राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की अखिल भारतीय प्रतिनिधि सभा की बैठक में सरकार्यवाह दत्तात्रेय होसबाले ने कहा कि संत रविदास समरस समाज और राष्ट्रीय एकता के प्रेरणास्रोत हैं।
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की अखिल भारतीय प्रतिनिधि सभा की बैठक का दूसरा दिन
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरकार्यवाह दत्तात्रेय होसबाले ने कहा कि संत रविदास जी समरस समाज निर्माण, सामाजिक कुरीतियों उन्मूलन के और राष्ट्रीय एकात्मता का प्रेरणास्त्रोत हैं। उन्होंने सदैव ही श्रम की प्रतिष्ठा, शुद्ध आचरण और जातिगत भेदभाव के त्याग पर जोर दिया। वर्तमान में जब विविध विभाजनकारी शक्तियां जन-मानस को वर्ग और जाति के आधार पर बांटने का प्रयास कर रही हैं।
ऐसे समय में संत श्री रविदास जी के जीवन-संदेश के मर्म को समझकर हम सभी को देश और समाज की एकात्मता के लिए काम करने का संकल्प लेने की जरूरत है। श्री होसबाले ने शनिवार को संघ की अखिल भारतीय प्रतिनिधि सभा के दूसरे दिन संत शिरोमणि सद्गुरु श्री रविदास के 650वें प्राकट्य वर्ष पर श्रद्धासुमन अर्पित करते हुए यह वक्तव्य दिया। उन्होंने कहा कि हमारी श्रेष्ठ संत परंपरा भारत को एक विशेष पहचान देता है।
इस परंपरा में संत रविदास जी का विशिष्ट स्थान है। उनका कर्मशील जीवन और कार्य हम सबके लिए प्रेरणास्रोत है। श्री होसबाले ने भारत के आध्यात्मिक और सामाजिक जीवन को आकार देने में संत परंपरा के महत्व पर बात की। उन्होंने कहा कि इस परंपरा ने न केवल भक्ति और सामाजिक सद्भाव को मजबूत किया, बल्कि विदेशी शासकों के अत्याचार के खिलाफ संघर्ष के लिए समाज को जागरूक और तैयार भी किया। संत रविदास को इस्लाम में धर्म परिवर्तन कराने की कई कोशिशें कीं लेकिन वे सफल नहीं हो सके और बाद में उनमें से कई लोग उनके शिष्य बन गए।
समाज में एक नई चेतना प्रवाहित की
श्री होसबाले ने कहा कि संत श्री रविदास जी भक्ति की भाव-धारा के महान संत थे। इन्होंने समाज में एक नई चेतना प्रवाहित की। उन्होंने जन्म के आधार पर ऊंच-नीच के भेद को नकारते हुए आचरण को ही सबसे ऊंची कसौटी माना। रूढ़ियों और कुरीतियों से समाज की मुक्ति तथा कालबाह्य परंपराओं को त्यागने और काल सुसंगत सामाजिक परिवर्तनों को अंगीकार करने हेतु समाज का मानस बनाने में उनकी ऐतिहासिक भूमिका रही है।