पश्चिम बंगाल चुनाव में हार के बाद TMC में अंदरूनी कलह बढ़ गई है। कई नेताओं ने अभिषेक बनर्जी पर सवाल उठाए, जबकि ममता की बैठक से कई विधायक गायब रहे।
पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में करारी हार के बाद तृणमूल कांग्रेस (TMC) के भीतर अब खुलकर असंतोष दिखाई देने लगा है। पार्टी के कई सीनियर नेताओं ने हार के लिए सीधे तौर पर राष्ट्रीय महासचिव अभिषेक बनर्जी को जिम्मेदार ठहराना शुरू कर दिया है। बीजेपी की बड़ी जीत के बाद पार्टी में टूट और नेताओं के पाला बदलने की चर्चाएं भी तेज हो गई हैं।
चुनाव परिणामों में टीएमसी 100 सीटों का आंकड़ा भी पार नहीं कर पाई, जबकि बीजेपी ने पूर्ण बहुमत हासिल कर सरकार बनाने का दावा मजबूत किया। हार के बाद बुलाई गई पार्टी बैठक में कई विधायकों की गैरमौजूदगी ने अंदरूनी संकट की अटकलों को और बढ़ा दिया है।
अभिषेक बनर्जी पर फूटा नेताओं का गुस्सा
मालदा के वरिष्ठ तृणमूल नेता और पूर्व मंत्री कृष्णेंदु नारायण चौधरी ने चुनावी हार के लिए सीधे तौर पर अभिषेक बनर्जी को जिम्मेदार बताया। उन्होंने कहा कि पार्टी अब राजनीतिक संगठन कम और 'कॉरपोरेट कंपनी' ज्यादा बन गई है। उन्होंने आरोप लगाया कि चुनावी रणनीति बनाने वाली कंपनी I-PAC का प्रभाव इतना बढ़ गया था कि जमीनी नेताओं की आवाज शीर्ष नेतृत्व तक पहुंच ही नहीं पा रही थी। उनका कहना था कि पुराने और अनुभवी नेताओं की लगातार अनदेखी की गई।
ममता बनर्जी धृतराष्ट्र बन गई थीं
पूर्व मंत्री चौधरी ने मुख्यमंत्री ममता बनर्जी पर भी अप्रत्यक्ष हमला बोला। उन्होंने दावा किया कि उन्होंने कई बार पार्टी और सरकार की जमीनी समस्याओं को मुख्यमंत्री तक पहुंचाने की कोशिश की, यहां तक कि व्हाट्सऐप संदेश भी भेजे गए, लेकिन कोई असर नहीं हुआ।
उन्होंने महाभारत का उदाहरण देते हुए कहा कि ममता बनर्जी “धृतराष्ट्र” की भूमिका में नजर आईं, जिन्होंने सब कुछ देखते हुए भी अनदेखा किया। इस बयान के बाद बंगाल की राजनीति में हलचल और तेज हो गई है।
बीजेपी में जा सकते हैं कई नेता
पार्टी के अंदर बढ़ते असंतोष के बीच अब कई नेताओं के बीजेपी में शामिल होने की अटकलें भी लगाई जा रही हैं। TMC के कुछ नेताओं को लग रहा है कि राज्य में बीजेपी सरकार बनने के बाद पार्टी की वापसी आसान नहीं होगी। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि आने वाले दिनों में बंगाल की राजनीति में बड़े राजनीतिक बदलाव देखने को मिल सकते हैं। खासतौर पर वे नेता जो लंबे समय से संगठन में उपेक्षा महसूस कर रहे थे, वे नया राजनीतिक विकल्प तलाश सकते हैं।
ममता की बैठक से गायब रहे विधायक
चुनाव नतीजों के बाद पार्टी नेतृत्व ने समीक्षा बैठक बुलाई थी। जानकारी के मुताबिक इस बैठक में 9 विधायक शामिल नहीं हुए। इसके बाद पार्टी में टूट की चर्चाएं और तेज हो गईं। हालांकि पार्टी की ओर से सफाई देते हुए कहा गया कि अनुपस्थित विधायकों ने पहले ही सूचना दे दी थी। पार्टी के मुताबिक कई विधायक अपने-अपने क्षेत्रों में चुनाव के बाद की हिंसा और तनाव को नियंत्रित करने में जुटे थे, जबकि कुछ को स्थानीय स्तर पर रुकने के निर्देश दिए गए थे।
बंगाल में बीजेपी की बड़ी जीत ने बढ़ाई चिंता
इस चुनाव में बीजेपी ने 207 सीटें जीतकर बंगाल की सत्ता में ऐतिहासिक एंट्री की है, जबकि TMC करीब 80 सीटों पर सिमट गई। लंबे समय बाद सत्ता परिवर्तन होने से राज्य की राजनीति पूरी तरह बदलती नजर आ रही है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि अगर TMC जल्द संगठनात्मक संकट और अंदरूनी असंतोष को नहीं संभाल पाई, तो आने वाले समय में पार्टी को और बड़े झटके लग सकते हैं।