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AIADMK Rebels Face Action

विजय को समर्थन देते ही AIADMK में बड़ा एक्शन, 25 बागी विधायकों पर गिरी गाज

तमिलनाडु फ्लोर टेस्ट में विजय सरकार को समर्थन देना AIADMK के बागी विधायकों पर भारी पड़ गया। पार्टी ने 25 विधायकों समेत कई बड़े नेताओं को पदों से हटा दिया।


विजय को समर्थन देते ही aiadmk में बड़ा एक्शन 25 बागी विधायकों पर गिरी गाज

AIADMK Rebels Face Action |

चेन्नई। तमिलनाडु की राजनीति में फ्लोर टेस्ट खत्म होते ही सियासी भूचाल तेज हो गया है। मुख्यमंत्री विजय की सरकार को समर्थन देने वाले AIADMK के बागी विधायकों पर पार्टी ने बड़ा एक्शन लिया है। AIADMK प्रमुख एडप्पादी के. पलानीस्वामी ने 25 बागी विधायकों समेत कई बड़े नेताओं को पार्टी पदों से हटा दिया। इनमें सीवी षणमुगम, एसपी वेलुमणि और एमआर विजयभास्कर जैसे बड़े चेहरे शामिल हैं।

दरअसल विधानसभा में विश्वास प्रस्ताव के दौरान इन विधायकों ने पार्टी लाइन के खिलाफ जाकर विजय की TVK सरकार के पक्ष में वोट दिया था। इसके बाद AIADMK के भीतर खुली बगावत अब साफ दिखाई देने लगी है।

फ्लोर टेस्ट के बाद AIADMK में खुलकर दिखी फूट

तमिलनाडु विधानसभा में विजय सरकार को बहुमत साबित करने के लिए 118 विधायकों की जरूरत थी, लेकिन सरकार को 144 वोट मिले। इसमें AIADMK के 25 बागी विधायकों का समर्थन निर्णायक साबित हुआ। क्रॉस वोटिंग के बाद पार्टी के भीतर दो खेमे साफ नजर आने लगे हैं। एक तरफ EPS गुट है, जबकि दूसरी ओर सीवी षणमुगम और एसपी वेलुमणि के साथ खड़े विधायक दिखाई दिए। AIADMK नेतृत्व ने इसे अनुशासनहीनता मानते हुए तुरंत कार्रवाई शुरू कर दी। कई जिला सचिव बदले गए और बागी नेताओं को संगठनात्मक जिम्मेदारियों से हटा दिया गया।

किन नेताओं पर गिरी सबसे बड़ी गाज

पार्टी कार्रवाई की सूची में कई बड़े नाम शामिल हैं। सीवी षणमुगम, एसपी वेलुमणि और एमआर विजयभास्कर के अलावा आर. कामराज, थंगामणि, के.पी. अनबझगन और केसी वीरमणि जैसे नेता भी पदों से हटाए गए हैं। कुल 29 नेताओं पर कार्रवाई हुई है, जिनमें 13 मौजूदा विधायक शामिल बताए जा रहे हैं। पार्टी ने साफ संकेत दिया है कि भविष्य में भी बगावत बर्दाश्त नहीं की जाएगी। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि यह कदम सिर्फ अनुशासन बनाए रखने के लिए नहीं, बल्कि पार्टी पर EPS की पकड़ मजबूत दिखाने की कोशिश भी है।

बागी विधायकों ने क्यों दिया विजय का साथ

बागी नेता सीवी षणमुगम ने दावा किया कि TVK और AIADMK की राजनीतिक सोच काफी हद तक समान है। उन्होंने कहा कि दोनों दल DMK को सत्ता से बाहर रखना चाहते हैं। उन्होंने मंत्री पद या राजनीतिक सौदेबाजी के आरोपों को भी खारिज किया। षणमुगम का कहना है कि समर्थन किसी निजी फायदे के लिए नहीं, बल्कि राजनीतिक विचारधारा के आधार पर दिया गया। हालांकि विपक्ष इस दावे को स्वीकार करने को तैयार नहीं है। DMK लगातार आरोप लगा रही है कि सरकार संख्या जुटाने के लिए पर्दे के पीछे राजनीतिक मैनेजमेंट कर रही है।

DMK ने लगाए खरीद-फरोख्त के आरोप

फ्लोर टेस्ट के दौरान DMK ने सदन से वॉकआउट किया था। विपक्ष के नेता उदयनिधि स्टालिन ने विजय सरकार पर तीखा हमला बोलते हुए कहा कि यह सरकार “उधार के समर्थन” पर टिकी हुई है। उन्होंने आरोप लगाया कि AIADMK को तोड़कर सरकार बचाई गई है। स्टालिन ने सवाल उठाया कि क्या यही नई राजनीति और साफ-सुथरे प्रशासन का दावा था। वहीं, भाजपा ने भी कहा कि TVK को जनादेश तो मिला, लेकिन स्पष्ट बहुमत नहीं मिला। ऐसे में आने वाले दिनों में तमिलनाडु की राजनीति और अस्थिर हो सकती है।

विजय सरकार को मिला राहत का संदेश

राजनीतिक विवादों के बीच फ्लोर टेस्ट में मिली जीत ने फिलहाल विजय सरकार को बड़ी राहत दी है। TVK ने पहली बार विधानसभा में अपनी ताकत दिखाई है। हालांकि AIADMK में बढ़ती अंदरूनी लड़ाई अब तमिलनाडु की राजनीति का अगला बड़ा मुद्दा बनती दिख रही है। बागी विधायकों पर कार्रवाई के बाद यह भी माना जा रहा है कि आने वाले दिनों में पार्टी के भीतर और बड़े बदलाव देखने को मिल सकते हैं।

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