नक्सल संगठन को बड़ा झटका, टॉप लीडर देवजी और मल्ला राजिरेड्डी ने तेलंगाना में SIB के सामने हथियार डाल दिए
नक्सल संगठन की रीढ़ माने जाने वाले शीर्ष नेतृत्व के आत्मसमर्पण की खबर ने पूरे रेड कॉरिडोर में हलचल मचा दी है। जानकारी के मुताबिक नक्सल संगठन के दो बड़े चेहरे थिप्परी तिरुपति उर्फ देवजी और मल्ला राजिरेड्डी ने तेलंगाना में SIB के सामने हथियार डाल दिए हैं। यह घटनाक्रम नक्सल संगठन के लिए अब तक का सबसे बड़ा झटका माना जा रहा है.
SIB के सामने किया सरेंडर
सूत्रों के अनुसार, तेलंगाना में स्पेशल इंटेलिजेंस ब्यूरो (SIB) के समक्ष दोनों नेताओं ने सरेंडर किया। देवजी नक्सल संगठन की सेंट्रल कमेटी के सचिव और मौजूदा महासचिव बताए जा रहे हैं, जबकि मल्ला राजिरेड्डी लंबे समय तक माओवादी पोलित ब्यूरो का अहम चेहरा रहे हैं। हालांकि, इस घटनाक्रम की औपचारिक पुष्टि फिलहाल संबंधित एजेंसियों की ओर से नहीं की गई है.
बसवा राजू एनकाउंटर के बाद बना था महासचिव
बताया जा रहा है कि कुख्यात नक्सली बसवा राजू के एनकाउंटर के बाद संगठन ने देवजी को महासचिव बनाया था। मौजूदा समय में देवजी नक्सल संगठन का सबसे बड़ा रणनीतिक नेता माना जा रहा था। सिर्फ छत्तीसगढ़ में ही उस पर करीब डेढ़ करोड़ रुपये का इनाम घोषित है। वहीं, उसके साथ बताए जा रहे CCM संग्राम पर भी एक करोड़ रुपये का इनाम है.
बस्तर IG बोले: आधिकारिक पुष्टि संबंधित राज्य करेगा
इस पूरे मामले पर सुंदरराज पी., बस्तर आईजी ने सतर्क प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने कहा कि सीमावर्ती राज्यों में कुछ वरिष्ठ नक्सली कैडरों के आत्मसमर्पण की खबरें सामने आ रही हैं, लेकिन प्रोटोकॉल के अनुसार किसी भी कार्रवाई या घटनाक्रम की आधिकारिक पुष्टि वही राज्य या एजेंसी कर सकती है, जहां यह घटना हुई है.उन्होंने यह भी कहा कि मौजूदा हालात में नक्सल संगठन अपने अंत की ओर बढ़ रहा है और कैडरों के पास हिंसा छोड़कर समाज की मुख्यधारा में लौटने के अलावा कोई व्यावहारिक विकल्प नहीं बचा है. आईजी सुंदरराज ने नक्सली नेतृत्व और कैडरों से अपील करते हुए कहा कि वे इस सच्चाई को स्वीकार करें और शांति व गरिमा का रास्ता चुनें। जो लोग इस संदेश को नहीं समझेंगे, उन्हें इसके अनिवार्य परिणाम भुगतने होंगे. यह बयान सुरक्षा बलों के बढ़ते दबाव की साफ तस्वीर पेश करता है.
बस्तर में सिर्फ 200 नक्सली बचे
खुफिया जानकारी के मुताबिक बस्तर संभाग के अलग-अलग इलाकों में अब करीब 200 सशस्त्र नक्सली ही बचे हैं, जो छोटे-छोटे टुकड़ों में जंगलों में छिपे हुए हैं। महाराष्ट्र-मध्यप्रदेश-छत्तीसगढ़ (MMC) जोन लगभग खत्म हो चुका है। उत्तर बस्तर और माड़ डिवीजन से भी नक्सलियों का लगभग सफाया माना जा रहा है.