पश्चिम बंगाल में भाजपा की जीत के बाद ABVP और राष्ट्रीय विचारधारा से जुड़े संगठनों का कॉलेजों व विश्वविद्यालयों में तेजी से विस्तार हो रहा है। छात्र राजनीति में वैचारिक बदलाव की चर्चा तेज हो गई है।
कोलकाता। West Bengal की राजनीति में आए बड़े बदलाव का असर अब राज्य के कॉलेजों और विश्वविद्यालयों में भी दिखाई देने लगा है। भाजपा की चुनावी जीत के बाद ABVP से जुड़े छात्र और शिक्षक संगठनों ने कैंपस में अपनी सक्रियता तेज कर दी है। राज्य में लंबे समय तक वामपंथ और All India Trinamool Congress समर्थित छात्र संगठनों के प्रभाव वाले शैक्षणिक परिसरों में अब वैचारिक बदलाव की चर्चा बढ़ रही है। उत्तर बंगाल के कॉलेजों से लेकर कोलकाता के विश्वविद्यालय परिसरों तक छात्र राजनीति का माहौल बदलता नजर आ रहा है।
ABVP का तेजी से विस्तार
Akhil Bharatiya Vidyarthi Parishad (ABVP) का दावा है कि चुनाव से पहले उसकी सक्रिय मौजूदगी करीब 96 कॉलेजों तक सीमित थी, लेकिन अब यह संख्या 400 से अधिक हो चुकी है। संगठन के नेताओं के अनुसार बड़ी संख्या में छात्र सदस्यता लेने के लिए संपर्क कर रहे हैं। कई कॉलेजों और विश्वविद्यालयों में नए यूनिट गठित करने की तैयारी भी शुरू कर दी गई है।
डिजिटल नेटवर्क के जरिए पकड़ मजबूत
ABVP फिलहाल सीधे कैंपस कमेटियां घोषित करने के बजाय व्हाट्सएप ग्रुप और डिजिटल नेटवर्क के जरिए छात्रों को जोड़ने पर फोकस कर रही है। संगठन पहले इच्छुक छात्रों की वैचारिक समझ और सक्रियता का आकलन कर रहा है। सूत्रों के मुताबिक, हाल के दिनों में Trinamool Chhatra Parishad (TMCP) और Students' Federation of India (SFI) से जुड़े कुछ छात्र भी ABVP के संपर्क में आए हैं।
शिक्षकों और कर्मचारियों में भी बढ़ी सक्रियता
सिर्फ छात्र संगठन ही नहीं, बल्कि शिक्षकों और गैर-शिक्षण कर्मचारियों के बीच भी कई संगठनों की सक्रियता बढ़ी है। Bharatiya Shikshan Mandal और Akhil Bharatiya Rashtriya Shaikshik Mahasangh (ABRSM) का दावा है कि उनकी सदस्यता में रिकॉर्ड वृद्धि हो रही है। संगठनों के पदाधिकारियों के अनुसार राज्य के कई जिलों में शिक्षक और कर्मचारी बड़ी संख्या में उनसे जुड़ने की इच्छा जता रहे हैं।
कैंपस राजनीति में वैचारिक बदलाव?
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह सिर्फ संगठनात्मक विस्तार नहीं, बल्कि बंगाल की छात्र राजनीति में बड़े वैचारिक परिवर्तन का संकेत हो सकता है। दशकों तक वामपंथी विचारधारा के प्रभाव वाले कैंपस में अब राष्ट्रवाद और हिंदुत्व आधारित राजनीति की चर्चा बढ़ रही है। BJP से जुड़े रणनीतिकार लंबे समय से मानते रहे हैं कि बंगाल में स्थायी राजनीतिक प्रभाव के लिए शिक्षा संस्थानों में मजबूत पकड़ बनाना जरूरी है।
विपक्ष ने कहा- यह अस्थायी प्रभाव
हालांकि विपक्षी दलों का कहना है कि यह बदलाव सत्ता परिवर्तन का तात्कालिक असर है और वर्षों से बने वैचारिक प्रभाव को इतनी जल्दी खत्म नहीं किया जा सकता। इसके बावजूद राजनीतिक जानकार मानते हैं कि पश्चिम बंगाल के कैंपस में पहले की तुलना में राजनीतिक माहौल तेजी से बदल रहा है और आने वाले समय में इसका असर राज्य की व्यापक राजनीति पर भी दिखाई दे सकता है।