भारत-अमेरिका व्यापार समझौते पर बयान के बाद राहुल गांधी पर केंद्र सरकार सख्त, किरेन रिजिजू बोले—बिना सबूत आरोप सदन की गरिमा के खिलाफ
किरेन रिजिजू बोले: प्रधानमंत्री और मंत्री पर निराधार आरोप
लोकसभा में बजट सत्र के दौरान भारत–अमेरिका अंतरिम व्यापार समझौते पर हुई चर्चा ने सियासी तापमान बढ़ा दिया है। नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी के वक्तव्य पर आपत्ति जताते हुए केंद्र सरकार ने उनके खिलाफ विशेषाधिकार हनन प्रस्ताव लाने की घोषणा की है। केंद्रीय संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने आरोप लगाया कि राहुल गांधी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय मंत्री हरदीप सिंह पुरी का नाम लेकर गंभीर आरोप लगाए, लेकिन उनके समर्थन में कोई प्रमाण प्रस्तुत नहीं किया।
संसद परिसर में रिजिजू ने कहा कि लोकसभा के नियमों के अनुसार यदि कोई सदस्य किसी अन्य सदस्य पर आरोप लगाना चाहता है, तो उसे पूर्व सूचना देनी होती है और साक्ष्य प्रस्तुत करने होते हैं। बिना प्रमाण के आरोप लगाना सदन को गुमराह करने जैसा है। सरकार इस पर चुप नहीं रहेगी। उन्होंने कहा कि सरकार लोकसभा अध्यक्ष के समक्ष विशेषाधिकार हनन का नोटिस दाखिल करेगी।
राहुल गांधी के प्रमुख आरोप
भारत-अमेरिका अंतरिम व्यापार समझौते को ‘आत्मसमर्पण’ बताते हुए कहा कि इससे भारत की संप्रभुता प्रभावित होगी।
आरोप लगाया कि सरकार बाहरी दबाव में निर्णय ले रही है, जिससे करोड़ों भारतीयों का भविष्य दांव पर है।
अडाणी से जुड़े अमेरिका में चल रहे मामले और कथित ‘एपस्टीन फाइल्स’ का जिक्र किया।
दावा किया कि डेटा और एआई के क्षेत्र में विदेशी कंपनियों को विशेष लाभ दिया जा रहा है।
कहा कि भारत को अंतरराष्ट्रीय समझौतों में बराबरी की शर्तों पर बातचीत करनी चाहिए।
हरदीप सिंह पुरी का जवाब
स्पष्ट किया कि एपस्टीन से मुलाकातें सीमित और औपचारिक थीं, निजी संबंध नहीं थे।
2009–2017 के दौरान जारी 30 लाख ईमेल में केवल तीन–चार बैठकों का उल्लेख बताया।
कहा कि सभी बातचीत पेशेवर थीं और सार्वजनिक रिकॉर्ड का हिस्सा हैं।
नवंबर 2014 में भारत के डिजिटल और आर्थिक अवसरों को बढ़ावा देने की बात कही थी।
पुरी ने कहा- राहुल थोड़ा सा पढ़ लिख लो
केंद्रीय मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने राहुल गांधी द्वारा ‘एपस्टीन फाइल्स’ के संदर्भ में उनका नाम लेने पर प्रतिक्रिया दी। उन्होंने स्पष्ट किया कि वे अमेरिकी फाइनेंसर जेफरी एपस्टीन से केवल कुछ अवसरों पर, वह भी आधिकारिक या प्रतिनिधिमंडल के हिस्से के रूप में मिले थे और उनकी बातचीत पूरी तरह पेशेवर थी।
पुरी ने कहा कि मई 2009 से 2017 तक संयुक्त राष्ट्र में भारत के राजदूत के रूप में अपने कार्यकाल के दौरान जारी 30 लाख ईमेल में केवल तीन–चार बैठकों का उल्लेख है। उन्होंने राहुल गांधी पर कटाक्ष करते हुए कहा, “थोड़ा सा पढ़ लिख लो।”
पुरी ने यह भी कहा कि नवंबर 2014 में वे एक निजी नागरिक के रूप में भारत के डिजिटल और आर्थिक अवसरों की वकालत कर रहे थे और इसे किसी भी तरह से गलत संदर्भ में नहीं देखा जाना चाहिए।