पत्रकारिता से राजनीति तक का सफर तय करने वाले स्वपन दासगुप्ता को शुभेंदु सरकार में मंत्री बनाया गया है। जानिए उनकी पृष्ठभूमि, राजनीतिक सफर और बीजेपी के भरोसे की वजह।
कोलकाता में नई सरकार के गठन के बाद मंत्रिमंडल विस्तार ने राजनीतिक हलचल बढ़ा दी है। कुल 35 मंत्रियों ने शपथ ली है और इनमें एक नाम सबसे ज्यादा चर्चा में रहा है स्वपन दासगुप्ता। पत्रकारिता से राजनीति में आए स्वपन दासगुप्ता को पहली बार विधायक बनने के तुरंत बाद कैबिनेट में जगह मिलना बीजेपी की रणनीति और उनके प्रति भरोसे को दर्शाता है।
पत्रकारिता से शुरू हुआ था लंबा सफर
स्वपन दासगुप्ता की पहचान लंबे समय तक एक वरिष्ठ पत्रकार के रूप में रही है। उन्होंने देश के कई बड़े अंग्रेजी अखबारों में संपादकीय जिम्मेदारियां निभाईं। टाइम्स ऑफ इंडिया जैसे प्रतिष्ठित अखबार में भी वह संपादक रहे हैं। पत्रकारिता के दौरान उन्होंने राजनीतिक और सामाजिक मुद्दों पर गहरी पकड़ बनाई। उनका जन्म 3 अक्टूबर 1955 को एक बंगाली वैद्य परिवार में हुआ था। शुरुआती जीवन से ही उनका जुड़ाव लेखन और विचारों की दुनिया से रहा।
पद्म भूषण से सम्मानित हुआ पत्रकारिता करियर
पत्रकारिता और सामाजिक योगदान के लिए उन्हें 2015 में पद्म भूषण सम्मान दिया गया। यह सम्मान उन्हें साहित्य और शिक्षा के क्षेत्र में योगदान के लिए मिला। यह सम्मान उनके करियर का महत्वपूर्ण मोड़ माना जाता है, जिसने उन्हें राष्ट्रीय स्तर पर एक अलग पहचान दी। पत्रकारिता में उनकी लंबी भूमिका ने उन्हें नीतियों और राजनीति को समझने का मजबूत आधार दिया।
राज्यसभा से शुरू हुई राजनीतिक पारी
स्वपन दासगुप्ता को 2016 में राष्ट्रपति द्वारा राज्यसभा के लिए नामित किया गया। उस समय प्रणब मुखर्जी राष्ट्रपति थे। राज्यसभा में रहते हुए उन्होंने सक्रिय रूप से राजनीतिक चर्चाओं में भाग लिया और धीरे-धीरे भारतीय जनता पार्टी से जुड़ाव बढ़ाया। बाद में उन्होंने बीजेपी की सदस्यता ली और सक्रिय राजनीति में कदम रखा। इसी दौरान उन्हें अपने राज्यसभा पद से इस्तीफा भी देना पड़ा।
चुनावी राजनीति में उतार-चढ़ाव का दौर
विधानसभा चुनाव 2021 में उन्हें तारकेश्वर सीट से उम्मीदवार बनाया गया था। लेकिन उस चुनाव में उन्हें हार का सामना करना पड़ा। हालांकि बाद में उन्हें फिर से राज्यसभा में नामित किया गया, जिससे उनकी राजनीतिक भूमिका लगातार बनी रही। इस बार उन्होंने रासबिहारी विधानसभा सीट से चुनाव लड़ा और टीएमसी उम्मीदवार को 20865 वोटों से हराकर जीत दर्ज की।
विधायक बनते ही मिली कैबिनेट में जगह
पहली बार विधानसभा पहुंचते ही स्वपन दासगुप्ता को मंत्री पद मिलना बीजेपी की रणनीतिक सोच को दिखाता है। पार्टी नेतृत्व का मानना है कि पश्चिम बंगाल की राजनीतिक समझ और लंबे अनुभव के कारण वह सरकार में अहम भूमिका निभा सकते हैं। बीजेपी आलाकमान का उन पर भरोसा लगातार मजबूत रहा है और इसी वजह से उन्हें दोबारा चुनावी मैदान और अब कैबिनेट में बड़ी जिम्मेदारी दी गई है। उनकी नियुक्ति को राज्य की राजनीति में अनुभव और विचारधारा के संतुलन के रूप में देखा जा रहा है।