मद्रास हाईकोर्ट की मदुरै बेंच ने तिरुप्परंकुंद्रम दीपम विवाद में 5 लोगों को प्रतीकात्मक रूप से दीप जलाने का सुझाव दिया। अगली सुनवाई 4 मार्च को।
चेन्नई। तमिलनाडु के तिरुप्परंकुंद्रम में दीप जलाने को लेकर चल रहा विवाद एक नए मोड़ पर पहुंच गया है। मद्रास हाईकोर्ट की मदुरै बेंच ने सुझाव दिया है कि अदालत द्वारा नामित पांच लोगों को पहाड़ी पर स्थित दीपथून (दीप स्तंभ) तक जाने और 15 मिनट के लिए प्रतीकात्मक प्रार्थना करने की अनुमति दी जा सकती है। हालांकि कोर्ट ने साफ किया कि यह केवल एक सुझाव है, बाध्यकारी आदेश नहीं।
क्या है पूरा मामला?
विवाद तिरुप्परंकुंद्रम स्थित Arulmigu Subramania Swamy Temple के पास पहाड़ी पर दीप जलाने को लेकर है। याचिकाओं में आरोप लगाया गया था कि दीप जलाने संबंधी पहले दिए गए कोर्ट आदेश का जानबूझकर पालन नहीं किया गया। इसी आधार पर अवमानना याचिकाएं दायर की गईं। मामले की सुनवाई करते हुए न्यायमूर्ति Justice GR Swaminathan ने कहा कि जिला कलेक्टर के अतिरिक्त हलफनामे में भले यह कहा गया हो कि धारा 163 बीएनएसएस के तहत लगाया गया निषेधाज्ञा आदेश केवल कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए था, लेकिन जमीन पर कोर्ट का आदेश लागू नहीं हो सका। न्यायाधीश ने टिप्पणी की, The proof of the pudding lies in eating, यानी असली परीक्षा अमल में दिखती है।
कलेक्टर की सफाई और माफी
मदुरै के जिला कलेक्टर KJ Praveenkumar ने हलफनामे में कहा कि उनका मकसद केवल शांति बनाए रखना था। उन्होंने यह भी दोहराया कि निषेधाज्ञा का उद्देश्य मंदिर अधिकारियों को दीप जलाने से रोकना नहीं था। अवमानना याचिका में उन्होंने दूसरी बार बिना शर्त माफी भी मांगी, जिसके बाद कोर्ट ने उन्हें व्यक्तिगत पेशी से छूट दे दी। हालांकि वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों को अगली तारीख पर उपस्थित रहने का निर्देश दिया है।
परंपरा बनाम आदेश
मंदिर प्रशासन का तर्क है कि एक सदी से अधिक समय से कार्तिगई दीपम केवल पहाड़ी पर उचि पिल्लयार मंदिर के पास ही जलाया जाता रहा है। भक्तों की भावनाओं के खिलाफ परंपरा में बदलाव नहीं किया जा सकता। इससे पहले हाईकोर्ट की एक डिवीजन बेंच ने एकल पीठ के उस आदेश को बरकरार रखा था, जिसमें निर्दिष्ट स्तंभ पर दीप जलाने की अनुमति दी गई थी। उन्होंने कोर्ट को बताया राज्य सरकार की ओर से पेश वरिष्ठ वकील ने समय मांगा है। अगली सुनवाई 4 मार्च को होगी।