अमेरिका ने नाइजीरिया में बड़े ऑपरेशन में ISIS के नंबर-2 कमांडर अबू बिलाल अल मिनुकी को मार गिराने का दावा किया है। ट्रम्प बोले- इससे आतंकी नेटवर्क और फंडिंग सिस्टम को बड़ा झटका लगा।
अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump ने दावा किया है कि आतंकी संगठन Islamic State के दूसरे सबसे बड़े कमांडर अबू बिलाल अल मिनुकी को अमेरिकी ऑपरेशन में मार गिराया गया है। बताया जा रहा है कि यह कार्रवाई अफ्रीका में की गई, जहां वह लंबे समय से छिपकर काम कर रहा था।
ट्रम्प के मुताबिक अमेरिकी सेना ने नाइजीरियाई सुरक्षा बलों के साथ मिलकर बेहद गुप्त और कठिन ऑपरेशन चलाया। उन्होंने कहा कि अल मिनुकी सिर्फ एक आतंकी नहीं था, बल्कि ISIS के फंडिंग नेटवर्क और रणनीतिक ऑपरेशंस का बड़ा चेहरा माना जाता था। ऐसे में उसकी मौत को संगठन के लिए बड़ा झटका माना जा रहा है।
आखिर कौन था अबू बिलाल अल मिनुकी?
अबू बिलाल अल मिनुकी का नाम लंबे समय से अमेरिकी खुफिया एजेंसियों की निगरानी सूची में था। वह नाइजीरिया के बोर्नो राज्य का रहने वाला बताया जाता है और ISIS से जुड़े वेस्ट अफ्रीका नेटवर्क में उसकी गहरी पकड़ मानी जाती थी।
दरअसल, अमेरिकी अधिकारियों का कहना है कि वह पर्दे के पीछे रहकर काम करने वाला कमांडर था। यही वजह है कि उसकी कोई आधिकारिक तस्वीर अब तक सार्वजनिक नहीं हुई। उसके कई नाम भी सामने आए थे, जिनमें अबुबकर मैनोक और अबोर मैनोक शामिल हैं।
अमेरिका ने पहले ही घोषित किया था ग्लोबल टेररिस्ट
जून 2023 में अमेरिकी प्रशासन ने अल मिनुकी को “स्पेशली डेजिग्नेटेड ग्लोबल टेररिस्ट” घोषित किया था। इसका मतलब यह होता है कि अमेरिका किसी व्यक्ति को वैश्विक सुरक्षा के लिए गंभीर खतरा मानता है।

इस सूची में शामिल होने के बाद उसकी संपत्तियां फ्रीज कर दी जाती हैं और कोई भी अमेरिकी नागरिक या कंपनी उससे आर्थिक लेन-देन नहीं कर सकती। अमेरिका का दावा था कि मिनुकी विदेशों में अमेरिकी हितों पर हमलों की साजिश रच रहा था।
हालांकि अब तक यह साफ नहीं हुआ है कि यह ऑपरेशन नाइजीरिया के किस इलाके में हुआ और इसमें कितने समय तक निगरानी रखी गई थी।
नाइजीरिया क्यों बना आतंक का बड़ा केंद्र?
फिलहाल नाइजीरिया कई सालों से चरमपंथी हिंसा से जूझ रहा है। देश के उत्तर-पूर्वी हिस्सों में Boko Haram और ISIS से जुड़े गुट लगातार सक्रिय हैं।
बोको हराम की शुरुआत शिक्षा और पश्चिमी संस्कृति के विरोध से हुई थी, लेकिन बाद में यह बेहद हिंसक संगठन बन गया। बाद में इसका एक धड़ा अलग होकर इस्लामिक स्टेट वेस्ट अफ्रीका प्रोविंस में बदल गया, जिसे ISIS का समर्थन मिला।
इन संगठनों की वजह से बोर्नो, अदामावा और योबे जैसे इलाकों में हजारों लोगों की जान जा चुकी है। लाखों लोग अपने घर छोड़ने को मजबूर हुए हैं। पिछले महीने अदामावा राज्य में हुए हमले में 29 लोगों की मौत ने एक बार फिर वहां की सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल खड़े किए थे।
ट्रम्प के बयान के क्या मायने हैं?
ट्रम्प ने अपने बयान में कहा कि अल मिनुकी की मौत से ISIS के कमांड सिस्टम और फंडिंग नेटवर्क को गहरी चोट पहुंची है। हालांकि सुरक्षा विशेषज्ञ मानते हैं कि ऐसे संगठनों में नेतृत्व तेजी से बदलता रहता है।
ऐसे में आने वाले दिनों में यह देखना अहम होगा कि क्या इस कार्रवाई के बाद अफ्रीका में ISIS की गतिविधियां कमजोर पड़ती हैं या फिर संगठन जवाबी रणनीति अपनाता है।
अमेरिका इससे पहले भी नाइजीरिया में ISIS ठिकानों पर कार्रवाई कर चुका है। दिसंबर 2025 में किए गए एक अमेरिकी ऑपरेशन को लेकर काफी चर्चा हुई थी। उस समय ट्रम्प ने कहा था कि आतंकियों को “भारी कीमत” चुकानी पड़ेगी।