राजस्थान में स्लीपर सेल का मास्टरमाइंड गिरफ्तार। विदेश से निर्देश लेकर आगजनी की घटनाएं, NIA और ATS जांच में जुटी। सोशल मीडिया के जरिए युवाओं को जोड़ने का खुलासा।
जैसलमेर: भारत की आंतरिक सुरक्षा के लिए एक गंभीर खतरे का खुलासा हुआ है। राजस्थान के सीमावर्ती इलाके में सुरक्षा एजेंसियों ने एक सक्रिय स्लीपर सेल नेटवर्क का पर्दाफाश किया है। इस मामले में मुख्य आरोपी को गिरफ्तार किया गया है, जो विदेश में बैठे आकाओं के निर्देश पर देश के अलग-अलग हिस्सों में अशांति फैलाने की साजिश रच रहा था। यह घटना देश की सुरक्षा एजेंसियों की सतर्कता को भी दर्शाती है, जिससे एक बड़ी साजिश को समय रहते रोका जा सका।
सीमा क्षेत्र में सक्रिय था नेटवर्क
राजस्थान के Jaisalmer जिले के नाचना थाना क्षेत्र से आरोपी को संदिग्ध गतिविधियों के आधार पर हिरासत में लिया गया। उसकी पहचान राजूराम गोदारा उर्फ सैयद (29) के रूप में हुई है। बताया जा रहा है कि वह सामान्य किसान की तरह जीवन बिताता था, ताकि किसी को उस पर शक न हो। लेकिन जांच में सामने आया कि वह एक बड़े नेटवर्क का संचालन कर रहा था।
डिजिटल प्लेटफॉर्म से चला रहा था नेटवर्क
जांच एजेंसियों के अनुसार आरोपी टेलीग्राम जैसे सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म के जरिए युवाओं को जोड़ता था और उन्हें निर्देश देता था। इस नेटवर्क के तहत उत्तर प्रदेश में कई आगजनी की घटनाएं करवाई गईं। खासतौर पर Bijnor जिले में मार्च और अप्रैल के दौरान हुई घटनाएं इसी साजिश का हिस्सा बताई जा रही हैं।
आगजनी के बदले पैसे, वीडियो बनाना था जरूरी
जांच में यह भी सामने आया है कि आरोपियों को विशेष समुदाय के वाहनों को निशाना बनाने के निर्देश दिए गए थे। घटना के बाद वीडियो बनाकर टेलीग्राम पर भेजना होता था, जिसके बदले ऑनलाइन या हवाला के जरिए भुगतान किया जाता था। यह तरीका न केवल संगठित अपराध की ओर इशारा करता है, बल्कि समाज में तनाव फैलाने की कोशिश भी दर्शाता है।
मोबाइल से मिले अहम सबूत
फॉरेंसिक जांच में आरोपी के मोबाइल से हथियारों की तस्वीरें, चैट और आपत्तिजनक वीडियो बरामद हुए हैं। इनमें देश के अलग-अलग हिस्सों में अशांति फैलाने की योजना से जुड़े संकेत मिले हैं। जांच एजेंसियों के अनुसार इस नेटवर्क के तार सऊदी अरब और दक्षिण अफ्रीका तक जुड़े हुए हैं। मामले की गंभीरता को देखते हुए National Investigation Agency (NIA) और एटीएस की टीमें जांच में जुटी हैं। सभी आरोपियों के खिलाफ गैरकानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम (UAPA) के तहत मामला दर्ज किया गया है।
सोशल मीडिया के जरिए युवाओं को बनाया जा रहा निशाना
पुलिस के मुताबिक यह एक नया ट्रेंड सामने आ रहा है, जिसमें सोशल मीडिया के जरिए युवाओं को स्लीपर सेल की तरह इस्तेमाल किया जा रहा है। पहले इंस्टाग्राम और फेसबुक जैसे प्लेटफॉर्म पर संपर्क किया जाता है, फिर टेलीग्राम ग्रुप में जोड़कर उन्हें टास्क दिए जाते हैं। आर्थिक रूप से कमजोर या कट्टर सोच वाले युवाओं को खासतौर पर निशाना बनाया जाता है।
सुरक्षा एजेंसियां अलर्ट, बड़ी साजिश टली
इस कार्रवाई के बाद सीमावर्ती क्षेत्रों में सुरक्षा व्यवस्था और कड़ी कर दी गई है। पुलिस और सुरक्षा एजेंसियों का मानना है कि समय रहते कार्रवाई से एक बड़ी साजिश को विफल कर दिया गया। यह मामला देश की आंतरिक सुरक्षा के लिए एक चेतावनी भी है कि डिजिटल माध्यमों का दुरुपयोग कर असामाजिक तत्व किस तरह युवाओं को गुमराह कर सकते हैं।