनिया को नया संदेश दिया है। अब अगर देश के सर्वोच्च नेता किम जोंग-उन की हत्या होती है या किसी हमले के कारण वे नेतृत्व करने की स्थिति में नहीं रहते, तो देश तुरंत परमाणु हमला करेगा। इस फैसले को उत्तर कोरिया ने अपने संविधान का हिस्सा बना दिया है। माना जा रहा है कि हाल के अंतरराष्ट्रीय घटनाक्रमों ने प्योंगयांग की रणनीति पूरी तरह बदल दी है। दक्षिण कोरियाई खुफिया एजेंसियों के मुताबिक, यह कदम संभावित ‘डिकैपिटेशन स्ट्राइक’ यानी शीर्ष नेतृत्व को खत्म करने वाले हमलों के डर के बाद उठाया गया।
ईरान पर हमले के बाद बढ़ी बेचैनी
रिपोर्ट्स के अनुसार मार्च में तेहरान पर अमेरिका और इजराइल के हमलों के बाद उत्तर कोरिया में सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ गई थी। इन हमलों में ईरान के सुप्रीम लीडर अली खामेनेई समेत कई बड़े अधिकारियों की मौत हुई थी। इसी घटना ने नॉर्थ कोरिया को यह सोचने पर मजबूर किया कि भविष्य में उसके खिलाफ भी ऐसा ऑपरेशन हो सकता है। ब्रिटिश मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, प्योंगयांग ने हमलों की गति और सटीकता को बेहद गंभीरता से लिया। इसके बाद संविधान में यह नया प्रावधान जोड़ा गया।
अब परमाणु जवाबी हमला होगा तय रणनीति
नया प्रावधान मार्च में हुई सुप्रीम पीपुल्स असेंबली की बैठक में मंजूर किया गया। इसके तहत अगर देश की शीर्ष नेतृत्व व्यवस्था पर हमला होता है, तो परमाणु जवाबी कार्रवाई तत्काल की जा सकेगी। विशेषज्ञों का मानना है कि पहले भी उत्तर कोरिया ऐसी रणनीति पर काम करता रहा होगा, लेकिन अब इसे आधिकारिक और संवैधानिक रूप दे दिया गया है। सियोल स्थित कूकमिन यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर आंद्रेई लांकोव ने इसे उत्तर कोरिया के लिए “वेक-अप कॉल” बताया। उनके मुताबिक ईरान पर हुए हमले ने किम शासन को डरा दिया है।
उत्तर कोरिया पर हमला करना इतना आसान नहीं
विशेषज्ञों का कहना है कि ईरान की तुलना में उत्तर कोरिया में किसी गुप्त ऑपरेशन को अंजाम देना कहीं ज्यादा कठिन है। उत्तर कोरिया दुनिया के सबसे बंद देशों में शामिल है। वहां इंटरनेट, CCTV नेटवर्क और डिजिटल सिस्टम पूरी तरह सरकारी नियंत्रण में रहते हैं। विदेशी लोगों की गतिविधियों पर भी कड़ी नजर रखी जाती है। किम जोंग-उन की सुरक्षा व्यवस्था भी बेहद सख्त मानी जाती है। वे भारी हथियारों से लैस सुरक्षा घेरे में रहते हैं और आमतौर पर हवाई यात्रा से बचते हैं। अंतरराष्ट्रीय दौरों के लिए भी वे बख्तरबंद ट्रेन का इस्तेमाल करते हैं।
अमेरिका तक पहुंच सकती हैं नॉर्थ कोरिया की मिसाइलें
उत्तर कोरिया के पास मौजूद मिसाइलों की सटीक संख्या सार्वजनिक नहीं है, लेकिन रक्षा विशेषज्ञ मानते हैं कि उसके पास सैकड़ों बैलिस्टिक मिसाइलें हैं। इनमें लंबी दूरी की ICBM मिसाइलें भी शामिल हैं, जो अमेरिका तक पहुंचने की क्षमता रखती हैं। नॉर्थ कोरिया ह्वासोंग-15, ह्वासोंग-17 और ह्वासोंग-18 जैसी मिसाइलों का परीक्षण कर चुका है। इनकी रेंज करीब 10 हजार से 15 हजार किलोमीटर तक बताई जाती है।
कुछ अंतरराष्ट्रीय रिपोर्ट्स यह भी दावा करती हैं कि उत्तर कोरिया के पास 50 से 100 तक परमाणु हथियार ले जाने में सक्षम मिसाइलें हो सकती हैं। नई नीति के बाद दुनिया में एक बार फिर उत्तर कोरिया के परमाणु कार्यक्रम और एशिया की सुरक्षा स्थिति को लेकर चिंता बढ़ गई है।