भारतीय सेना प्रमुख जनरल उपेंद्र द्विवेदी को यूएस आर्मी वॉर कॉलेज हॉल ऑफ फेम में शामिल किया गया, यह भारत के लिए एक बड़ी वैश्विक सैन्य उपलब्धि मानी जा रही है। Swadesh News
भोपाल: अंतरराष्ट्रीय मंच पर भारत की सैन्य साख को एक और मजबूत पहचान मिली है। भारतीय सेना प्रमुख Gen Upendra Dwivedi को अमेरिका के प्रतिष्ठित United States Army War College के इंटरनेशनल हॉल ऑफ फेम में शामिल किया गया है। यह सम्मान सिर्फ व्यक्तिगत उपलब्धि नहीं, बल्कि भारतीय सेना की वैश्विक भूमिका और बढ़ती स्वीकार्यता का भी संकेत है।
तीसरे भारतीय सेना प्रमुख जिन्हें मिला यह सम्मान
इस खास सूची में शामिल होने वाले जनरल द्विवेदी तीसरे भारतीय हैं। उनसे पहले Gen V. K. Singh और Gen Bikram Singh को भी यह सम्मान मिल चुका है इससे साफ है कि भारत की सैन्य नेतृत्व क्षमता को दुनिया लगातार गंभीरता से देख रही है और मान भी रही है।
अमेरिका दौरे के दौरान हुआ सम्मान समारोह
अमेरिका के Carlisle Barracks में स्थित इस संस्थान में आयोजित कार्यक्रम के दौरान जनरल द्विवेदी को औपचारिक रूप से शामिल किया गया बताया गया कि उन्होंने वहां फैकल्टी और अंतरराष्ट्रीय सैन्य अधिकारियों से बातचीत की, और बदलते वैश्विक सुरक्षा माहौल पर अपने विचार साझा किए उन्होंने सैन्य नेतृत्व, प्रोफेशनल मिलिट्री एजुकेशन और भविष्य की चुनौतियों पर भी खुलकर चर्चा की , जो वहां मौजूद अधिकारियों के लिए खासा अहम माना जा रहा है।
रिसर्च प्रोजेक्ट्स और प्रोग्राम का भी लिया जायजा
यह दौरा सिर्फ सम्मान तक सीमित नहीं रहा। जनरल द्विवेदी ने वॉर कॉलेज के स्कॉलर्स प्रोग्राम के तहत चल रहे रिसर्च प्रोजेक्ट्स का भी अवलोकन किया कई विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह की भागीदारी से भारत और अमेरिका के बीच बौद्धिक और रणनीतिक सहयोग और मजबूत होगा ।
वॉशिंगटन में उच्च स्तरीय मुलाकातें
इससे पहले अमेरिका में भारत के राजदूत Vinay Mohan Kwatra ने वॉशिंगटन स्थित ‘इंडिया हाउस’ में सेना प्रमुख की मेजबानी की यह मुलाकात औपचारिक जरूर थी, लेकिन इसके पीछे एक बड़ा रणनीतिक संदेश भी था — दोनों देशों के बीच रक्षा सहयोग अब और गहरा हो रहा है।
भारत-अमेरिका रक्षा संबंधों को नई दिशा
हाल के समय में नौसेना और वायुसेना प्रमुखों के दौरे भी अमेरिका में हुए हैं। इसे एक समन्वित रणनीति के तौर पर देखा जा रहा है विशेषज्ञ मानते हैं कि यह लगातार संवाद दोनों देशों के बीच सैन्य तालमेल, संयुक्त अभ्यास और तकनीकी सहयोग को नई दिशा देगा।
इंडो-पैसिफिक पर साझा नजर
भारत और अमेरिका दोनों ही इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में स्थिरता और संतुलन बनाए रखने के पक्षधर हैं ऐसे में इस तरह के उच्च स्तरीय दौरे सिर्फ औपचारिकता नहीं, बल्कि एक बड़े रणनीतिक एजेंडे का हिस्सा हैं , जिसमें साझा सुरक्षा, तकनीकी साझेदारी और भविष्य की चुनौतियों से निपटने की तैयारी शामिल है।
अगर सीधे शब्दों में समझें, तो यह सम्मान भारत की उस बढ़ती भूमिका को दर्शाता है जो अब सिर्फ क्षेत्रीय नहीं, बल्कि वैश्विक स्तर पर नजर आ रही है और शायद यही वजह है कि आज भारतीय सेना के नेतृत्व को दुनिया के सबसे प्रतिष्ठित सैन्य संस्थानों में जगह मिल रही है।