Breaking News
  • दुनिया के सबसे शक्तिशाली पासपोर्टों की रैंकिंग में भारत का पासपोर्ट 75वें स्थान पर पहुंचा
  • बांग्लादेश चुनाव में हिंसा- एक की मौत, दो वोटिंग सेंटर के बाहर बम धमाके
  • चांदी आज 5,835 गिरकर 2.61 लाख किलो हुई, सोना 1,175 गिरकर1.56 लाख पर आया
  • हरिद्वार-ऋषिकेश के मंदिरों में फटी जींस-स्कर्ट में नहीं मिलेगी एंट्री
  • बांग्लादेश में चुनाव की पूर्व संध्या पर एक और हिंदू की हत्या
  • वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण राज्यसभा में बजट पर चर्चा का जवाब देंगी
  • बांग्लादेश में वोटिंग जारी, सुबह-सुबह मतदान केंद्रों पर वोटर्स की लंबी कतार
  • नई श्रम संहिता के खिलाफ देशभर में हड़ताल पर ट्रेड यूनियन, आज भारत बंद

होम > देश

मध्य प्रदेश के इन दो गांवों में नहीं मनाई जाती होली, रहस्यमय घटना है इसकी वजह

मध्य प्रदेश के इन दो गांवों में नहीं मनाई जाती होली, रहस्यमय घटना है इसकी वजह

मध्य प्रदेश के कुछ गांव ऐसे हैं जहां गुरुवार रात होली नहीं जलाई गई। आइए जानते हैं कौन से वो गांव हैं और होली न मनाने का कारण क्या है?

मध्य प्रदेश के इन दो गांवों में नहीं मनाई जाती होली रहस्यमय घटना है इसकी वजह

देशभर में होली का उत्सव चरम पर है जगह-जगह लोग होलिका दहन और होली (फगुआ) को बड़े हर्ष उल्लास के साथ मना रहे हैं। बीती रात होलिका दहन का पर्व मनाया गया और अब आज 14 मार्च को सभी रंग गुलाल के साथ होली खेल रहे हैं। मध्य प्रदेश के कुछ गांव ऐसे हैं जहां गुरुवार रात होली नहीं जलाई गई। आइए जानते हैं कौन से वो गांव हैं और होली न मनाने का कारण क्या है?

सागर जिले के इस गांव में नहीं जली होली

सागर जिले के देवरिकला के हथखोय गांव में होली जलाने की परंपरा नहीं है। दरअसल, आदिवासी जनजातीय बहुल इस गांव में कुछ साल पहले होली जलाने का प्रयास किया था लेकिन जैसे ही इसकी तैयारी की गई पूरी गांव में आग लग गई।

कुलदेवी झारखंडन माता ने दिया था दर्शन

आग लगने के बाद ग्रामीण कुलदेवी झारखंडन माता के मंदिर पहुंचे और पूजा पाठ की तब जाकर आग बुझी। कहते हैं कि रात में गांव के लोगों को मां ने दर्शन दिया और कहा कि जब इस गांव में मैं स्वयं विराजमान हूं तो होली जलाने की क्या आवश्यकता है। उसके बाद होली जलाने की परंपरा खत्म हो गई। 

नीमच जिले इस गांव में नहीं मनाई जाती होली

नीमच जिले के सिंगोली तहसील के गांव धनगाव में भी होली नहीं जलाई गईं। मान्यता है कि सालों पहले यहां होली जलाने के लिए एक डंडा खड़ा किया गया था। तब बाहर से भाई बहन आए थे जिसके कारण दो पक्षों में विवाद हो गया था। और विवाद में रंगों के त्यौहार के दिन खून की नदियां बह गई। इसी लड़ाई में शुभ मुहूर्त भी निकल गया। 

ये हुआ था चमत्कार

कहते हैं जो सूखा डंडा खड़ा किया गया था उसमें अचानक से हरी पत्तिया भी निकल आई। इसके बाद ग्रामीणों ने होली को नहीं जलाने का निर्णय लिया। तब से लेकर आज तक इस गांव में होली नहीं जलाई जाती बल्कि उसी चमत्कारी पेड़ की पूजा की जाती है।