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SC Rejects TMC Plea On Counting Staff

सुप्रीम कोर्ट ने TMC को नहीं दी राहत, कहा- काउंटिंग स्टाफ तय करना चुनाव आयोग का अधिकार

सुप्रीम कोर्ट ने पश्चिम बंगाल मतगणना केंद्रों पर केंद्रीय कर्मचारियों की तैनाती के खिलाफ TMC की याचिका खारिज कर दी। कोर्ट ने कहा- यह चुनाव आयोग का अधिकार है।


सुप्रीम कोर्ट ने tmc को नहीं दी राहत कहा- काउंटिंग स्टाफ तय करना चुनाव आयोग का अधिकार

नई दिल्लीः पश्चिम बंगाल में मतगणना केंद्रों पर केंद्रीय और PSU कर्मचारियों की तैनाती को लेकर तृणमूल कांग्रेस (TMC) को सुप्रीम कोर्ट से बड़ा झटका लगा है,सुप्रीम कोर्ट ने शनिवार को TMC की अपील खारिज करते हुए साफ कहा कि काउंटिंग स्टाफ की नियुक्ति चुनाव आयोग के अधिकार क्षेत्र में आती है और इस मामले में अलग से कोई आदेश देने की जरूरत नहीं है।

दरअसल, TMC ने आरोप लगाया था कि केंद्र सरकार के कर्मचारियों की नियुक्ति से निष्पक्षता प्रभावित हो सकती है. पार्टी की ओर से वरिष्ठ वकील Kapil Sibal ने कोर्ट में कहा कि चुनाव आयोग से न्याय मिलने की उम्मीद नहीं है। हालांकि अदालत ने चुनाव आयोग के अधिकारों में हस्तक्षेप से इनकार कर दिया।

क्या है पूरा विवाद?

चुनाव आयोग ने 13 अप्रैल को एक सर्कुलर जारी किया था। इसके मुताबिक मतगणना की हर टेबल पर सुपरवाइजर या असिस्टेंट में से कम से कम एक कर्मचारी केंद्र सरकार या PSU का होना जरूरी होगा।

TMC ने इस फैसले पर आपत्ति जताते हुए कहा कि इससे निष्पक्षता पर सवाल उठ सकते हैं। पार्टी का कहना था कि राज्य सरकार के कर्मचारियों को भी समान रूप से शामिल किया जाना चाहिए।  बंगाल में 23 और 29 अप्रैल को दो चरणों में चुनाव हुए हैं, जबकि नतीजे 4 मई को घोषित किए जाएंगे।

सुप्रीम कोर्ट में क्या हुई बहस?

सुनवाई के दौरान कपिल सिब्बल ने कोर्ट में चार प्रमुख मुद्दे उठाए। उन्होंने कहा कि सर्कुलर की जानकारी देरी से दी गई और चुनाव आयोग पहले से गड़बड़ी की आशंका कैसे जता सकता है।उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि जब हर टेबल पर पहले से माइक्रो ऑब्जर्वर मौजूद हैं तो अतिरिक्त केंद्रीय कर्मचारियों की जरूरत क्यों पड़ी।

इस पर सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि नियमों में साफ है कि काउंटिंग सुपरवाइजर और असिस्टेंट केंद्र या राज्य सरकार, दोनों में से किसी भी पूल से नियुक्त किए जा सकते हैं। ऐसे में सिर्फ केंद्रीय कर्मचारियों की नियुक्ति को नियमों के खिलाफ नहीं माना जा सकता।

कोर्ट ने क्यों खारिज की TMC की मांग?

सुनवाई के दौरान जस्टिस बागची ने टिप्पणी करते हुए कहा कि राजनीतिक दल यह तय नहीं कर सकते कि काउंटिंग में कौन शामिल होगा। यह पूरी तरह चुनाव आयोग और रिटर्निंग ऑफिसर के अधिकार क्षेत्र का मामला है।

कोर्ट ने यह भी कहा कि केंद्र और राज्य सरकार के कर्मचारी दोनों सरकारी अधिकारी हैं, इसलिए उन्हें अलग-अलग नजर से नहीं देखा जा सकताआखिर में अदालत ने कहा कि 13 अप्रैल 2026 का चुनाव आयोग का सर्कुलर लागू रहेगा और अलग आदेश की जरूरत नहीं है।

हाईकोर्ट से भी नहीं मिली थी राहत

इससे पहले Calcutta High Court भी TMC की याचिका खारिज कर चुका है। हाईकोर्ट ने कहा था कि काउंटिंग स्टाफ की नियुक्ति चुनाव आयोग के अधिकार क्षेत्र में आती है और इसमें कोई अवैधता नहीं है।

वहीं पश्चिम बंगाल के मुख्य निर्वाचन अधिकारी मनोज कुमार अग्रवाल ने भी साफ कहा कि किसी राजनीतिक दल को यह तय करने का अधिकार नहीं है कि मतगणना प्रक्रिया में किसे शामिल किया जाए।

4 मई पर टिकी सबकी नजर

अब पश्चिम बंगाल चुनाव के नतीजों पर सबकी नजर है। राजनीतिक माहौल पहले से गर्म है और मतगणना प्रक्रिया को लेकर विवाद ने इसे और चर्चा में ला दिया है। ऐसे में 4 मई को आने वाले नतीजे राज्य की राजनीति की दिशा तय करने में अहम साबित हो सकते हैं।

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