फ्रांस में समझौते के एक दिन बाद ही अमेरिका-ईरान वार्ता अटक गई। स्विट्जरलैंड में होने वाली बातचीत टली, जबकि लेबनान में बढ़ते तनाव ने नए सवाल खड़े कर दिए हैं।
अमेरिका और ईरान के बीच शांति प्रक्रिया ने जिस रफ्तार से उम्मीद जगाई थी, उसी तेजी से उस पर अनिश्चितता के बादल भी छा गए हैं। फ्रांस में समझौते पर हस्ताक्षर के अगले ही दिन दोनों देशों के बीच होने वाली अहम बातचीत टाल दी गई। स्थिति इतनी अचानक बदली कि अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस का प्रतिनिधिमंडल रवाना होने की तैयारी में था और कई अधिकारी पहले ही स्विट्जरलैंड पहुंच चुके थे। इसके बावजूद बैठक नहीं हो सकी। रिपोर्ट्स इशारा कर रही हैं कि लेबनान में जारी संघर्ष इस देरी की बड़ी वजह बन सकता है। ऐसे समय में जब समझौते का मकसद क्षेत्रीय तनाव कम करना था, जमीनी हालात उल्टी दिशा में जाते दिख रहे हैं।
लेबनान बना नई कूटनीतिक चुनौती
अमेरिका और ईरान के बीच हुए समझौते में क्षेत्रीय मोर्चों पर तनाव कम करने की बात शामिल थी। लेबनान भी इस दायरे में था। हालांकि इजराइल की ओर से जारी सैन्य कार्रवाई ने समीकरण बदल दिए हैं। रिपोर्ट्स के मुताबिक ईरान चाहता है कि समझौते की भावना के अनुरूप लेबनान में भी हालात शांत हों, जबकि लगातार हमले आगे की वार्ता में मतभेद पैदा कर रहे हैं। यही वजह मानी जा रही है कि स्विट्जरलैंड में प्रस्तावित बातचीत को फिलहाल रोक दिया गया।
इजराइली मंत्री के बयान से बढ़ा विवाद
दक्षिणी लेबनान में चार इजराइली सैनिकों की मौत के बाद इजराइल के राष्ट्रीय सुरक्षा मंत्री इतामार बेन-गवीर का बयान नई बहस छेड़ रहा है। उन्होंने लेबनान के खिलाफ बेहद आक्रामक रुख अपनाने की वकालत की और कहा कि इजराइली नागरिकों की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता है। ऐसे बयान उस समय सामने आए हैं जब क्षेत्र में तनाव कम करने की अंतरराष्ट्रीय कोशिशें जारी हैं। राजनीतिक विश्लेषक मानते हैं कि इस तरह की बयानबाजी कूटनीतिक प्रयासों को और मुश्किल बना सकती है।
फ्रांस ने संघर्ष रोकने की मांग की
फ्रांस ने खुलकर कहा है कि लेबनान में सैन्य कार्रवाई रुकनी चाहिए। फ्रांसीसी विदेश मंत्री जीन-नोएल बैरोट ने लेबनान की संप्रभुता का सम्मान करने की जरूरत बताई और अमेरिका से भी इस मुद्दे पर सक्रिय भूमिका निभाने की अपील की। फ्रांस लेबनानी सेना के लिए अंतरराष्ट्रीय सहयोग जुटाने की कोशिश कर रहा है। इससे साफ है कि यूरोपीय देशों की चिंता अब केवल क्षेत्रीय सुरक्षा तक सीमित नहीं है, बल्कि संभावित मानवीय और राजनीतिक संकट पर भी केंद्रित है।
हिजबुल्लाह के हमले ने बढ़ाई सुरक्षा चिंता
दक्षिणी लेबनान के कफर तेबनित क्षेत्र में हिजबुल्लाह के ड्रोन हमले में पांच इजराइली सैनिक घायल हो गए। इजराइली सेना के अनुसार एक सैनिक की हालत गंभीर है। यह हमला उस घटना के कुछ घंटे बाद हुआ जिसमें एक बटालियन कमांडर समेत चार सैनिक मारे गए थे। लगातार हो रहे हमले दिखाते हैं कि सीमा क्षेत्र में हालात अभी भी बेहद संवेदनशील बने हुए हैं। यही वजह है कि शांति प्रक्रिया के समानांतर सुरक्षा चुनौतियां भी तेजी से बढ़ रही हैं।
समझौते को लेकर अमेरिका में भी खींचतान
रिपोर्ट्स के मुताबिक इजराइली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू अमेरिका-ईरान समझौते को प्रभावित करने के लिए अमेरिकी राजनीतिक और मीडिया वर्ग में समर्थन जुटाने की कोशिश कर रहे हैं। समझौते पर हस्ताक्षर के बाद कुछ दक्षिणपंथी आवाजों ने इसकी आलोचना की है और ईरान के लिए प्रस्तावित आर्थिक सहायता पर सवाल उठाए हैं। हालांकि अमेरिकी राजनीति के भीतर एक दूसरा पक्ष भी सामने आ रहा है। पहले कड़ा रुख रखने वाले कुछ नेताओं ने अब इस समझौते को अमेरिका के हित में बताया है। इससे संकेत मिलता है कि समझौते को लेकर बहस केवल मध्य पूर्व तक सीमित नहीं है, बल्कि अमेरिकी राजनीतिक गलियारों में भी जारी है।
शांति समझौते को लेकर ईरान की नई शर्त
ईरान ने अमेरिका के साथ प्रस्तावित वार्ता को लेकर नई शर्त सामने रखी है। CNN की रिपोर्ट के अनुसार एक राजनयिक सूत्र ने बताया कि तेहरान चाहता है कि लेबनान में जारी सैन्य कार्रवाई रुकने का स्पष्ट आश्वासन मिले, तभी दोनों देशों के बीच स्विट्जरलैंड में बातचीत दोबारा शुरू हो सकेगी। ईरानी पक्ष का कहना है कि हालिया समझौते में क्षेत्रीय संघर्षों को कम करने और विभिन्न मोर्चों पर हिंसा समाप्त करने की बात शामिल थी। ऐसे में लेबनान में जारी हमले समझौते की मूल भावना के खिलाफ जाते हैं। इसी वजह से ईरान ने पहले तय किए गए प्रावधानों के पालन की गारंटी मांगी है।
इजराइली हमलों के बाद अमेरिका और ईरान के बीच होने वाली अगली बैठक फिलहाल टाल दी गई है। हालांकि दोनों पक्षों की बातचीत पूरी तरह खत्म नहीं हुई है, लेकिन वार्ता फिर से कब शुरू होगी, इसे लेकर अभी कोई आधिकारिक समयसीमा सामने नहीं आई है।