लोकसभा में महिला आरक्षण से जुड़े संविधान संशोधन बिल को जरूरी बहुमत नहीं मिला और यह 54 वोट से गिर गया। पक्ष में 298 और विपक्ष में 230 वोट पड़े। सरकार अन्य बिलों पर वोटिंग से पीछे हटी।
नई दिल्ली में लोकसभा की कार्यवाही के दौरान महिला आरक्षण से जुड़े अहम संविधान संशोधन बिल को सरकार पास नहीं करा सकी। करीब 21 घंटे की लंबी बहस के बाद हुए मतदान में बिल को आवश्यक दो-तिहाई बहुमत नहीं मिला और यह 54 वोट से गिर गया।
आंकड़ों में समझें क्यों गिरा बिल
संविधान (131वां) संशोधन विधेयक 2026 के तहत लोकसभा सीटों की संख्या 850 करने का प्रस्ताव था। इस पर हुए मतदान में कुल 528 सांसदों ने हिस्सा लिया।
- पक्ष में वोट: 298
- विपक्ष में वोट: 230
इस बिल को पारित कराने के लिए 352 वोटों की जरूरत थी, लेकिन समर्थन में केवल 298 वोट ही मिल पाए। इस तरह बिल आवश्यक बहुमत से 54 वोट पीछे रह गया।
सरकार ने बाकी दो बिलों पर वोटिंग टाली
पहले बिल के गिरने के बाद सरकार ने परिसीमन संशोधन संविधान बिल 2026 और केंद्र शासित प्रदेश कानून (संशोधन) बिल 2026 पर वोटिंग कराने से इनकार कर दिया। इससे स्पष्ट संकेत मिला कि सदन में समर्थन की स्थिति अनिश्चित बनी हुई है।
11 साल में पहली बार सरकार को झटका
प्रधानमंत्री Narendra Modi के नेतृत्व वाली सरकार के लिए यह एक महत्वपूर्ण राजनीतिक झटका माना जा रहा है। पिछले 11 वर्षों में यह पहला मौका है जब सरकार लोकसभा में कोई प्रमुख विधेयक पारित नहीं करा पाई।
सरकार का पक्ष: विपक्ष पर लगाया आरोप
गृह मंत्री Amit Shah ने मतदान से पहले अपने संबोधन में विपक्ष को जिम्मेदार ठहराया। उन्होंने कहा कि यदि यह बिल पारित नहीं होता है तो इसकी जिम्मेदारी विपक्ष की होगी और देश की महिलाएं इसे देख रही हैं।
विपक्ष का दावा: संविधान की रक्षा हुई
विपक्ष ने बिल गिरने को अपनी जीत बताया।
- Rahul Gandhi ने कहा कि यह संविधान पर हमला था, जिसे विपक्ष ने मिलकर रोक दिया।
- Priyanka Gandhi Vadra ने इसे लोकतंत्र और देश की एकता की जीत बताया।
- Shashi Tharoor ने कहा कि वे महिला आरक्षण के पक्ष में हैं, लेकिन इसे परिसीमन से जोड़ना उचित नहीं है।
बहस के दौरान तीखे आरोप-प्रत्यारोप
संसद में चर्चा के दौरान सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच तीखी नोकझोंक देखने को मिली। अमित शाह ने विपक्ष के नेताओं की भाषा और व्यवहार पर सवाल उठाए, वहीं विपक्ष ने सरकार की मंशा पर गंभीर आरोप लगाए।
क्या था बिल का उद्देश्य
यह संशोधन बिल महिला आरक्षण को लागू करने की प्रक्रिया को आगे बढ़ाने और लोकसभा सीटों के पुनर्निर्धारण (परिसीमन) से जोड़ने से संबंधित था। हालांकि, इसी बिंदु पर सबसे ज्यादा विवाद सामने आया।