52 हफ्ते में 52 सुधार अभियान के तहत केंद्र ने रेल टेक पोर्टल शुरू किया। रेल दावा न्यायाधिकरण की सभी बेंचें अगले 12 महीनों में पूरी तरह डिजिटल होंगी।
भारतीय रेल में नवाचार को बढ़ावा देने और रेल दावा न्यायाधिकरण (आरसीटी) की प्रक्रियाओं को पूरी तरह अंकीकृत बनाने की दिशा में केंद्र सरकार ने बड़ा कदम उठाया है। रेल, सूचना एवं प्रसारण मंत्री अश्विनी वैष्णव ने ‘52 सप्ताह में 52 सुधार’ पहल के तहत सुधार संख्या तीन और चार की घोषणा करते हुए रेल प्रौद्योगिकी नीति और ई-आरसीटी प्रणाली का शुभारंभ किया। नई नीति के तहत एक समर्पित ‘रेल टेक पोर्टल’ शुरू किया गया है। इसके माध्यम से नवप्रवर्तक, स्टार्टअप, उद्योग और शोध संस्थान सीधे भारतीय रेल से जुड़ सकेंगे। वहीं ई-आरसीटी प्लेटफॉर्म के जरिए रेल दावा न्यायाधिकरण की सभी 23 बेंचों को अगले 12 महीनों में पूरी तरह अंकीकृत करने का लक्ष्य रखा गया है।
स्टार्टअप और नवप्रवर्तकों के लिए खुला मंच
रेल प्रौद्योगिकी नीति का उद्देश्य भारतीय रेल में तकनीकी नवाचार का व्यवस्थित और व्यापक समावेश करना है। अब कोई भी व्यक्ति या स्टार्टअप, जिसके पास मजबूत तकनीकी समाधान हो, चरणबद्ध अंकीकृत प्रक्रिया के माध्यम से अपने प्रस्ताव सीधे पोर्टल पर प्रस्तुत कर सकेगा। केंद्रीय मंत्री ने कहा कि यह नीति रक्षा क्षेत्र की आईडेक्स पहल, इलेक्ट्रॉनिक्स एवं आईटी मंत्रालय के स्टार्टअप ढांचे और दूरसंचार क्षेत्र की नवाचार नीतियों से सीख लेकर तैयार की गई है। इसका उद्देश्य जटिल वेंडर चयन प्रणाली से हटकर परीक्षण और अंगीकरण आधारित नवाचार मॉडल विकसित करना है।
वित्तपोषण में भी बड़ा बदलाव
- व्यवहार्य समाधान प्रस्तावित करने पर रेलवे 50 प्रतिशत तक विकास लागत वहन करेगा।
- विस्तार अनुदान को तीन गुना से अधिक बढ़ाया गया है।
- नमूना विकास और परीक्षण के लिए अधिकतम अनुदान दोगुना किया गया है।
- सफल परीक्षण के बाद दीर्घकालिक ऑर्डर देकर बड़े पैमाने पर लागू करने की व्यवस्था होगी।
रेलवे न्यायाधिकरण की अंकीकृत क्रांति
सुधार संख्या चार के तहत रेल दावा न्यायाधिकरण को पूरी तरह अंकीकृत बनाया जा रहा है। यह न्यायाधिकरण रेल दुर्घटनाओं, अप्रिय घटनाओं, माल हानि और किराया वापसी से जुड़े मामलों का निपटारा करता है। देश के 21 शहरों में 23 बेंचों के साथ कार्यरत आरसीटी अब एकीकृत अंकीकृत प्लेटफॉर्म से जुड़ेगा।
किन क्षेत्रों में होंगे नवाचार?
- एआई आधारित प्रणाली से रेलवे ट्रैक पर हाथियों को बचाने की व्यवस्था
- कोचों में एआई आधारित अग्नि पहचान प्रणाली
- ड्रोन आधारित प्रणाली, पटरी टूटने पर स्वतः सिग्नल परिवर्तन
- रेल तनाव पर निगरानी की प्रणाली
- पार्सल वैन में सेंसर आधारित लोड कैलकुलेशन
- कोचों पर सोलर पैनल
एआई आधारित पेंशन और विवाद समाधान प्रणाली
केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव ने कहा कि यात्री सुरक्षा के लिए एआई-सक्षम सीसीटीवी, रडार, इन्फ्रारेड कैमरा और अल्ट्रासोनिक तकनीकों से ट्रैक निगरानी जैसी प्रणालियां भविष्य में दुर्घटनाओं को रोकने में मदद करेंगी। ड्रोन आधारित निरीक्षण से पटरियों की दरारों और ओवरहेड उपकरणों की खराबी का समय रहते पता लगाया जा सकेगा।