PMK अध्यक्ष अंबुमणि रामदास ने पीएम मोदी को पत्र लिखकर 2009 के बाद जन्मे युवाओं के लिए सिगरेट और तंबाकू बिक्री पर स्थायी प्रतिबंध लगाने की मांग की।
तमिलनाडु की पट्टाली मक्कल काची (PMK) के अध्यक्ष अंबुमणि रामदास ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखकर बड़ा सुझाव दिया है उन्होंने मांग की है कि 1 जनवरी 2009 या उसके बाद जन्मे लोगों के लिए सिगरेट और तंबाकू उत्पादों की बिक्री पर स्थायी प्रतिबंध लगाया जाए, ताकि भारत में “धूम्रपान-मुक्त पीढ़ी” तैयार की जा सके।
अंबुमणि रामदास ने अपने पत्र में तंबाकू को देश के लिए गंभीर सार्वजनिक स्वास्थ्य संकट बताया। उनका कहना है कि युवाओं को शुरुआती उम्र में तंबाकू की लत से बचाने के लिए अब सख्त कानून बनाने की जरूरत है।
PM मोदी से क्या मांग की गई?
PMK नेता ने प्रधानमंत्री से अनुरोध किया कि केंद्र सरकार ऐसा कानून लाए, जिससे 2009 के बाद जन्मे लोग जीवनभर कानूनी रूप से सिगरेट और तंबाकू उत्पाद नहीं खरीद सकें उन्होंने कहा कि इससे आने वाली पीढ़ियों को धूम्रपान की लत से बचाया जा सकेगा और धीरे-धीरे देश को तंबाकू मुक्त बनाने की दिशा में बड़ा बदलाव आएगा।
तंबाकू को बताया बड़ा स्वास्थ्य संकट
अपने पत्र में अंबुमणि रामदास ने कहा कि भारत में तंबाकू का उपयोग लाखों लोगों की जान के लिए खतरा बना हुआ है। खासकर युवाओं में बढ़ती लत चिंता का विषय है।
उन्होंने वैश्विक स्वास्थ्य आंकड़ों का हवाला देते हुए कहा कि देश में लगभग 26.7 करोड़ लोग तंबाकू का इस्तेमाल करते हैं। यानी हर पांच में से एक भारतीय किसी न किसी रूप में तंबाकू का सेवन करता है।
हर साल लाखों मौतों का दावा
पत्र में दावा किया गया कि तंबाकू के कारण भारत में हर साल 13.5 लाख से अधिक लोगों की मौत होती है। वहीं परोक्ष धूम्रपान यानी दूसरे के धुएं के संपर्क में आने से कुल मौतों का आंकड़ा करीब 23 लाख तक पहुंच जाता है।
अंबुमणि ने कहा कि तंबाकू कैंसर, हृदय रोग, फेफड़ों की बीमारियों और कई गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं का प्रमुख कारण है।
ब्रिटेन जैसे कानून की मांग
PMK अध्यक्ष ने केंद्र सरकार से ब्रिटेन की तर्ज पर सख्त कानून लागू करने की मांग की। उन्होंने कहा कि यदि एक निश्चित वर्ष के बाद जन्मे लोगों के लिए तंबाकू उत्पादों की बिक्री पर स्थायी रोक लगाई जाती है, तो आने वाले वर्षों में भारत में धूम्रपान की दर तेजी से घट सकती है. उन्होंने यह भी कहा कि देश में 40 से 50 फीसदी कैंसर के मामले तंबाकू से जुड़े हैं और हर साल करीब 4.7 लाख मौतें तंबाकू जनित कैंसर के कारण होती हैं।