ईरान-इजरायल युद्ध के बीच इजरायल ने ईरान के खुफिया मंत्री इस्माइल खातिब को मारने का दावा किया। तेहरान में जनाजे में भारी भीड़, ईरान ने बदले की कसम खाई।
मिडिल ईस्ट में जारी जंग अब और खतरनाक मोड़ लेती दिख रही है। मिसाइलों और ड्रोन हमलों के बीच हर दिन नए दावे, नई चेतावनियां सामने आ रही हैं। 19वें दिन पहुंचे इस संघर्ष में अब ईरान के एक बड़े चेहरे की मौत की खबर ने हालात और भी गर्म कर दिए हैं।
इजरायल ने दावा किया है कि उसने ईरान के खुफिया मंत्री इस्माइल खातिब को मार गिराया है। वहीं, तेहरान की सड़कों पर जनाजे में उमड़ी भीड़ ने साफ कर दिया है कि इस घटना का असर सिर्फ सैन्य नहीं, बल्कि भावनात्मक और राजनीतिक भी है।
इजरायल का बड़ा दावा, ईरान में शोक की लहर
इजरायल के रक्षा मंत्री इजराइल काट्ज़ ने कहा कि रातभर चले हमलों में इस्माइल खातिब मारे गए। उन्होंने संकेत दिया कि आने वाले समय में और भी बड़े हमले हो सकते हैं। दूसरी तरफ, ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेज़ेश्कियान ने भी खातिब की मौत की पुष्टि की है। उन्होंने इसे 'कायराना हमला' बताया और देश में गहरे शोक की बात कही। यह सिर्फ एक अधिकारी की मौत नहीं मानी जा रही, बल्कि इसे ईरान की सुरक्षा व्यवस्था पर बड़ा झटका माना जा रहा है।
जनाजे में उमड़ा जनसैलाब, बदले की कसम
तेहरान में सुरक्षा प्रमुख अली लारिजानी और अन्य अधिकारियों के जनाजे में हजारों लोग सड़कों पर उतर आए। माहौल बेहद भावुक था, लेकिन गुस्सा भी साफ दिखाई दे रहा था। ईरान ने लारिजानी की मौत का बदला लेने की कसम खाते हुए इजरायल पर मिसाइल हमलों की 61वीं लहर चलाने का ऐलान किया है। इन बयानों के बाद ऐसा लग रहा है कि यह टकराव अब जल्दी थमने वाला नहीं है।
कौन थे इस्माइल खातिब?
इस्माइल खातिब सिर्फ एक मंत्री नहीं थे, बल्कि ईरान की खुफिया प्रणाली का अहम चेहरा थे। 1980 के दशक में ईरान-इराक युद्ध के दौरान सक्रिय भूमिका निभाई थी। इतना ही नहीं वह न्यायपालिका और खुफिया मंत्रालय में कई अहम पद पर भी रहे। 2022 में अमेरिका ने साइबर गतिविधियों के आरोप में प्रतिबंध लगाया। उनका अनुभव और नेटवर्क उन्हें ईरान की सुरक्षा रणनीति का अहम हिस्सा बनाता था।
साउथ पार्स गैस फील्ड पर हमला
इस बीच, दुनिया के सबसे बड़े गैस फील्ड साउथ पार्स पर हमले की खबर ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चिंता बढ़ा दी है। ईरान ने साफ चेतावनी दी है कि अगर हमले जारी रहे, तो खाड़ी देशों के तेल और गैस ठिकाने भी निशाने पर आ सकते हैं। इसका असर वैश्विक ऊर्जा बाजार पर पड़ना तय माना जा रहा है।
कहां जा रहा है यह युद्ध?
लगातार हमलों और जवाबी कार्रवाई के बीच अब यह संघर्ष सिर्फ दो देशों तक सीमित नहीं दिख रहा। अमेरिका, खाड़ी देश और वैश्विक ताकतें भी इसके असर में आ चुकी हैं।