RSS प्रचार प्रमुख सुनील आंबेकर ने कहा कि विभाजन के समय संघ अधिक मजबूत होता तो देश नहीं बंटता। दिल्ली में संघ यात्रा डॉक्यूमेंट्री कार्यक्रम में दिया बयान।
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के अखिल भारतीय प्रचार प्रमुख सुनील आंबेकर ने कहा कि देश के विभाजन के समय संघ की शक्ति उतनी नहीं थी, अन्यथा भारत का विभाजन टल सकता था। वह शुक्रवार को इंद्रप्रस्थ विश्व संवाद केंद्र द्वारा प्रस्तुत डॉक्यूमेंट्री 'दिल्ली में संघ यात्रा' के प्रदर्शन के अवसर पर संबोधित कर रहे थे। आंबेकर ने बताया कि 1942 से 1947 के बीच दिल्ली और पूरे पंजाब क्षेत्र में संघ का तेजी से विस्तार हुआ। विभाजन के समय संघ उतना सशक्त नहीं था कि हालात को बदल सके। उन्होंने कहा कि विभाजन के दौरान स्वयंसेवकों ने पाकिस्तान क्षेत्र में रह रहे हिंदुओं की सुरक्षा के लिए महत्वपूर्ण कार्य किया और अंतिम व्यक्ति के सुरक्षित आने तक डटे रहने का निर्देश दिया गया था। इस दौरान अनेक स्वयंसेवकों ने बलिदान दिया और लाखों विस्थापितों के लिए राहत शिविर लगाए गए।
1947 के पहले गोलवलकर जी ने किया था स्वयंसेवकों का मार्गदर्शन
आंबेकर ने यह भी बताया कि अगस्त 1947 के पहले पखवाड़े में जब देश उथल-पुथल से गुजर रहा था, उस समय संघ के तत्कालीन प्रमुख एम. एस. गोलवलकर कराची में रहकर स्वयंसेवकों का मार्गदर्शन कर रहे थे। आंबेकर ने संघ के संस्थापक केशव बलिराम हेडगेवार के दृष्टिकोण का उल्लेख करते हुए कहा कि यदि वे राजनीति करना चाहते, तो अलग राजनीतिक दल बना सकते थे, लेकिन उनका उद्देश्य समाज में सांस्कृतिक जागरण और संगठन खड़ा करना था।
इसी सोच के साथ संघ की स्थापना की गई। उन्होंने कहा कि दिल्ली में संघ कार्य की शुरुआत उसके प्रारंभिक काल में ही हो गई थी और संघ के 100 वर्षों के इतिहास में दिल्ली की भूमिका हमेशा महत्वपूर्ण रही है। सत्ता का केंद्र होने के कारण दिल्ली में राजनीतिक गतिविधियां केंद्रित रहीं, लेकिन संघ ने सामाजिक और सांस्कृतिक संगठन के रूप में अपनी शाखाओं के माध्यम से समाज को संगठित करने का कार्य निरंतर जारी रखा।
निरंतरता संघ कार्य की प्रमुख विशेषता
दिल्ली प्रांत संघचालक अनिल अग्रवाल ने कहा कि निरंतरता और अनुकूलनशीलता संघ कार्य की प्रमुख विशेषताएं हैं, वहीं प्रांत प्रचार प्रमुख रीतेश अग्रवाल ने बताया कि यह डॉक्यूमेंट्री दिल्ली में संघ के प्रारंभ से लेकर उसके विस्तार तक की यात्रा को ऐतिहासिक तथ्यों, साक्षात्कारों और अभिलेखीय सामग्री के माध्यम से प्रस्तुत करती है। उन्होंने बताया कि इस डॉक्यूमेंट्री और विशेषांक के निर्माण के लिए 60 से अधिक वरिष्ठ कार्यकर्ताओं के साक्षात्कार लिए गए। 85 से अधिक पुस्तकों का अध्ययन किया गया और 100 घंटे से अधिक वीडियो फुटेज का विश्लेषण किया गया। इस अवसर पर राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के केंद्रीय कार्यालय सचिव अशोक पोरवाल जी, राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के दिल्ली प्रांत प्रचारक विशाल जी, राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के दिल्ली प्रांत सह कार्यवाह राजेश जी, राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के केंद्रीय कार्यालय व्यवस्था टोली सदस्य दिलीप जी तथा राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के उत्तर क्षेत्र कार्यालय सचिव राजवीर जी, इंद्रप्रस्थ विश्व संवाद केंद्र के अध्यक्ष अशोक सचदेवा जी इत्यादि की गरिमामय उपस्थिति रही।