पुरी में जगन्नाथ रथयात्रा के दौरान भगदड़ मच गई। हादसे में एक श्रद्धालु की मौत हो गई, जबकि 100 से ज्यादा लोग घायल बताए जा रहे हैं।
ओडिशा के पुरी में स्थित भगवान जगन्नाथ की रथयात्रा आज के दिन धूमधाम से निकाली जा रही है। इस दौरान लाखों की संख्या में श्रद्धालु दर्शन के लिए पहुंचे हुए। इस बीच रथयात्रा के दौरान बड़ा हादसा हो गया। पहांडी रस्म के दौरान अचानक मची भगदड़ में एक श्रद्धालु की मौत हो गई। वहीं, जबकि 100 से ज्यादा लोगों के घायल होने की सूचना है।
प्रारंभिक जानकारी के अनुसार, रथयात्रा के दौरान पहांडी रस्म के समय भगवान जगन्नाथ के दर्शन के लिए बड़ी संख्या में श्रद्धालु रथों की ओर बढ़ने लगे। वहीं, यात्रा रूट पर तैनात वॉलेंटियर लोगों को पीछे हटाने लगे। इसी दौरान धक्का-मुक्की बढ़ने से लोग एक दूसरे के ऊपर गिरने लगे और भगदड़ जैसी स्थिति बन गई। इस घटना में एक व्यक्ति की मौत की जानकारी सामने आई है।
तेज बारिश के बीच भी लाखों श्रद्धालु पहुंचे
रथयात्रा के दौरान उड़ीसा में भारी बारिश हो रही है। इसके बाद भी रथयात्रा के दौरान 10 लाख से अधिक श्रद्धालु दर्शन करने के लिए पहुंचे हुए हैं। वहीं, हादसे के बाद प्रशासन और राहत दल मौके पर पहुंचकर स्थिति को संभालने में जुटे हैं। बता दें कि जगन्नाथ मंदिर से निकली हुई यात्रा 3 किमी का सफर करते हुए गुंडीचा मंदिर तक जाएगी।
क्यों पहुंचते हैं लाखों श्रद्धालु
जगन्नाथ की रथयात्रा को लेकर विशेष धार्मिक महत्व है। साथ ही मान्यता है कि इस दौरान भगवान के दर्शन करने और रथ की रस्सी खींचने से विशेष पुण्य की प्राप्ति होती है। इतना ही नहीं जीवन के कष्ट दूर होते हैं। यही वजह है कि हर देश-विदेश से लाखों की संख्या में श्रद्धालु इस ऐतिहासिक यात्रा में अपनी उपस्थिति दर्ज कराने के लिए पुरी पहुंचते हैं।
क्यों निकाली जाती है रथ यात्रा
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, भगवान जगन्नाथ हर साल अपने भाई भगवान बलभद्र और बहन देवी सुभद्रा के साथ गुंडिचा मंदिर जाते हैं। इसे भगवान के अपनी मौसी के घर जाने की परंपरा से जोड़ा जाता है। मान्यता है कि इस यात्रा के जरिए भगवान अपने भक्तों के बीच पहुंचते हैं और उन्हें दर्शन देकर आशीर्वाद प्रदान करते हैं। इसी वजह से जगन्नाथ रथ यात्रा को आस्था और भक्ति का बड़ा पर्व माना जाता है।
रथ निर्माण की अनोखी परंपरा
पुरी की रथ यात्रा में इस्तेमाल होने वाले तीनों रथ हर साल नए बनाए जाते हैं। इन रथों के निर्माण की प्रक्रिया कई महीने पहले शुरू हो जाती है। भगवान जगन्नाथ, भगवान बलभद्र और देवी सुभद्रा के लिए अलग-अलग विशाल रथ तैयार किए जाते हैं। यात्रा के दिन हजारों श्रद्धालु इन रथों को खींचते हैं और पूरा वातावरण जय जगन्नाथ के जयघोष से गूंज उठता है।
सुरक्षा के लिए प्रशासन ने किए खास इंतजाम
लाखों श्रद्धालुओं की भीड़ को देखते हुए पुरी प्रशासन ने सुरक्षा और यातायात व्यवस्था को मजबूत किया है। शहर में लोगों की आवाजाही को आसान बनाने के लिए 595 स्थायी और 1,050 अस्थायी संकेतक लगाए गए हैं। सुरक्षा व्यवस्था संभालने के लिए करीब 12 हजार पुलिसकर्मियों के साथ केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बल के जवानों की तैनाती की गई है। समुद्री क्षेत्र की निगरानी के लिए भारतीय तटरक्षक बल और भारतीय नौसेना को भी अलर्ट रखा गया है। पूरे आयोजन की निगरानी के लिए 19 वरिष्ठ आईपीएस अधिकारियों को अलग-अलग जिम्मेदारियां सौंपी गई हैं।
जगन्नाथ रथ यात्रा 2026 का पूरा शेड्यूल
पुरी में भगवान जगन्नाथ की रथ यात्रा के बाद पूरे उत्सव से जुड़े कई प्रमुख धार्मिक अनुष्ठान आयोजित किए जाएंगे। इस बार यात्रा की शुरुआत 16 जुलाई को हुई। इसके बाद 20 जुलाई को हेरा पंचमी, 23 जुलाई को संध्या दर्शन, 24 जुलाई को बहुदा यात्रा (वापसी रथ यात्रा), 25 जुलाई को सुना बेष (स्वर्ण श्रृंगार), 26 जुलाई को अधर पाना और 27 जुलाई को नीलाद्री बीजे का आयोजन होगा।
रथ यात्रा के शुरुआती चरण में भगवान जगन्नाथ, भगवान बलभद्र और देवी सुभद्रा के विग्रहों को मंदिर से बाहर लाकर रथों पर विराजमान करने की परंपरा निभाई जाती है। इस साल पाहांडी बीजे अनुष्ठान सुबह करीब 9 से 9:30 बजे के बीच शुरू हुआ।