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अमेरिका की हरकतों ने बढ़ाई कनाडा की बेचैनी, विशेषज्ञ बोले- अब पुराना अमेरिका नहीं रहा

अमेरिका की हरकतों ने बढ़ाई कनाडा की बेचैनी, विशेषज्ञ बोले- अब पुराना अमेरिका नहीं रहा

वेनेजुएला में अमेरिका की हरकतों से कनाडा में चिंता, विशेषज्ञों ने साझा की अपनी राय—क्या अमेरिका अब वैसा नहीं रहा जैसा पहले था?

अमेरिका की हरकतों ने बढ़ाई कनाडा की बेचैनी विशेषज्ञ बोले- अब पुराना अमेरिका नहीं रहा

अचानक बदलते वैश्विक राजनीति के माहौल में एक बार फिर उत्तर अमेरिका की शांति खतरे की तरफ इशारा कर रही है. वेनेजुएला में अमेरिका की हालिया कार्रवाई ने न सिर्फ यूरोप और लैटिन अमेरिका बल्कि कनाडा के आम लोगों के बीच भी बेचैनी पैदा कर दी है । सवाल अब यहीं है: क्या अमेरिका की नई रणनीति सिर्फ विदेशों तक सीमित रहेगी, या इसके प्रभाव पड़ोस देश तक भी पहुंचेंगे ?

कनाडा में बढ़ते हैं सवाल और असमंजस

अमेरिका द्वारा वेनेजुएला में सेना भेजकर राष्ट्रपति निकोलस मादुरो को पकड़ने जैसा कदम उठाने के बाद कनाडा में लोग हैरान हैं। सोशल मीडिया से लेकर रोज़मर्रा की बातचीत में यही चर्चा है कि अगर अमेरिका ऐसे आक्रामक कदम उठा सकता है, तो क्या इसके असर से कोई भी देश सुरक्षित रह सकता है?

विशेषज्ञों की राय: अब वह अमेरिका नहीं रहा

कनाडा के प्रोफेसर थॉमस होमर-डिक्सन कहते हैं कि अब अमेरिका किसी भी तरह का सैन्य दबाव आसानी से डाल सकता है पहले जैसा शांत और पूर्वानुशासित देश अब नहीं रहा उनके शब्दों में - अगर कनाडा के खिलाफ सैन्य दबाव डाला गया, तो असर सिर्फ आज नहीं बल्कि आने वाली दशकों तक पड़ेगा। ये टिप्पणी सुनकर कई कनाडाई सुरक्षा विशेषज्ञों ने भी संकेत दिए हैं कि यह सिर्फ एक चेतावनी नहीं बल्कि वास्तविक चिन्ता है।

कनाडा-अमेरिका रिश्तों में असुरक्षा की लकीरें

कनाडाई पत्रकार मानते हैं कि ट्रम्प प्रशासन की हरकतें सिर्फ वेनेजुएला तक सीमित नहीं हैं। एक दशक पहले भी ट्रम्प ने यह बयान दिया था कि वह कनाडा को अमेरिका का 51वां राज्य बनाना चाहेंगे जिसे तब मज़ाक में ही लिया गया था ।आज वही बातें नए संदर्भ में उभर रही हैं कुछ विशेषज्ञों के मुताबिक आर्कटिक क्षेत्र में संसाधनों की महत्वता और रणनीतिक स्थिति इसी बेचैनी का कारण है।

नयी दिशा में कनाडा की कोशिशें

कनाडा के प्रधानमंत्री मार्क कार्नी ने सत्ता संभालते ही अमेरिका पर निर्भरता कम करने की रणनीति अपनाई। इसके तहत वो चीन और अन्य देशों के साथ व्यापार बढ़ाने पर ज़ोर दे रहे हैं उन्होंने सार्वजनिक रूप से कहा है कि ग्रीनलैंड और डेनमार्क की संप्रभुता का सम्मान होना चाहिए। लेकिन उन्होंने अमेरिका की पुरानी धमकियों पर स्पष्ट टिप्पणी करने से बचा लिया।

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