बांग्लादेश के 13वें आम चुनाव में 48% मतदान दर्ज। छिटपुट हिंसा के बीच लोकतंत्र की बड़ी परीक्षा, शुक्रवार तक नतीजे साफ होने की उम्मीद।
बांग्लादेश में गुरुवार को 13वें आम चुनाव के लिए मतदान संपन्न हो गया। शुरुआती आंकड़ों के मुताबिक करीब 48 प्रतिशत वोटिंग दर्ज की गई है। कुछ इलाकों से छिटपुट हिंसा की खबरें जरूर आईं लेकिन व्यापक स्तर पर मतदान अपेक्षाकृत शांतिपूर्ण रहा। राजनीतिक अस्थिरता के लंबे दौर के बाद हो रहे इस चुनाव को बांग्लादेश के लोकतंत्र की बड़ी परीक्षा माना जा रहा है। अब सबकी निगाहें मतगणना पर हैं, जो मतदान खत्म होने के तुरंत बाद शुरू होनी है और शुक्रवार सुबह तक तस्वीर साफ हो सकती है।
299 सीटों पर वोटिंग, एक सीट पर चुनाव रद्द
सुबह 7:30 बजे से देशभर के 299 संसदीय क्षेत्रों में मतदान शुरू हुआ, जो शाम 4:30 बजे तक चला। 300 में से एक सीट पर उम्मीदवार की मृत्यु के कारण चुनाव टाल दिया गया। करीब 12 करोड़ 70 लाख मतदाता इस बार वोट डालने के पात्र थे। संसद की 300 सीटों के लिए लगभग 2000 उम्मीदवार मैदान में हैं, लेकिन इनमें सिर्फ 109 महिला उम्मीदवार हैं। यह आंकड़ा खुद बहुत कुछ कहता है।
धमाके की खबरों से दहशत
गोपालगंज और मुंशीगंज से कच्चे बम धमाकों की खबर आई, जिससे कुछ समय के लिए अफरा-तफरी मच गई। हालांकि प्रशासन ने हालात पर काबू पाने का दावा किया है। ज्यादातर इलाकों में मतदान केंद्रों पर लंबी कतारें दिखीं, खासकर युवाओं में उत्साह नजर आया। खुलना में एक दुखद घटना भी हुई, जहां BNP नेता मोहिबुज्जमान कोची की कथित तौर पर कार्डियक अरेस्ट से मौत हो गई, वह वोट डालने पहुंचे थे।
अवामी लीग बाहर, मुकाबला BNP और जमात के बीच
पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना की अवामी लीग इस बार चुनाव मैदान में नहीं है। 2024 के छात्र आंदोलन के बाद अंतरिम सरकार ने पार्टी पर चुनाव लड़ने से रोक लगा दी थी। ऐसे में मुख्य मुकाबला बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (BNP) और जमात-ए-इस्लामी के बीच माना जा रहा है। BNP का नेतृत्व तारिक रहमान कर रहे हैं, जो 17 साल बाद दिसंबर 2025 में देश लौटे। जमात-ए-इस्लामी, जो कभी प्रतिबंधित थी, अब फिर सक्रिय है और छात्र आंदोलन से निकली नेशनल सिटिज़न्स पार्टी के साथ तालमेल में है। यह समीकरण कितना असर डालेगा, यह नतीजे बताएंगे। बहुमत के लिए 151 सीटों की जरूरत होगी। अवामी लीग की गैरमौजूदगी में माना जा रहा है कि उसके पारंपरिक वोट बैंक का फायदा किसी एक पार्टी को मिल सकता है, लेकिन तस्वीर पूरी तरह साफ नहीं है।
84 सूत्रीय सुधार प्रस्ताव पर भी जनमत
इस बार मतदान के साथ 84 बिंदुओं वाले सुधार प्रस्ताव पर जनमत संग्रह भी कराया गया। इसमें प्रधानमंत्री के कार्यकाल की सीमा तय करने और कार्यपालिका की शक्तियों को सीमित करने जैसे सुझाव शामिल हैं। अगर यह प्रस्ताव पास होता है, तो बांग्लादेश की राजनीतिक संरचना में बड़े बदलाव संभव हैं। नहीं हुआ, तो मौजूदा ढांचा ही जारी रहेगा।
युवाओं की भूमिका निर्णायक
करीब 44 प्रतिशत मतदाता 37 साल से कम उम्र के हैं। लगभग 45 लाख लोग पहली बार वोट डाल रहे हैं। बेरोजगारी, महंगाई और राजनीतिक पारदर्शिता जैसे मुद्दे युवाओं के बीच प्रमुख रहे। ढाका विश्वविद्यालय के पास एक मतदान केंद्र पर बातचीत में कुछ छात्रों ने कहा कि इस बार हम बदलाव के लिए वोट दे रहे हैं। यह भावना कितनी व्यापक है, इसका असर सीटों पर दिखेगा।
भारत की नजर भी टिकी
शेख हसीना के पद छोड़ने के बाद भारत-बांग्लादेश संबंधों में ठंडापन आया है। नई सरकार का रुख क्या होगा, इस पर नई दिल्ली करीबी नजर रखे हुए है। खासकर इसलिए क्योंकि BNP और जमात-ए-इस्लामी का भारत के साथ संबंधों का इतिहास जटिल रहा है।