ईरान-इजराइल युद्ध के 16वें दिन ईरान ने बैलिस्टिक मिसाइल से हमला किया। अमेरिकी दूतावास के पास की इमारत को नुकसान हुआ। खार्ग आइलैंड पर हमले के बावजूद तेल टैंकरों में ऑयल लोडिंग जारी है।
मिडिल ईस्ट में जारी युद्ध अब और खतरनाक मोड़ लेता दिख रहा है। Iran और Israel के बीच जारी जंग के 16वें दिन ईरान ने इजराइल पर बैलिस्टिक मिसाइल से हमला किया। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक इस हमले में गिरे मिसाइल के टुकड़ों से उस इमारत को नुकसान पहुंचा है, जहां अमेरिकी राजनयिक (diplomats) काम करते हैं। हालांकि यह साफ नहीं हो पाया है कि यह इमारत जेरूशलम में है या तेल अवीव में। हालांकि इस घटना के बाद इलाके में सुरक्षा अलर्ट बढ़ा दिया गया है और दोनों देशों के बीच तनाव और गहरा गया है।
खार्ग आइलैंड पर हमले के बाद भी तेल लोडिंग जारी
इधर ईरान के रणनीतिक तेल टर्मिनल खार्ग द्वीप पर अमेरिकी हमले के बावजूद वहां से तेल लोडिंग का काम जारी है। रिपोर्ट्स के मुताबिक वहां पांच तेल टैंकर पहले ही फ्यूल ऑयल भर चुके हैं, जबकि दो टैंकर अभी भी लोडिंग का इंतजार कर रहे हैं। सैटेलाइट तस्वीरों और जहाजों की गतिविधि पर नजर रखने वाले प्लेटफॉर्म्स ने भी इसकी पुष्टि की है। हालांकि अभी यह स्पष्ट नहीं है कि ये टैंकर किस देश या कंपनी से जुड़े हैं।
ईरान का दावा: सुप्रीम लीडर मुजतबा सुरक्षित
इस बीच ईरान ने साफ किया है कि देश के नए सुप्रीम लीडर मोजतबा खामेनेई पूरी तरह सुरक्षित हैं। एक ब्रिटिश अखबार ने दावा किया था कि अमेरिका-इजराइल के हमले में मुजतबा घायल हो गए थे और कोमा में हैं। लेकिन ईरानी अधिकारियों ने इन खबरों को पूरी तरह खारिज कर दिया है।
इजराइल ने मंजूर किया इमरजेंसी युद्ध बजट
युद्ध के बीच इजराइल सरकार ने सैन्य खर्च बढ़ाने का बड़ा फैसला लिया है। इजराइल ने 2.6 अरब शेकेल (करीब 74 हजार करोड़ रुपये) का इमरजेंसी बजट मंजूर किया है। इस रकम का इस्तेमाल हथियारों की खरीद, मॉडर्न वेपन सिस्टम और युद्ध सामग्री की आपूर्ति के लिए किया जाएगा। यह बजट देश के कुल 222 अरब डॉलर के वार्षिक बजट से निकाला जाएगा।
ईरान का बड़ा आरोप: 9/11 जैसा हमला कराने की साजिश
ईरान के वरिष्ठ नेता अली लरिजानी ने एक और सनसनीखेज दावा किया है। उन्होंने कहा कि जेफ्री एपस्टीन से जुड़े कुछ लोग अमेरिका में 2001 के सितंबर 11 हमले जैसे हमले की साजिश रच रहे हैं और इसका आरोप ईरान पर लगाने की कोशिश हो सकती है। लरिजानी ने कहा कि ईरान ऐसे किसी आतंकी हमले का समर्थन नहीं करता और उसका अमेरिकी जनता से कोई युद्ध नहीं है।
खाड़ी क्षेत्र में बढ़ा तेल संकट का खतरा
खार्ग आइलैंड से तेल लोडिंग जारी रहने के बावजूद विशेषज्ञों का मानना है कि अगर युद्ध और बढ़ता है तो वैश्विक तेल सप्लाई प्रभावित हो सकती है। मिडिल ईस्ट दुनिया के सबसे बड़े तेल आपूर्ति क्षेत्रों में से एक है। ऐसे में युद्ध का असर सिर्फ क्षेत्रीय नहीं बल्कि पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था पर पड़ सकता है।