RBI ने EMI पर राहत नहीं दी

RBI Repo Rate: RBI ने नहीं दी EMI पर राहत, रेपो रेट 5.25% पर बरकरार; महंगाई बनी चिंता

RBI ने अपनी तीसरी मॉनेटरी पॉलिसी समीक्षा में रेपो रेट को 5.25% पर बरकरार रखा, जिससे होम लोन, कार लोन, और पर्सनल लोन की EMI में कोई बदलाव नहीं होगा।

By : नरेंद्र कुमार
RBI Repo Rate: RBI ने नहीं दी EMI पर राहत, रेपो रेट 5.25% पर बरकरार; महंगाई बनी चिंता

तीसरी मॉनेटरी पॉलिसी बैठक में ब्याज दरों में कोई बदलाव नहीं, गवर्नर बोले- वैश्विक हालात से महंगाई पर दबाव

अगर आप होम लोन, कार लोन या पर्सनल लोन की EMI कम होने का इंतजार कर रहे थे, तो फिलहाल राहत नहीं मिलने वाली है। भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने अपनी तीसरी मॉनेटरी पॉलिसी समीक्षा में रेपो रेट को 5.25% पर ही बरकरार रखने का फैसला किया है। इसका मतलब है कि अभी लोन की ब्याज दरों और EMI में कोई बदलाव नहीं होगा।RBI गवर्नर संजय मल्होत्रा ने फैसले की घोषणा करते हुए कहा कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में जारी अनिश्चितता और बढ़ती महंगाई को देखते हुए फिलहाल ब्याज दरों में बदलाव करना उचित नहीं माना गया।

लगातार तीसरी बैठक में यथास्थिति

RBI की मॉनेटरी पॉलिसी कमेटी (MPC) की बैठक 3 अगस्त से शुरू हुई थी। तीन दिन की चर्चा के बाद बुधवार को नीतिगत फैसलों का ऐलान किया गया। इससे पहले जून में हुई बैठक में भी रेपो रेट 5.25% पर ही रखा गया था। केंद्रीय बैंक का कहना है कि मौजूदा आर्थिक परिस्थितियों में महंगाई पर नियंत्रण उसकी सबसे बड़ी प्राथमिकता बनी हुई है।

पिछले साल मिली थी EMI में राहत

बीते साल 2025 में आरबीआई ने कई बार रेपो रेट में कटौती की थी। पूरे साल में कुल 125 बेसिस पॉइंट की कमी की गई, जिससे होम लोन और ऑटो लोन लेने वाले लाखों ग्राहकों की EMI में राहत मिली थी। हालांकि इस साल जून और अगस्त दोनों एमपीसी बैठकों में रेपो रेट को 5.25% पर ही बनाए रखा गया है।

EMI पर क्या होगा असर?

रेपो रेट में कोई बदलाव नहीं होने का सीधा असर लोन लेने वालों पर पड़ेगा।

  • होम लोन की EMI फिलहाल नहीं घटेगी।
  • कार और पर्सनल लोन की ब्याज दरों में भी बदलाव की संभावना नहीं है।
  • मौजूदा ग्राहकों और नए लोन लेने वालों के लिए बैंक फिलहाल मौजूदा दरों पर ही कर्ज देंगे।

रेपो रेट क्या है और क्यों अहम है?

रेपो रेट वह ब्याज दर है, जिस पर RBI वाणिज्यिक बैंकों को कर्ज देता है। रेपो रेट बढ़ने पर बैंकों के लिए पैसा महंगा हो जाता है, जिससे लोन की ब्याज दरें बढ़ सकती हैं। रेपो रेट घटने पर बैंक सस्ता कर्ज देते हैं, जिससे EMI कम होती है और बाजार में खर्च व निवेश बढ़ता है। RBI महंगाई और आर्थिक विकास के बीच संतुलन बनाए रखने के लिए समय-समय पर रेपो रेट में बदलाव करता है।

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