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Bangladesh Elections: BNP Leads, Hasina Calls Poll

बांग्लादेश जनादेशः 20 साल बाद BNP ने 53 सीटें जीतीं, तारिक रहमान का PM बनना तय

बांग्लादेश चुनाव में बीएनपी को 53 और जमात गठबंधन को 38 सीटें, शेख हसीना ने चुनाव फर्जी बताकर रद्द करने की मांग की

बांग्लादेश जनादेशः 20 साल बाद bnp ने 53 सीटें जीतीं तारिक रहमान का pm बनना तय

बांग्लादेश में गुरुवार को हुए आम चुनाव में बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (बीएनपी) ने 53 सीटें जीत ली हैं। वहीं जमात-ए-इस्लामी के नेतृत्व वाले गठबंधन के खाते में 38 सीटें आई हैं। बीएनपी प्रमुख तारिक रहमान दोनों सीटों से जीत गए हैं। 208 सीटों के नतीजे अभी आना बाकी हैं।

299 सीटों पर हुए चुनाव में दोपहर 2 बजे तक 36 हजार मतदान केंद्रों पर 47.91 प्रतिशत मतदान दर्ज किया गया। अंतरिम सरकार के मुख्य सलाहकार मोहम्मद यूनुस, बीएनपी प्रमुख तारिक रहमान और छात्र नेता नाहिद इस्लाम ने मतदान किया।

मतदान के दौरान हिंसा, एक नेता की मौत

बांग्लादेश में वोटिंग के दौरान खुलना में एक मतदान केंद्र के बाहर जमात-ए-इस्लामी कार्यकर्ताओं के साथ झड़प में बीएनपी नेता मोहिबुज्जमान कोच्ची की मौत हो गई। मुंशीगंज-3 और गोपालगंज सदर इलाके में मतदान केंद्रों के बाहर बम फेंके गए। गोपालगंज में धमाके से तीन लोग घायल हो गए। संसदीय चुनाव के साथ-साथ बांग्लादेशी नागरिक 84 सूत्रीय सुधार प्रस्ताव से संबंधित जनमत सर्वेक्षण में भी हिस्सा ले रहे हैं।

17 करोड़ की आबादी वाले देश में 12.7 करोड़ मतदाता

17 करोड़ की आबादी वाले देश बांग्लादेश में 12.7 करोड़ मतदाता हैं। चुनाव में 109 महिलाएं मैदान में हैं, जिससे देश में लैंगिक प्रतिनिधित्व को लेकर चिंताएं बढ़ी हैं। गोपालगंज और मुंशीगंज में हुए बम धमाकों से दहशत फैल गई, लेकिन बड़े पैमाने पर अशांति की कोई सूचना नहीं है। कुछ स्थानों पर छुटपुट घटनाएं हुईं।

44 प्रतिशत वोटर 37 साल से कम उम्र के

जनांकिकीय दृष्टि से देखें तो बांग्लादेश में लगभग 44 प्रतिशत मतदाता 37 वर्ष से कम उम्र के हैं और करीब 45 लाख पहली बार मतदान करने वाले मतदाता हैं। चुनावी हिंसा की घटनाओं के बावजूद अन्य स्थानों पर माहौल काफी हद तक शांत रहा।खुलना के एक मतदान केंद्र पर सुबह 9 बजे वोट डालने के दौरान 60 वर्षीय बीएनपी नेता मोहिबुज्जमान को दिल का दौरा पड़ने से मौत हो गई, जिसके बाद एक सीट पर मतदान निरस्त कर दिया गया।चुनाव में अल्पसंख्यक उम्मीदवार भी मैदान में हैं। क्षेत्रीय और आर्थिक मुद्दों का इस चुनाव पर असर दिखाई दे रहा है। माना जा रहा है कि यह चुनाव देश के भविष्य की दिशा तय करेगा।

चुनावः एक नजर

चुनाव: संसदीय
कुल जिले: 64
कुल संसदीय सीटें: 300
कुल प्रत्याशी: 2000
कुल पुरुष प्रत्याशी: 1981
कुल महिला प्रत्याशी: 109

हसीना सरकार हटने के बाद भारत-बांग्लादेश संबंध प्रभावित

जुलाई 2024 में हसीना सरकार के हटने के बाद से भारत और बांग्लादेश के रिश्ते प्रभावित हुए हैं। नई दिल्ली बांग्लादेश के घटनाक्रम पर बारीकी से नजर रखे हुए है और अगली लोकतांत्रिक सरकार से स्थिरता की उम्मीद की जा रही है। मतगणना के नतीजों और विजयी दल के रुख से ही स्पष्ट होगा कि बांग्लादेश किस दिशा में आगे बढ़ेगा और उसकी लोकतांत्रिक पहचान कैसी होगी।

1971 में पाकिस्तान से आजादी मिलने के बाद से ही बाग्लादेश ने कठिन सैनिक शासन और कमजोर लोकतंत्रीय व्यवस्था का दौर देखा है। इस चुनाव को कई सालों की राजनितिक उथल-पुथल के बाद देश की लोकतांत्रिक मजबूती का एक अहम टेस्ट माना जा रहा है। लेकिन बांग्लादेश के राजनीतिक माहौल में एक बड़ा बदलाव आया है।

अवामी लीग की सरकार को छात्र आंदोलन के बाद हटना पड़ाः पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना के नेतृत्व वाली पार्टी अवामी लीग की सरकार को 2024 के छात्र आंदोलन के बाद सरकार से हटना पड़ा। चुनाव लड़ने से भी रोक दिया गया। अवामी लीग की अनुपस्थिति में मुख्य मुकाबला तारिक रहमान के नेतृत्व वाली बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी और शफीकुर रहमान के नेतृत्व वाली पार्टी जमात-ए-इस्लामी के बीच है। किसी भी पार्टी या गठबंधन को बहुमत पाने के लिए कम से कम 151 सीटों की जरूरत होगी।

खालिदा जिया के बेटे वापस ढाका लौटे बांग्लादेश के प्रमुख सलाहकार

मुहम्मद यूनुस ने अपना मतदान करने के बाद चुनावों को 'एक बुरे सपने का अंत और एक नए सफर की शुरुआत' बताया है। इन्होने आगे कहा की चुनावों से 'एक नए बांग्लादेश का उदय' होगा। पूर्व प्रधानमंत्री खालिदा जिया और पूर्व राष्ट्रपति जिया उर रहमान के बेटे तारिक रहमान पिछले 17 साल से देश निकाला के बाद दिसंबर 2025 में अपने वतन ढाका लौटे। उन्होंने चुनावों में अपनी भागीदारी को लेकर पार्टी नेताओं के साथ तैयारी की। आज मतदान के दौरान उन्होंने मतदाताओं से बड़ी संख्या में वोट डालने की अपील की और चुनाव को देश में लोकतान्त्रिक संतुलन की बहाली के लिए जरूरी बताया। अवामी लीग की अनुपस्थिति में राजनीतिक विश्लेषक को उम्मीद है कि इनके बिखरे हुए मतदाता आधार में कई चुनाव क्षेत्रों में बीएनपी को फायदा होगा। बांग्लादेश में जमात-ए-इस्लामी पुनः प्रभावी दस्तक के साथ सक्रीय है, जिसे पहले 1971 के मुक्ति संघर्ष के दौरान अपनी विवादित भूमिका के कारण 2013 में हसीना सरकार द्वारा प्रतिबंधित कर दिया गया था। हसीना के प्रधानमंत्री पद से अपदस्थ होने के बाद मोहम्मद यूनुस के नेतृत्व वाली सरकार द्वारा प्रतिबन्ध हटा लिया गया था। जमात ने नई बनी नेशनल सिटिजन्स पार्टी के साथ गठबंधन किया है, जो 2024 के छात्र आंदोलन से उभरा छात्रों के नेतृत्व वाला दल है। नेशनल सिटिजन्स पार्टी के छात्र नेताओं की देश के युवाओं में अपील इनके पक्ष में अहम रोल निभा सकती है।

 

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