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Nepal Election: Balen Shah Leads Big

नेपाल चुनाव: अपने ही गढ़ में 40 हजार वोट से पीछे भारत विरोधी ओली, बालेन शाह की पार्टी जीत की ओर

नेपाल चुनाव में बड़ा उलटफेर दिख रहा है। बालेन शाह की पार्टी RSP सबसे आगे है, जबकि पूर्व प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली अपने ही गढ़ झापा-5 में 40 हजार वोटों से पीछे चल रहे हैं।


नेपाल चुनाव अपने ही गढ़ में 40 हजार वोट से पीछे भारत विरोधी ओली  बालेन शाह की पार्टी जीत की ओर

Nepal News Election Updates |

नेपाल की राजनीति में इस बार चौंकाने वाला मोड़ दिख रहा है। इस तरह के बदलाव की कुछ महीने पहले तक शायद ही किसी ने कल्पना नहीं की थी। आम चुनाव की मतगणना जैसे-जैसे आगे बढ़ रही है, तस्वीर साफ होती जा रही है कि नई राजनीतिक ताकतें पुराने दिग्गजों को कड़ी चुनौती दे रही हैं।

सबसे अधिक हैरान करने वाली खबर पूर्व प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली से जुड़ी है। वे अपने ही मजबूत माने जाने वाले क्षेत्र झापा-5 में करीब 40 हजार वोटों से पीछे चल रहे हैं। दूसरी ओर, काठमांडू के मेयर रह चुके रैपर बालेन शाह की पार्टी राष्ट्रीय स्वतंत्र पार्टी (RSP) अप्रत्याशित रूप से सबसे बड़ी पार्टी बनती दिखाई दे रही है।

शुरुआती रुझानों में RSP का दबदबा

नेपाल में 6 मार्च मतगणना अभी जारी है। लेकिन शुरुआती रुझान ही नेपाल की राजनीति में बड़े बदलाव का संकेत दे रहे हैं। नेपाल की संसद की 165 सीटों पर सीधे चुनाव  है और इन्हीं सीटों की शुरुआती तस्वीर अब सामने आने लगी है। अब तक के रुझानों के अनुसार, राष्ट्रीय स्वतंत्र पार्टी (RSP) ने 46 सीटें जीत ली हैं और  73 सीटों पर बढ़त बनाए हुए है। 

पत्रकार ने शुरू की थी पार्टी

बता दें कि यह वही पार्टी है जिसे सिर्फ चार साल पहले पत्रकार रहे रवि लामिछाने ने शुरू किया था। कम समय में इतनी तेजी से उभरना नेपाल की राजनीति में एक बड़ी घटना माना जा रहा है। राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि युवाओं और शहरों में RSP को काफी समर्थन मिला है, खासकर उन मतदाताओं का जो पारंपरिक पार्टियों से नाराज़ थे।

केपी शर्मा ओली को बड़ा झटका

सबसे ज्यादा चर्चा जिस सीट की हो रही है, वह है झापा-5। यहीं से पूर्व प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली चुनाव लड़ रहे हैं। शुरुआती गिनती के मुताबिक उन्हें अब तक करीब 15,409 वोट मिले हैं, जबकि बालेन शाह को 55,934 वोट मिल चुके हैं। यानी अंतर करीब 40 हजार वोटों का हो गया है। दिलचस्प बात यह है कि यही सीट ओली ने 2017 और 2022 के चुनाव में आसानी से जीती थी। इसलिए इस बार का रुझान कई लोगों को चौंका रहा है।

स्थानीय लोगों से बात करने पर पता चलता है कि इस बार मतदाताओं का मूड थोड़ा अलग था, कई युवा मतदाता बदलाव की बात कर रहे थे।

वोट प्रतिशत में भी RSP सबसे आगे

नेपाल में सिर्फ सीधे चुनाव ही नहीं होते, बल्कि वोट प्रतिशत के आधार पर भी सीटें मिलती हैं। चुनाव आयोग के शुरुआती आंकड़ों के अनुसार, RSP को अब तक लगभग 54.8% वोट मिले हैं, जो किसी भी पार्टी से ज्यादा हैं। अगर यह रुझान अंत तक बना रहता है तो संसद में RSP की ताकत और भी ज्यादा बढ़ सकती है।

नेपाल में कैसे होता है सांसदों का चुनाव

नेपाल की चुनाव प्रणाली थोड़ी अलग है। यहां मिश्रित चुनाव प्रणाली (Mixed Electoral System) लागू है।

1. सीधे चुनाव (First Past The Post)

संसद की 275 में से 165 सीटों पर सीधे चुनाव होता है। हर निर्वाचन क्षेत्र में मतदाता अपने पसंदीदा उम्मीदवार को वोट देते हैं और जिसे सबसे ज्यादा वोट मिलते हैं वही जीत जाता है।

2. वोट प्रतिशत के आधार पर सीटें

बाकी 110 सीटें पार्टियों को उनके कुल वोट प्रतिशत के आधार पर मिलती हैं। इसमें वोटर किसी व्यक्ति को नहीं बल्कि किसी पार्टी को वोट देता है। पूरे देश में पार्टी को जितने प्रतिशत वोट मिलते हैं, उसी हिसाब से उन्हें संसद में सीटें दी जाती हैं।

इस व्यवस्था का मकसद यह माना जाता है कि छोटे दलों और अलग-अलग सामाजिक समूहों को भी संसद में जगह मिल सके, ताकि राजनीति में संतुलन बना रहे।

58% मतदान, 9 मार्च तक पूरी हो सकती है गिनती

नेपाल में यह चुनाव 5 मार्च को कराया गया था। पिछले साल सितंबर में हुए हिंसक प्रदर्शनों के बाद यह चुनाव काफी अहम माना जा रहा था। चुनाव आयोग के मुताबिक इस बार करीब 58% लोगों ने वोट डाले। मतगणना अभी जारी है और अधिकारियों का कहना है कि पूरी गिनती में 3 से 4 दिन लग सकते हैं। आयोग की कोशिश है कि 9 मार्च तक सभी नतीजे घोषित कर दिए जाएं।

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