UAE ने दावा किया है कि ईरान ने बैलिस्टिक मिसाइल और ड्रोन से हमला किया, जिन्हें हवा में मार गिराया गया। उधर अमेरिका-ईरान टकराव और होर्मुज संकट लगातार गहराता जा रहा है।
मध्य पूर्व में तनाव अब सिर्फ बयानबाजी तक सीमित नहीं दिख रहा। संयुक्त अरब अमीरात यानी UAE ने दावा किया है कि ईरान ने उसके खिलाफ बैलिस्टिक मिसाइल और ड्रोन दागे, जिन्हें एयर डिफेंस सिस्टम ने हवा में ही तबाह कर दिया। UAE रक्षा मंत्रालय के मुताबिक हमले में दो बैलिस्टिक मिसाइल और तीन ड्रोन इस्तेमाल किए गए। मंत्रालय ने कहा कि सभी टारगेट्स को इंटरसेप्ट कर लिया गया, हालांकि इस दौरान तीन लोग घायल हुए हैं।
ईरान ने अब तक इन आरोपों पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं दी है, लेकिन खाड़ी क्षेत्र में तेजी से बढ़ते सैन्य तनाव ने पूरी दुनिया की चिंता बढ़ा दी है।
सीजफायर के बीच अमेरिका ने फिर की बमबारी
तनाव उस वक्त और बढ़ गया जब अमेरिका ने सीजफायर के बावजूद ईरान पर नए एयरस्ट्राइक किए। अमेरिका का दावा है कि ईरानी सेना ने उसके जंगी जहाजों पर मिसाइल, ड्रोन और छोटी नावों से हमला किया था। इसके जवाब में अमेरिकी सेना ने ईरान के कई सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया।
राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने साफ कहा कि अगर ईरान ने समझौता नहीं किया तो अमेरिका आगे भी सैन्य कार्रवाई जारी रखेगा। दूसरी तरफ ईरान का आरोप है कि अमेरिकी हमलों में सैन्य ठिकानों नहीं बल्कि नागरिक इलाकों को निशाना बनाया गया।
होर्मुज स्ट्रेट बना सबसे बड़ा फ्लैशपॉइंट
ईरान और अमेरिका के बीच सबसे ज्यादा तनाव अब स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को लेकर है। यही समुद्री रास्ता दुनिया के बड़े हिस्से तक तेल सप्लाई पहुंचाने का मुख्य मार्ग माना जाता है। ईरान ने दावा किया कि उसने जवाबी कार्रवाई में होर्मुज स्ट्रेट और चाबहार पोर्ट के पास मौजूद अमेरिकी जहाजों को निशाना बनाया।
उधर संयुक्त राष्ट्र की समुद्री एजेंसी IMO के मुताबिक संकट के कारण खाड़ी क्षेत्र में करीब 1500 जहाज फंसे हुए हैं। इससे वैश्विक तेल सप्लाई और सप्लाई चेन पर असर बढ़ने लगा है। विशेषज्ञ मानते हैं कि अगर होर्मुज लंबे समय तक प्रभावित रहा तो दुनिया भर में तेल की कीमतों और व्यापार पर बड़ा असर पड़ सकता है।
ईरान बोला- हमारी मिसाइलें खत्म नहीं हुईं
ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने अमेरिका के उस दावे को खारिज कर दिया जिसमें कहा गया था कि ईरान का मिसाइल भंडार लगभग खत्म हो चुका है। अराघची ने कहा कि अमेरिकी खुफिया एजेंसियों की जानकारी गलत है। उन्होंने दावा किया कि ईरान का मिसाइल रिजर्व “120%” पर है और देश हर स्थिति के लिए तैयार है।
उन्होंने सोशल मीडिया पर लिखा कि जब भी कूटनीतिक समाधान की संभावना बनती है, अमेरिका सैन्य रास्ता चुन लेता है। उनके मुताबिक ईरान दबाव में झुकने वाला नहीं है।
अमेरिकी सेना ने ईरानी टैंकरों को निशाना बनाने का दावा
अमेरिकी सेंट्रल कमांड यानी CENTCOM ने दावा किया कि उसने ओमान की खाड़ी में दो खाली ईरानी तेल टैंकरों पर हमला किया। अमेरिका के मुताबिक ये जहाज प्रतिबंधों और नाकाबंदी को तोड़ते हुए ईरानी बंदरगाहों की तरफ बढ़ रहे थे। अमेरिकी सेना ने कहा कि एक तीसरे जहाज को भी निष्क्रिय कर दिया गया है। ईरान ने इसे अंतरराष्ट्रीय कानून का उल्लंघन बताया और आरोप लगाया कि अमेरिका जानबूझकर क्षेत्र में तनाव बढ़ा रहा है।
इजराइल-हिजबुल्लाह मोर्चे पर भी बढ़ी हिंसा
इसी बीच लेबनान सीमा पर भी हालात बिगड़ते नजर आ रहे हैं। इजराइल ने दावा किया है कि उसने हिजबुल्लाह के कई बड़े कमांडरों को बेरूत में एयरस्ट्राइक कर मार गिराया। जवाब में हिजबुल्लाह ने दक्षिणी लेबनान में इजराइली टैंक और सैन्य ठिकानों पर हमलों का दावा किया है। यानी अब यह संकट सिर्फ अमेरिका और ईरान तक सीमित नहीं रह गया। पूरे पश्चिम एशिया में कई मोर्चों पर तनाव एक साथ बढ़ रहा है।
दुनिया की नजर अब अगले 48 घंटों पर
रिपोर्ट्स के मुताबिक अमेरिका और ईरान के बीच 30 दिन के अस्थायी समझौते पर बातचीत चल रही है। इसमें लड़ाई रोकने और होर्मुज स्ट्रेट को दोबारा सामान्य करने पर चर्चा हो रही है। लेकिन लगातार हो रहे हमले और जवाबी कार्रवाई यह संकेत दे रहे हैं कि हालात अभी भी बेहद नाजुक बने हुए हैं।
अगर तनाव और बढ़ता है तो इसका असर सिर्फ खाड़ी देशों तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि तेल बाजार, वैश्विक व्यापार और एशियाई अर्थव्यवस्थाओं पर भी सीधा असर पड़ सकता है।