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Women Reservation Bill Fails, Political Clash Erup

जीत-हार की लड़ाई में डूबा आधी आबादी का हक

लोकसभा में महिला आरक्षण विधेयक पारित न होने पर सियासत तेज। भाजपा और विपक्ष आमने-सामने, महिलाओं के अधिकार पर बहस गहराई, सोशल मीडिया पर भी दिखा गुस्सा।


जीत-हार की लड़ाई में डूबा आधी आबादी का हक 

महिला आरक्षण पर चढ़ा सियासी पारा भाजपा-कांग्रेस सहित अन्य राजनीतिक दलों के नेता आए आमने-सामने

महिला आरक्षण संशोधन विधेयक को लेकर देश की सियासत पूरी तरह गर्मा गई है। इस मुद्दे पर देश की दोनों बड़ी राजनीतिक शक्तियां आमने-सामने हैं। शुक्रवार को लोकसभा में पेश किया गया यह विधेयक दो तिहाई बहुमत न मिल पाने के कारण गिर गया, जिसके बाद सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच आरोपों का दौर शुरू हो गया है। जहां भाजपा इसे विपक्ष की 'महिला विरोधी' मानसिकता बता रही है, वहीं विपक्ष ने इसे लोकतंत्र और संविधान को बचाने की जीत करार दिया है। जहां भाजपा इसे आने वाले चुनावों में 'महिला सशक्तिकरण बनाम विपक्ष' का मुद्दा बनाएगी, वहीं विपक्ष इसे 'संविधान और संघीय ढांचे की रक्षा' के रूप में पेश कर रहा है। फिलहाल, करोड़ों महिलाओं की निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि उन्हें उनका विधायी हक कब और किस स्वरूप में मिलेगा।

वार-पलटवार, किसने क्या कहा...

काग्रेस और विपक्षी पार्टिया शुरू से ही महिला विरोधी रही हैं। 1996 में जब देवेगौड़ा ने बिल पेश किया था, तो उन्होंने इसका विरोध किया था। जब वाजपेयी ने इसे पेश किया था, तो उन्होंने उसका भी विरोध किया था, असल में, इसी विपक्ष के सदस्यों ने बिल फाड़ दिया था। लेकिन देश बदल गया है। देश की हालत और रास्ता बदल गया है। वे नहीं चाहते कि इस सदन में महिला आरक्षण बिल पास हो, न ही वे महिलाओं का सशक्तिकरण चाहते है.

गिरिराज सिंह, सांसद, भाजपा

ये विपक्षी दल पुरुषवादी सोच की गिरफ्त में है और नहीं चाहते कि देश की भलाई में महिलाओं की बराबर भागीदारी हो। इन दलों को भलीभांति समझ लेना चाहिए कि भाजपा महिला आरक्षण के लिए प्रतिबद्ध है और इसे लागू करके रहेगी। 

- केशव प्रसाद मौर्य

महिलाओं को अधिकार नहीं देने की मानसिकता लेकर कांग्रेस और विपक्षियों ने बिल पारित नहीं होने दिया इससे हम सब दुखी है। इससे देश की महिलाओं को नुकसान हुआ है। क्या आपने दुनिया में कभी कोई ऐसी पार्टी देखी है जो महिलाओं को अधिकार नहीं देने का फैसला करके उसको वो जीत मानते हैं? कांग्रेस पार्टी की यह मानसिकता कि वे आरक्षण नहीं देंगे और फिर बिल को गिराने के बाद जश्न मना रहे हैं, इससे ज्यादा महिला विरोधी मानसिकता और क्या हो सकती है?

-किरण रिजिजू, केंद्रीय मंत्री

महिलाएं याद रखेंगी कि 25 करोड़ महिलाओं को बैंक का खाता खोलने में कांग्रेस की सरकार ने कभी समर्थन नहीं दिया। 10 करोड़ से ज्यादा महिलाओं को कभी भी कांग्रेस के कार्यकाल में आयुष्मान भारत का सहयोग प्राप्त नहीं हुआ। वहीं भाजपा के नेतृत्व वाली एनडीए की सरकार में पहली बार जेंडर बजट की व्यवस्था हुई, कांग्रेस के कार्यकाल में नहीं और देश की महिलाएं ये भी याद रखेंगी कि 33 प्रतिशत आरक्षण का बिल भाजपा के नेतृत्व वाली सरकार ने दोनों सदनों में पास किया गया।

- स्मृति ईरानी, पूर्व केंद्रीय मंत्री

विपक्षियों के दोहरे चेहरे हैं। इनकी मां घर घर सेवा करती हैं, तब ये नेतागिरी कर रहे हैं। इनकी पत्नी प्रचार कर रही हैं, तब ये नेतागिरी कर पा रहे है। पुरुषों का जमाना अब चला गया है। अब महिलाओं का जमाना आया है। इस बात को स्वीकार करो।

- रवि किशन, सांसद, भाजपा

2023 वाला महिला आरक्षण बिल तुरंत लागू करें, मौजूदा सीटों पर 33 प्रतिशत आरक्षण दें। कांग्रेस समर्थन को तैयार। महिला आरक्षण नहीं, परिसीमन की साजिश थी। पुराना बिल लाओ. अभी समर्थन देंगे। विधेयक के खारिज होने पर कहा, 'इसका कोई उत्साह नहीं है। हमने इस पर उत्साह मनाया है कि हमने लोकतंत्र बचाया है। क्योंकि इनका जो षड्यंत्र था वो एकदम अलग था। परिसीमन में जो इनकी साजिश थी उसे हमने हराया है।

- प्रियंका गांधी, सांसद, कांग्रेस

महिला आरक्षण विधेयक के खिलाफ कोई नहीं है कोई भी पार्टी या सांसद इसके खिलाफ नहीं है, ये बात समझानी होगी। सत्ता पक्ष से पूछिए, ये तो पहले से पास हो रखा है। हमारी मांग थी कि पिछड़ा वर्ग की महिलाओं को भी इसमें शामिल किया जाए।

- तेजस्वी यादव, राजद मेला

यदि यह विधेयक पारित हो जाता, तो यह देश के लोकतंत्र और संविधान की 'पूर्ण हार' होती। यह विधेयक सिर्फ महिलाओं को आरक्षण देने के उद्देश्य से नहीं लाया गया था, बल्कि इसके पीछे राजनीतिक मंशा छिपी हुई थी। इस कानून के जरिए लोकसभा सीटो की संख्या बढ़ाने और परिसीमन (डेलिमिटेशन) की प्रक्रिया को इस तरह इस्तेमाल किया जाता है। जिससे कई राज्यों की राजनीतिक ताकत कम हो जाती है। 

- आदित्य ठाकरे, नेता, शिवसेना

महिला आरक्षण के नाम पर लोकतंत्र और संविधान को कमजोर करने की साजिश रची जा रही थी, जिसे एकजुट विपक्ष ने विफल कर दिया। सरकार परिसीमन के जरिए राजनीतिक सतुलन बिगाड़ने की कोशिश कर रही थी, जिससे लोकतांत्रिक ढांचे को अपने पक्ष में मोड़ा जा सके। हालिया घटनाक्रम में गिरा महिला आरक्षण विधेयक नहीं, बल्कि भाजपा की रणनीति है। यह मुद्दा केवल महिलाओं के अधिकारों का नहीं, बल्कि संविधान की मूल भावना और संघीय ढांचे की सुरक्षा से भी जुड़ा हुआ है। 

- कुमारी सैलजा, पूर्व केंद्रीय मंत्री

मोदी सरकार देश को तोड़ने की कोशिश कर रही थी। यह उत्तर और दक्षिण का झगड़ा करना चाह रही थी। वो झगडा इस बिल को गिराने से रुक गया है। खास तौर पर तमिलनाडु में उड़ीसा की सीटें कम हो रही थीं, बंगाल की सीटें कम हो रही थी तो जो असंतोष पैदा हो रहा था।

- संजय सिंह, सांसद, आम आदमी

सोशल मीडिया पर दिखी नाराजगी

सोशल मीडिया पर ट्रेंडिंग हैशटैग, री-ट्वीट और लाइव वीडियो के जरिए महिलाओं ने विधेयक के गिरने पर नाराजगी जताई है। फेसबुक, एक्स (ट्विटर) और इंस्टाग्राम पर कई यूजर्स ने लिखा है कि संसद में लंबी बहस के बाद भी महिलाओं के अधिकार को आगे ढकेल दिया गया, जो समाज की उम्मीदों के साथ धोखा है।


 

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