केतन अग्रवाल हत्याकांड में जांच के दौरान बड़ा खुलासा हुआ है। पुलिस के मुताबिक हत्या के लिए संपर्क किए गए एक कथित सुपारी किलर ने वारदात से इनकार कर दिया था। अब वही व्यक्ति जांच में अहम गवाह बन सकता है।
पुणे। देशभर में चर्चिति पुणे के कारोबारी केतन अग्रवाल हत्याकांड की जांच में नया मोड़ सामने आया है। पुलिस के अनुसार, मुख्य आरोपी सिया गोयल और चेतन चौधरी ने कथित तौर पर हत्या के लिए पहले एक सुपारी किलर से संपर्क किया था। हालांकि उस व्यक्ति ने काम करने से इनकार कर दिया। अब पुलिस उसे मामले में अहम गवाह के रूप में पेश करने की तैयारी कर रही है।
आरोपियों ने जिस होटल में मुलाकात की थी वहां के CCTV फुटेज भी जांच एजेंसियों को मिले हैं। पुलिस का मानना है कि ये फुटेज आरोपियों की कथित साजिश की कड़ियों को जोड़ने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।
होटल की मुलाकात बनी जांच का अहम हिस्सा
पुलिस के मुताबिक सिया गोयल और चेतन चौधरी ने पुणे के एक होटल में कथित सुपारी किलर से मुलाकात की थी। पूछताछ में सामने आया कि केतन अग्रवाल के बारे में पूरी जानकारी मिलने के बाद उसने हत्या करने से इनकार कर दिया। अब पुलिस इसी व्यक्ति का बयान अदालत में गवाह के तौर पर दर्ज कराने की तैयारी कर रही है। होटल से बरामद CCTV फुटेज भी जांच का अहम हिस्सा बन गए हैं।
पूछताछ से बचने के लिए देखे जापानी वीडियो
जांच के दौरान पुलिस को आरोपियों की इंटरनेट हिस्ट्री से ऐसे वीडियो भी मिले हैं, जिनमें पूछताछ के दौरान शांत रहने, चेहरे के हावभाव नियंत्रित रखने और सवालों के जवाब देने के तरीके बताए गए थे। पुलिस का दावा है कि गिरफ्तारी की आशंका के बीच दोनों ने करीब दो घंटे तक ऐसे जापानी वीडियो देखे थे। इन डिजिटल सबूतों को भी केस डायरी में शामिल किया गया है।
18 जून को लोहगढ़ किले में हुई थी हत्या
पुलिस के अनुसार 18 जून को सिया गोयल और चेतन चौधरी कथित तौर पर केतन अग्रवाल को पुणे के लोहगढ़ किले ले गए, जहां 400 फीट गहरी खाई में धक्का देने से उसकी मौत हो गई। दोनों आरोपी फिलहाल येरवडा केंद्रीय जेल में न्यायिक हिरासत में हैं और मामले की जांच जारी है।
परिजनों ने रिश्ता कराने वालों की जांच की मांग उठाई
केतन अग्रवाल के पिता विशाल अग्रवाल ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा कि उनके बेटे का रिश्ता मित्तल परिवार की सिफारिश पर तय हुआ था। उनका आरोप है कि जिस परिवार ने सिया की गारंटी दी थी, उसकी भूमिका की भी निष्पक्ष जांच होनी चाहिए। हालांकि इस संबंध में जांच एजेंसियों की ओर से अभी कोई आधिकारिक निष्कर्ष सामने नहीं आया है।