UIDAI ने आधार कार्ड को जन्मतिथि का प्रमाण नहीं मानने का फैसला लिया। जानिए नया नियम और आधार के नए उपयोग के बारे में।
आधार कार्ड को लेकर भारतीय विशिष्ट पहचान प्राधिकरण (UIDAI) ने बड़ा अपडेट जारी किया है। अब आधार कार्ड को जन्मतिथि का प्रमाण नहीं माना जाएगा। भले ही उसमें आपकी जन्मतिथि दर्ज हो। यह निर्णय भारतीय नागरिकों के लिए महत्वपूर्ण बदलाव का संकेत है। UIDAI ने इस आदेश को एक नए दिशा-निर्देश के तहत लागू किया है, जिसमें आधार का उद्देश्य पहचान की पुष्टि करना है, न कि जन्मतिथि प्रमाणित करना।
यूआईडीएआई का कहना है कि आधार कार्ड केवल व्यक्ति की पहचान की पुष्टि करने के लिए उपयोगी है, न कि जन्मतिथि या उम्र की पुष्टि के लिए। यह निर्णय इस बात को लेकर आया है कि आधार कार्ड का उपयोग प्रमाणीकरण के लिए होता है, न कि किसी अन्य व्यक्तिगत जानकारी के सत्यापन के लिए।
आधार अब उम्र प्रमाण नहीं
UIDAI ने स्पष्ट किया कि आधार कार्ड पर दी गई जन्मतिथि सिर्फ यूजर्स के द्वारा दी गई जानकारी पर आधारित होती है। इसका उद्देश्य केवल व्यक्ति की पहचान को प्रमाणित करना है, न कि जन्मतिथि को सत्यापित करना। UIDAI ने यह आदेश जारी किया कि आधार कार्ड को जन्मतिथि का प्रमाण नहीं माना जाएगा, भले ही वह जानकारी उसमें मौजूद हो।
यह बदलाव उन लोगों के लिए महत्वपूर्ण है जो आधार कार्ड का उपयोग उम्र और जन्मतिथि के प्रमाण के रूप में करते आए थे। अब सरकारी एजेंसियों और अन्य संस्थाओं को आधार का इस्तेमाल इस तरह से नहीं किया जा सकेगा।
पहचान की पुष्टि ही मुख्य उद्देश्य
यूआईडीएआई ने यह भी बताया कि आधार का मुख्य उद्देश्य किसी व्यक्ति की पहचान की पुष्टि करना है। प्रमाणीकरण प्रक्रिया में बायोमेट्रिक और अन्य रजिस्टर्ड डिटेल्स की मिलान की जाती है, जिससे व्यक्ति की पहचान स्थापित होती है। लेकिन इसमें जन्मतिथि या अन्य व्यक्तिगत जानकारियों का सत्यापन नहीं होता है।
UIDAI ने कहा कि सरकारी योजनाओं और कल्याणकारी योजनाओं में आधार का उपयोग तभी होगा जब संबंधित मंत्रालय या राज्य सरकारें इसे स्वीकार करें। यह निर्णय सरकारी एजेंसियों और अन्य निजी संस्थाओं के विवेक पर आधारित होगा।
गूगल का नया फीचर
गूगल ने भारतीय यूजर्स के लिए एक नया फीचर लॉन्च किया है, जिससे वे अपनी आधार वेरिफाईड क्रेडेंशियल्स को गूगल वॉलेट में सुरक्षित रूप से स्टोर कर सकते हैं। यह नया फीचर UIDAI के साथ साझेदारी में आया है और यूजर्स को उनकी पहचान और उम्र सत्यापन के लिए एक सुरक्षित डिजिटल विकल्प प्रदान करेगा।
गूगल ने इसे ‘सेलेक्टिव डिस्क्लोजर’ तकनीक के साथ लॉन्च किया है, जिसका मतलब है कि यूजर्स केवल वही जानकारी साझा करेंगे जो जरूरी हो, और उनकी गोपनीयता पूरी तरह सुरक्षित रहेगी। इस सुविधा का उपयोग सिनेमाघरों, ऑनलाइन विवाह सेवाओं और अंतरराष्ट्रीय वीजा आवेदन में किया जाएगा।
सरकारी उद्देश्यों के लिए कैसे बदलेगा उपयोग
UIDAI ने इस बदलाव को लेकर यह भी स्पष्ट किया है कि अब आधार को केवल पहचान और पते के प्रमाण के रूप में ही उपयोग किया जा सकेगा। आधार के विभिन्न रूप जैसे कि भौतिक आधार कार्ड, ई-आधार, मास्क्ड आधार, ऑफलाइन XML और QR कोड को इस नई शर्त के तहत पहचान और पते के प्रमाण के तौर पर इस्तेमाल किया जा सकता है।
यह बदलाव सरकारी योजनाओं और सब्सिडी के लिए आधार का उपयोग करने के तरीके को प्रभावित करेगा। अब संबंधित विभागों को यह तय करना होगा कि वे आधार कार्ड का उपयोग किस संदर्भ में कर सकते हैं।
आधार कार्ड की भूमिका पर उठे नए सवाल
इस बदलाव के साथ आधार कार्ड की भूमिका पर नए सवाल उठने लगे हैं। पहले जहां लोग आधार का उपयोग उम्र और जन्मतिथि के प्रमाण के रूप में करते थे, अब उन्हें इसके लिए अन्य दस्तावेज़ों का सहारा लेना होगा। यह बदलाव उन लोगों के लिए चुनौतीपूर्ण हो सकता है जो आधार का उपयोग जन्मतिथि प्रमाण के रूप में करते रहे हैं। अब देखना यह होगा कि इस नए आदेश का आम लोगों पर क्या प्रभाव पड़ता है और सरकार इसे कैसे लागू करेगी।