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सुप्रीम कोर्ट में आवारा कुत्तों के मामले में शुक्रवार को लगातार तीसरे दिन सुनवाई

सुप्रीम कोर्ट में आवारा कुत्तों के मामले में शुक्रवार को लगातार तीसरे दिन सुनवाई

सुप्रीम कोर्ट में आवारा कुत्तों के मामले की सुनवाई जारी, AIIMS के कुत्ते के उदाहरण पर जज की सख्त टिप्पणी, कानून और सुरक्षा पर बहस

सुप्रीम कोर्ट में आवारा कुत्तों के मामले में शुक्रवार को लगातार तीसरे दिन सुनवाई

नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट में आवारा कुत्तों से जुड़ी याचिकाओं पर शुक्रवार को लगातार तीसरे दिन सुनवाई हुई. इस दौरान याचिकाकर्ताओं में शामिल अभिनेत्री शर्मिला टैगोर की ओर से उठाए गए तर्कों पर अदालत ने कड़ी टिप्पणी की, कोर्ट ने स्पष्ट किया कि सार्वजनिक और विशेष रूप से अस्पताल जैसे संवेदनशील स्थानों पर सुरक्षा सर्वोपरि है ।

AIIMS के कुत्ते का उदाहरण, कोर्ट ने जताई आपत्ति

शर्मिला टैगोर की ओर से पेश वकील ने दलील दी कि सभी आवारा कुत्ते आक्रामक नहीं होते, उन्होंने दिल्ली AIIMS में ‘गोल्डी’ नाम के एक कुत्ते का उदाहरण देते हुए कहा कि वह वर्षों से परिसर में मौजूद है लेकिन उसने किसी को नुकसान नहीं पहुंचाया । इस पर जस्टिस मेहता ने टिप्पणी करते हुए पूछा कि क्या उस कुत्ते को अस्पताल के ऑपरेशन थिएटर में भी ले जाया गया है। अदालत ने कहा कि सड़कों पर रहने वाले कुत्तों में संक्रमण का खतरा रहता है और अस्पताल परिसर में उनकी मौजूदगी से गंभीर स्वास्थ्य जोखिम पैदा हो सकता है. कोर्ट ने कहा कि किसी एक उदाहरण के आधार पर स्थिति को सामान्य नहीं ठहराया जा सकता ।

कानूनी ढांचे पर सवाल, कोर्ट से हस्तक्षेप न करने की मांग

ऑल क्रिएचर्स ग्रेट एंड स्मॉल (ACGS) की ओर से पेश अभिषेक मनु सिंघवी ने कहा कि इस विषय में पहले से कानून मौजूद हैं, उन्होंने तर्क दिया कि जब संसद ने इसमें हस्तक्षेप नहीं किया है  तो अदालत को भी सावधानी बरतनी चाहिए । सिंघवी ने सुझाव दिया कि ऐसे मामलों में केवल एमीकस क्यूरी पर निर्भर रहने के बजाय पशु, स्वास्थ्य और पर्यावरण से जुड़े विशेषज्ञों को भी शामिल किया जाना चाहिए ।

सुनवाई के दौरान उठे अन्य मुद्दे

एनीमल राइट्स से जुड़ी वकील महालक्ष्मी पावनी ने कहा कि कुत्तों को पालने वाली महिलाओं के खिलाफ आपत्तिजनक टिप्पणियां की जा रही हैं जो चिंता का विषय है । वहीं एक अन्य याचिकाकर्ता के वकील ने माइक्रो-चिप तकनीक को लागत के लिहाज से संभव बताया । इस पर कोर्ट ने दोहराया कि बड़े पैमाने पर लागू किए जाने वाले किसी भी उपाय में ज़मीनी हालात और प्रशासनिक क्षमता को ध्यान में रखना जरूरी है सुप्रीम कोर्ट में मामले की आगे सुनवाई जारी रहेगी ।