राहुल गांधी के नेतृत्व में कांग्रेस 20 साल में 99 चुनाव हार चुकी है। लगातार हार से पार्टी की रणनीति और भविष्य पर बड़े सवाल खड़े हो रहे हैं।
देश की सबसे पुरानी राजनीतिक पार्टी कांग्रेस के सामने इस समय सबसे बड़ी चुनौती उसका लगातार चुनावी प्रदर्शन बन गया है। राहुल गांधी के नेतृत्व में पार्टी पिछले 20 सालों में 99 चुनाव हार चुकी है और अब हार का ‘शतक’ पूरा होने के करीब है। लगातार मिल रही इन हारों ने न सिर्फ पार्टी की रणनीति पर सवाल खड़े किए हैं, बल्कि यह भी दिखाया है कि कांग्रेस को अपनी राजनीतिक दिशा और नेतृत्व शैली पर गंभीर आत्ममंथन की जरूरत है।
2004 से शुरू हुआ हार का सिलसिला
कांग्रेस के चुनावी संघर्ष की कहानी 2004 से ही नजर आने लगती है। इस साल कर्नाटक, ओडिशा और सिक्किम में पार्टी को हार का सामना करना पड़ा। इसके बाद 2005 में बिहार और झारखंड, 2006 में केरल और पश्चिम बंगाल, और 2007 में गुजरात, पंजाब, उत्तर प्रदेश समेत कई राज्यों में पार्टी को लगातार झटके लगे।
2014 बना सबसे बड़ा टर्निंग पॉइंट
2014 का लोकसभा चुनाव कांग्रेस के लिए सबसे बड़ा झटका साबित हुआ। इस चुनाव में पार्टी को करारी हार का सामना करना पड़ा और इसके बाद राज्यों में भी हार का सिलसिला तेज हो गया। आंध्र प्रदेश, महाराष्ट्र, हरियाणा, झारखंड और जम्मू-कश्मीर जैसे राज्यों में भी पार्टी अपनी पकड़ बनाए रखने में नाकाम रही।
2015-2019: हर साल बढ़ती गई मुश्किलें
2015 से 2019 के बीच कांग्रेस को लगभग हर बड़े राज्य में हार झेलनी पड़ी। दिल्ली, असम, उत्तर प्रदेश, गुजरात, हिमाचल प्रदेश और कर्नाटक जैसे राज्यों में पार्टी का प्रदर्शन कमजोर रहा। 2019 के लोकसभा चुनाव में भी पार्टी को देशभर में हार का सामना करना पड़ा, जिससे संगठन पर दबाव और बढ़ गया।
2020 के बाद भी नहीं बदले हालात
2020 के बाद भी कांग्रेस की स्थिति में ज्यादा सुधार देखने को नहीं मिला। बिहार, दिल्ली, असम, गोवा, पंजाब, उत्तराखंड और पश्चिम बंगाल जैसे राज्यों में पार्टी को लगातार हार झेलनी पड़ी। 2023 और 2024 के चुनावों में भी पार्टी को कई राज्यों में हार का सामना करना पड़ा, जिससे यह आंकड़ा 99 तक पहुंच गया।