अमेरिका और ईरान के बीच जारी तनाव एक बार फिर तेज हो गया है। व्हाइट हाउस ने दावा किया है कि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के 10 सूत्रीय प्रस्ताव को पूरी तरह खारिज कर दिया। इतना ही नहीं उसे 'कूड़ेदान में फेंक दिया गया' जैसा व्यवहारिक रूप से अस्वीकार कर दिया गया। यह बयान ऐसे समय आया है जब पश्चिम एशिया में हालात पहले से ही संवेदनशील बने हुए हैं और ईरान और इजराइल के बीच तनाव लगातार बढ़ रहा है।
व्हाइट हाउस का बड़ा दावा
व्हाइट हाउस की प्रेस सचिव कैरोलिन लेविट ने कहा कि ईरान की ओर से एक 10 बिंदुओं वाला प्रस्ताव भेजा गया था। जिसे अमेरिका ने गंभीरता से स्वीकार नहीं किया। उनके अनुसार यह प्रस्ताव अमेरिकी हितों के अनुरूप नहीं था। इसे तुरंत खारिज कर दिया गया। उन्होंने यह भी दावा किया कि अमेरिका की नेगोसिएशन टीम और राष्ट्रपति ट्रंप ने इस प्रस्ताव को बातचीत की प्रक्रिया से बाहर कर दिया।
होर्मुज स्ट्रेट को लेकर बयान
बयान में यह भी कहा गया कि स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को लेकर ईरान की ओर से स्थिति स्पष्ट की गई है। व्हाइट हाउस ने दावा किया कि ईरान ने कुछ शर्तों पर इस मार्ग को खोलने की सहमति जताई है। होर्मुज स्ट्रेट दुनिया के तेल व्यापार के लिए बेहद महत्वपूर्ण मार्ग माना जाता है। यहां किसी भी तनाव का सीधा असर वैश्विक बाजारों पर पड़ता है।
ईरान की रणनीति और अमेरिका का रुख
रिपोर्टों के अनुसार, ईरान की ओर से 10 सूत्रीय प्रस्ताव को लेकर अमेरिकी राजनीति में भी बहस तेज हो गई है। डेमोक्रेटिक सांसद क्रिस मर्फी सहित कई नेताओं ने इस प्रस्ताव और अमेरिका की प्रतिक्रिया पर सवाल उठाए हैं। हालांकि व्हाइट हाउस ने स्पष्ट कहा है कि अमेरिका किसी भी ऐसे समझौते को स्वीकार नहीं करेगा जो उसके राष्ट्रीय हितों के खिलाफ हो।
अंतरराष्ट्रीय तनाव के बीच बयानबाजी तेज
मध्य पूर्व में चल रहे घटनाक्रम, खासकर लेबनान और गाजा क्षेत्र से जुड़े तनाव के बीच यह बयान और अधिक महत्वपूर्ण माना जा रहा है। अमेरिका की नीति को लेकर घरेलू राजनीति में भी बहस तेज होती दिख रही है।
व्हाइट हाउस का यह बयान ऐसे समय में आया है जब वैश्विक स्तर पर कूटनीतिक संतुलन बेहद नाजुक बना हुआ है और किसी भी नए घटनाक्रम का असर अंतरराष्ट्रीय संबंधों पर पड़ सकता है।