सिक्किम के नामची में निर्माणाधीन टनल में लैंडस्लाइड होने से 8 मजदूरों की मौत हो गई, 19 अभी भी फंसे हुए हैं। मीथेन गैस से रेस्क्यू में मुश्किलें।
गंगटोक। सिक्किम के नामची जिले में निर्माणाधीन सुरंग पर सोमवार को हुए भीषण लैंडस्लाइड हादसे में अब तक 8 मजदूरों की मौत हो चुकी है, जबकि 19 मजदूर अब भी सुरंग के अंदर फंसे हुए हैं। पहाड़ से भारी मात्रा में मलबा गिरने के कारण सुरंग का प्रवेश द्वार पूरी तरह बंद हो गया, जिससे राहत और बचाव अभियान बेहद चुनौतीपूर्ण हो गया है।जिला प्रशासन के अनुसार, हादसा सोमवार दोपहर करीब 3:40 बजे मामरिंग क्षेत्र स्थित समरदुंग सुरंग में हुआ, जहां तीस्ता स्टेज-6 हाइड्रोइलेक्ट्रिक पावर प्रोजेक्ट के लिए निर्माण कार्य चल रहा था।

मीथेन गैस की आशंका से बढ़ी मुश्किलें
अधिकारियों ने बताया कि सुरंग के भीतर मीथेन गैस रिसाव की आशंका है। इसी वजह से बचाव दल के कई सदस्य अंदर जाने के दौरान चक्कर आने और बेहोश होने की शिकायत के बाद बाहर लौटे। गैस की मौजूदगी और सीमित ऑक्सीजन के कारण रेस्क्यू ऑपरेशन बेहद सावधानी के साथ चलाया जा रहा है।
NDRF, SDRF समेत कई एजेंसियां जुटीं
हादसे की सूचना मिलते ही एनडीआरएफ, एसडीआरएफ, जिला पुलिस और फायर ब्रिगेड की टीमें मौके पर पहुंच गईं। प्रशासन ने पश्चिम बंगाल से गैस-रोधी उपकरणों से लैस एक विशेष रेस्क्यू टीम भी बुलाई है।प्रशासन के मुताबिक, सुरंग में पटेल इंजीनियरिंग के 21 और एनएचपीसी के 6 कर्मचारियों समेत कुल 27 मजदूरों के फंसे होने की आशंका है। हालांकि अधिकारियों ने कहा कि यह संख्या जांच के बाद बदल भी सकती है।
गैस मास्क पहनकर अंदर पहुंचने की कोशिश
रेस्क्यू टीम गैस मास्क और विशेष सुरक्षा उपकरणों की मदद से मजदूरों तक पहुंचने का प्रयास कर रही है। सुरंग के भीतर मलबा, कम जगह, अंधेरा और गैस रिसाव की आशंका के कारण अभियान धीमी गति से चल रहा है। मौके पर एंबुलेंस और मेडिकल टीमों को भी तैनात रखा गया है।
क्या है मीथेन गैस का खतरा?
विशेषज्ञों के अनुसार, मीथेन गैस सीधे तौर पर जहरीली नहीं होती, लेकिन बंद जगहों में यह ऑक्सीजन का स्तर तेजी से कम कर देती है। इससे दम घुटने, बेहोशी और मौत का खतरा बढ़ जाता है। यदि मीथेन गैस के संपर्क में चिंगारी या आग आ जाए तो विस्फोट होने की भी आशंका रहती है।
टनल रेस्क्यू क्यों होता है कठिन?
टनल के भीतर राहत अभियान सामान्य रेस्क्यू ऑपरेशन से कहीं अधिक जटिल होता है। संकरी जगह, मलबा, सीमित ऑक्सीजन, गैस रिसाव और रोशनी की कमी जैसी परिस्थितियां बचाव दल के लिए बड़ा जोखिम पैदा करती हैं। ऐसे में हर कदम बेहद सावधानी से उठाना पड़ता है।