शुभेंदु अधिकारी के PA चंद्रनाथ रथ हत्याकांड में बड़ा एक्शन हुआ है। मुख्य आरोपी को हरिद्वार से दिल्ली भागते समय गिरफ्तार किया गया। मामले में कॉन्ट्रैक्ट किलिंग एंगल की जांच तेज हो गई है।
पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी के पीए चंद्रनाथ रथ हत्याकांड में जांच एजेंसियों को बड़ी सफलता मिली है। मामले के मुख्य आरोपियों में शामिल राजकुमार को संयुक्त कार्रवाई में गिरफ्तार कर लिया गया। आरोपी हरिद्वार से दिल्ली भागने की कोशिश कर रहा था। इसी दौरान सीबीआई और मुजफ्फरनगर पुलिस की टीम ने उसे छपार टोल प्लाजा के पास दबोच लिया। इस गिरफ्तारी के बाद अब जांच एजेंसियां इस हाई-प्रोफाइल मर्डर केस के पीछे के पूरे नेटवर्क और फंडिंग चैन की परतें खोलने में जुट गई हैं।
हरिद्वार से भागते वक्त पकड़ा गया आरोपी
गिरफ्तार आरोपी राजकुमार उत्तर प्रदेश के बलिया जिले का रहने वाला बताया जा रहा है। हत्या के दिन से ही उसका मोबाइल बंद था और वह लगातार लोकेशन बदल रहा था। जांच एजेंसियों को सूचना मिली थी कि वह हरिद्वार से दिल्ली की ओर निकल चुका है। इसके बाद सीबीआई और स्थानीय पुलिस ने संयुक्त ऑपरेशन चलाकर उसे NH-58 स्थित छपार टोल प्लाजा से गिरफ्तार कर लिया। इससे पहले मामले में ठाकुर राज सिंह समेत अन्य संदिग्धों को भी हिरासत में लिया जा चुका है।
बंगाल चुनाव के बाद हुई थी सनसनीखेज हत्या
चंद्रनाथ रथ की हत्या 6 मई को कोलकाता से करीब 7 किलोमीटर दूर दोहरिया लेन इलाके में हुई थी। यह घटना बंगाल विधानसभा चुनाव में बीजेपी की बड़ी जीत के ठीक दो दिन बाद हुई थी। पुलिस जांच के मुताबिक हमलावरों ने पहले रथ की एसयूवी को एक कार से रोका। इसके बाद बाइक सवार बदमाशों ने बेहद करीब से उन पर गोलियां बरसा दीं। हमले के बाद आरोपी अलग-अलग वाहनों से फरार हो गए थे। शुरुआती जांच में ही इस वारदात के तार उत्तर प्रदेश से जुड़े मिले थे।
कॉन्ट्रैक्ट किलिंग एंगल पर फोकस
जांच एजेंसियां अब इस मामले को पेशेवर कॉन्ट्रैक्ट किलिंग मानकर जांच आगे बढ़ा रही हैं। अधिकारियों का कहना है कि जिस तरीके से रेकी और हमला किया गया, उससे साफ है कि पूरा ऑपरेशन पहले से प्लान था। सीबीआई यह पता लगाने में जुटी है कि आरोपियों को बंगाल में पनाह किसने दी और हथियारों की व्यवस्था कैसे हुई। इसके साथ ही पैसों के लेनदेन और फंडिंग चैन की भी जांच की जा रही है। सूत्रों के मुताबिक शार्प शूटरों को बड़ी रकम दिए जाने की आशंका है और एजेंसियां डिजिटल ट्रांजैक्शन से लेकर स्थानीय संपर्कों तक हर एंगल खंगाल रही हैं।
यूपी-बिहार नेटवर्क की भी जांच तेज
मामले में पहले ही उत्तर प्रदेश से तीन शार्प शूटर गिरफ्तार किए जा चुके हैं। अब बलिया और आसपास के इलाकों में कई संदिग्धों की तलाश जारी है। जांच एजेंसियों का मानना है कि हत्या के पीछे एक बड़ा आपराधिक नेटवर्क सक्रिय हो सकता है, जिसके तार कई राज्यों से जुड़े हुए हैं। इस हाई-प्रोफाइल हत्याकांड ने पश्चिम बंगाल की राजनीति और सुरक्षा व्यवस्था दोनों पर नए सवाल खड़े कर दिए हैं।