आरटीआई से खुलासा हुआ कि 2005 से 2025 के बीच भारत में 200 बाघों का शिकार हुआ। सबसे अधिक मामले मध्यप्रदेश से सामने आए। रिपोर्ट में तेंदुआ शिकार और वन्यजीव अपराध पर भी चिंता जताई है।
नई दिल्ली। ‘टाइगर स्टेट’ का नाम आते ही हर कोई समझ जाता है कि बात मध्यप्रदेश की हो रही है। ऐसा इसलिए क्योंकि भारत में सबसे ज्यादा बाघ इसी राज्य में पाए जाते हैं। हालांकि अब बाघों को लेकर एक चौंकाने वाली रिपोर्ट सामने आई है, जिसे सुनकर कोई भी सन्न रह जाएगा। जिस राज्य में सबसे ज्यादा बाघ पाए जाते हैं, वहीं सबसे ज्यादा बाघों का शिकार भी किया गया है।
यह खुलासा सूचना के अधिकार (आरटीआई) के जरिए हुआ है। केंद्रीय पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय के अधीन वन्यजीव अपराध नियंत्रण ब्यूरो (डब्ल्यूसीसीबी) से प्राप्त जानकारी के अनुसार 2005 से 2025 के बीच पूरे भारत में लगभग 200 बाघों का शिकार हुआ। इसमें मध्य भारत एक प्रमुख केंद्र के रूप में उभरा है।
मध्य भारत में 59 बाघों का शिकार
आरटीआई से मिली जानकारी के अनुसार शिकार के मामलों में से 59 बाघों का शिकार मध्य भारत के आवासों में हुआ। आंकड़ों से पता चलता है कि बाघों के शिकार के सर्वाधिक मामले मध्यप्रदेश में आए हैं। बीते 20 साल में यहां 36 बाघों को तस्करों ने निशाना बनाया। इस सूची में मध्यप्रदेश के बाद उत्तरप्रदेश का नाम है।
राज्यवार बाघ बने शिकार
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मध्यप्रदेश – 36
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उत्तरप्रदेश – 14
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कर्नाटक – 13
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महाराष्ट्र – 9
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असम – 6
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उत्तराखंड – 4
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केरल – 4
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तमिलनाडु – 3
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छत्तीसगढ़ – 3
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आंध्रप्रदेश – 3
भारत में करीब 3600 बाघ
भारत में लगभग 3,600 बाघ हैं, जो वैश्विक बाघ आबादी का लगभग 75 प्रतिशत है। वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय तथा भारतीय वन्यजीव संस्थान और राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण के आंकड़ों के अनुसार भारत में बाघों की संख्या में वृद्धि दर्ज की गई है। 2018 के अनुमान में जहां 2,967 बाघ थे, वहीं नवीनतम आकलन में यह संख्या बढ़ी है।
तेंदुओं के शिकार के भी आंकड़े
डब्ल्यूसीसीबी की रिपोर्ट के अनुसार तेंदुओं का सबसे ज्यादा शिकार हिमाचल प्रदेश में हुआ है। यहां 21 तेंदुए मारे गए। इसके बाद ओडिशा में 8, जम्मू-कश्मीर में 6, पंजाब में 5, उत्तरप्रदेश में 5, उत्तराखंड में 5 और मध्यप्रदेश में 5 तेंदुओं के शिकार के मामले सामने आए। कुल मामलों का बड़ा हिस्सा हिमालयी और पूर्वोत्तर राज्यों से जुड़ा है। वन्यजीव विशेषज्ञों का कहना है कि ये आंकड़े चिंताजनक हैं। उनका मानना है कि शिकार किए गए बाघों और तेंदुओं का छोटा सा हिस्सा ही अधिकारियों की नजर में आता है। अवैध वन्यजीव व्यापार अंतरराष्ट्रीय मांग से जुड़ा है, जिससे इन प्रजातियों के अस्तित्व पर खतरा बना हुआ है।