तमिलनाडु के वीओ चिदंबरनार बंदरगाह में 15,000 करोड़ का आउटर हार्बर प्रोजेक्ट। श्रीलंका और सिंगापुर को टक्कर देने की तैयारी, बड़े जहाजों के लिए नई बर्थ विकसित होंगी।
नई दिल्ली। दक्षिण भारत के समुद्री नक्शे पर एक बड़ा बदलाव आने वाला है। तमिलनाडु का तूतीकोरिन अब सिर्फ एक पारंपरिक बंदरगाह नहीं रहेगा यहां समुद्र के भीतर एक विशाल ‘आउटर हार्बर’ तैयार किया जाएगा, जिस पर करीब 15,000 करोड़ रुपये खर्च होंगे। लक्ष्य साफ है भारत को ट्रांसशिपमेंट में आत्मनिर्भर बनाना और श्रीलंका-सिंगापुर जैसे वैश्विक हब को सीधी चुनौती देना।
कौन बना रहा है ये मेगा प्रोजेक्ट?
तमिलनाडु के तूतीकोरिन स्थित V.O. Chidambaranar Port Authority (वीओसी बंदरगाह) इस परियोजना पर काम करेगा। बंदरगाह पहले से देश के बड़े और पुराने प्रमुख पोर्ट्स में गिना जाता है। इसकी मौजूदा सालाना माल ढुलाई क्षमता लगभग 8.2 करोड़ टन है। लेकिन आउटर हार्बर बनने के बाद तस्वीर बदल जाएगी। चेयरपर्सन सुशांत कुमार पुरोहित के मुताबिक यह निवेश मौजूदा 1,500 करोड़ रुपये के अपग्रेडेशन फंड से अलग है, जिसे इंफ्रास्ट्रक्चर और नई तकनीक के लिए रखा गया है।
‘आउटर हार्बर’ आखिर है क्या?
आउटर हार्बर का मतलब है मौजूदा पोर्ट के बाहर समुद्री क्षेत्र में अतिरिक्त बर्थ (जहाज खड़े करने की जगह) बनाना। इस विस्तार के तहत 18 मीटर गहराई वाली दो नई बर्थ विकसित की जाएंगी। यहां 2.5 लाख डेडवेट टनेज (DWT) तक के बड़े कार्गो जहाज भी ठहर सकेंगे। सरल भाषा में कहें तो जो बड़े जहाज अभी भारत के बजाय कोलंबो या सिंगापुर में रुकते हैं, वे सीधे तमिलनाडु में लंगर डाल सकेंगे।
श्रीलंका, सिंगापुर और इंडोनेशिया को चुनौती
भारत का बड़ा हिस्सा अभी ट्रांसशिपमेंट के लिए विदेशी बंदरगाहों पर निर्भर है, खासकर श्रीलंका के कोलंबो और सिंगापुर पर। इस मेगा प्रोजेक्ट के जरिए भारत इस निर्भरता को कम करना चाहता है। अगर योजना समय पर पूरी हुई तो दक्षिण भारत का बड़ा कार्गो यहीं से ट्रांसफर होगा। इससे समय और लागत दोनों की बचत होगी , और लॉजिस्टिक्स सेक्टर को नई रफ्तार मिलेगी।
कब तक बढ़ेगी क्षमता?
परियोजना दो चरणों में लागू होगी 2027 और 2030 तक। अनुमान है कि इससे सालाना क्षमता में करीब 40 लाख टन की बढ़ोतरी होगी। विस्तृत परियोजना रिपोर्ट सरकार को सौंप दी गई है। वित्तपोषण के लिए वीओसी पोर्ट ने Indian Railway Finance Corporation (IRFC) और Sagarmala Finance Corporation Limited के साथ त्रिपक्षीय समझौता किया है। इससे जरूरी पूंजी जुटाने में आसानी होगी।
अगर सब कुछ योजना के मुताबिक चला, तो तूतीकोरिन न सिर्फ तमिलनाडु बल्कि पूरे दक्षिण भारत का प्रमुख ट्रांसशिपमेंट हब बन सकता है। स्थानीय स्तर पर रोजगार, लॉजिस्टिक्स पार्क, वेयरहाउसिंग और सप्लाई चेन सेक्टर में नए अवसर पैदा होंगे। समुद्र की लहरों के बीच बनने वाला यह आउटर हार्बर सिर्फ एक ढांचा नहीं होगा यह भारत की समुद्री रणनीति का बड़ा दांव माना जा रहा है।