तमिलनाडु की राजनीति अब बड़ा मोड़ लेती दिख रही है, यहां कांग्रेस ने DMK से गठबंधन तोड़ और TVK को समर्थन दे दिया। जानिए तमिल राजनीति में क्या बदल रहा है और आगे क्या हो सकता है।
तमिलनाडु की राजनीति अचानक ऐसे मोड़ पर आ गई है, जिसकी शायद कुछ महीने पहले तक किसी ने कल्पना भी नहीं की थी। लंबे समय से साथ चल रहे कांग्रेस और DMK के रास्ते अब अलग हो चुके हैं, और इसी के साथ सत्ता के नए समीकरण तेजी से बनते दिख रहे हैं। दरअसल, विधानसभा चुनाव के बाद बने हालात में कोई भी पार्टी साफ बहुमत नहीं ला सकी। इसी बीच कांग्रेस ने बड़ा फैसला लेते हुए DMK से दूरी बनाई और नई पार्टी TVK को समर्थन दे दिया। यहीं से पूरा खेल बदल गया।
कांग्रेस ने DMK से क्यों तोड़ा साथ?
करीब एक दशक से ज्यादा पुराना गठबंधन यूं ही नहीं टूटा। इसके पीछे चुनावी गणित और सत्ता का समीकरण दोनों काम कर रहे थे। कांग्रेस के पास भले ही सीटें कम हों, लेकिन इस बार उसकी भूमिका किंगमेकर जैसी बन गई। ऐसे में पार्टी ने उस तरफ जाना बेहतर समझा जहां सरकार बनने की संभावना ज्यादा थी। यही वजह है कि उसने TVK को समर्थन दिया हालांकि यह समर्थन पूरी तरह बिना शर्त नहीं बताया जा रहा।
TVK का उभार: क्या बदल रही है राजनीति?
यह चुनाव एक बात साफ कर गया तमिलनाडु अब सिर्फ पारंपरिक पार्टियों तक सीमित नहीं रहा। TVK का तेजी से उभरना सिर्फ एक चुनावी जीत नहीं है, बल्कि यह एक संकेत भी है। नई राजनीति, नया चेहरा और अलग स्टाइल इन सबका असर वोटिंग पर साफ दिखा। अब सवाल यह है कि क्या TVK इस भरोसे को सरकार चलाकर भी कायम रख पाएगी?
DMK की नाराज़गी: क्या बढ़ेगी दूरी?
कांग्रेस के फैसले के बाद DMK की प्रतिक्रिया काफी सख्त रही। अंदरखाने नाराज़गी तो है ही, सार्वजनिक बयान भी यही संकेत दे रहे हैं कि यह सिर्फ एक साधारण राजनीतिक मतभेद नहीं है। यही सवाल अब उठ रहा है क्या यह दूरी सिर्फ राज्य तक सीमित रहेगी या इसका असर राष्ट्रीय राजनीति पर भी पड़ेगा? कहीं डीएमके भी तो बीजेपी से नजदीूकियां बढ़ाने की कोशिश तो नहीं कर रही। DMK, कांग्रेस से दूरी बनाकर NDA को समर्थन दे, ऐसी संभावनाओं से भी इनकार नहीं किया जा सकता।
अब आगे क्या होगा?
अब समझिए सबसे दिलचस्प हिस्सा। राजनीति में कुछ भी स्थायी नहीं होता। आज जो विरोधी है, वो कल साथ भी आ सकता है और इसके उलट भी।
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क्या DMK नए सहयोगी तलाशेगी?
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क्या कांग्रेस का यह दांव लंबे समय तक टिकेगा?
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और सबसे बड़ा सवाल क्या यह बदलाव सिर्फ तमिलनाडु तक सीमित रहेगा?
कुछ जानकार मानते हैं कि आने वाले समय में और भी चौंकाने वाले समीकरण बन सकते हैं। हालांकि अभी कुछ भी साफ-साफ कहना जल्दबाजी होगी। राजनीतिक बदलाव का असर सिर्फ नेताओं तक सीमित नहीं रहता।
सरकार बदलेगी तो नीतियां बदल सकती हैं, प्राथमिकताएं बदल सकती हैं, और इसका सीधा असर जनता पर पड़ता है चाहे वह विकास योजनाएं हों, रोजगार के मौके हों या फिर राज्य की दिशा फिलहाल तमिलनाडु एक नए राजनीतिक दौर में प्रवेश करता दिख रहा है।