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सुप्रीम कोर्ट ने राजनीतिक दलों की चुप्पी पर किया सवाल, कहा- बीएलए आखिर कर क्या रहे है?

सुप्रीम कोर्ट ने राजनीतिक दलों की चुप्पी पर किया सवाल, कहा- बीएलए आखिर कर क्या रहे है?

सुप्रीम कोर्ट ने राजनीतिक दलों की चुप्पी पर किया सवाल कहा- बीएलए आखिर कर क्या रहे है

बिहार SIR: बिहार में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को अहम सुनवाई की। कोर्ट ने राजनीतिक पार्टियों की निष्क्रियता पर कड़ी नाराजगी जताई और पूछा कि “आप कर क्या रहे है?”। अदालत ने कहा कि 12 राजनीतिक दलों के पास करीब 1.60 लाख बूथ लेवल एजेंट (BLA) है, लेकिन उनकी ओर से अब तक सिर्फ दो आपत्तियां दर्ज कराई गई है।

सुप्रीम कोर्ट की सख्त टिप्पणी

जस्टिस सूर्यकांत ने सुनवाई के दौरान कहा, “हमें आश्चर्य है कि इतने बीएलए होने के बावजूद आपत्तियां क्यों नहीं आ रही है? लोगों और राजनीतिक दलों के बीच इतनी दूरी क्यों है?”। अदालत ने राजनीतिक दलों से कहा कि वे अपने कार्यकर्ताओं को सक्रिय करें और मतदाताओं की मदद करें ताकि जिनके नाम मतदाता सूची से हटे है, वे ऑनलाइन आवेदन कर सकें।

चुनाव आयोग का पक्ष

चुनाव आयोग ने सुप्रीम कोर्ट को बताया कि अब तक 22 लाख मतदाता मृत पाए गए हैं और 7 लाख नाम डुप्लीकेट मिले हैं। साथ ही, आयोग ने यह भी कहा कि अब तक 85 हजार नए मतदाता सूची में जोड़े गए है। आयोग ने साफ किया कि ERO बिना जांच के किसी का नाम नहीं काट सकता और नाम हटने पर लोग 25 सितंबर तक अपील कर सकते है।

कोर्ट के निर्देश

  • राजनीतिक दल अपने बीएलए को सक्रिय करें और मतदाताओं की सहायता करें।
  • बीएलए ब्लॉक, पंचायत, गांव और राहत शिविरों तक जाकर लोगों की मदद करें।
  • बिहार के मुख्य चुनाव अधिकारी (CEO) सभी राजनीतिक दलों के अध्यक्ष और महासचिव को नोटिस जारी करें और कोर्ट को स्टेटस रिपोर्ट सौंपें।
  • बीएलए 65 लाख हटाए गए नामों के मामलों में आपत्तियां और दावे ऑनलाइन और फिजिकल फॉर्म दोनों से दाखिल कर सकते हैं।

याचिकाकर्ता की ओर से पेश हुईं वकील वृंदा ग्रोवर और प्रशांत भूषण ने तर्क दिया कि यह समस्या केवल 65 लाख लोगों तक सीमित नहीं है। कई इलाकों में बाढ़ के कारण लोग फॉर्म नहीं भर पा रहे है। इस पर सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि राजनीतिक दलों के बीएलए को आगे आना चाहिए और जमीन पर काम करना चाहिए, तभी असली स्थिति सामने आएगी।

सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया कि हर मतदाता का अधिकार है कि वह वोटर बनने के लिए आवेदन करे और आपत्ति दर्ज कराए। अब जिम्मेदारी राजनीतिक दलों पर है कि वे अपने 1.60 लाख बीएलए को सक्रिय करें और अगले दस दिनों में अधिक से अधिक आपत्तियां और दावे दर्ज कराएं।

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