मोदी सरकार 3.0 में पीएम मोदी ने सभी मंत्रियों से जून 2024 के बाद किए गए सुधारों का रिपोर्ट कार्ड मांगा है। अगली कैबिनेट बैठक में होगी सख्त समीक्षा।
मोदी सरकार 3.0 में अब कामकाज की सीधी और कड़ी समीक्षा की तैयारी शुरू हो गई है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपनी सरकार के सभी मंत्रालयों के कैबिनेट मंत्रियों से उनके कामकाज का रिपोर्ट कार्ड मांगा है। निर्देश साफ हैं, एक हफ्ते के भीतर जून 2024 के बाद किए गए बड़े सुधारों की पूरी रिपोर्ट देनी होगी। खास बात यह है कि इन रिपोर्ट्स को प्रधानमंत्री खुद पढ़ेंगे, जांचेंगे और उसी आधार पर आगे की दिशा तय करेंगे।सरकार के भीतर इसे सुधारवाद की अगली कड़ी माना जा रहा है। पीएम मोदी ने साफ कर दिया है कि सिर्फ योजनाएं गिनाने से काम नहीं चलेगा, यह भी बताना होगा कि इन सुधारों से आम लोगों के जीवन और ईज ऑफ डुइंग बिजनेस में क्या बदलाव आया।
एक हफ्ते में मांगा गया ब्योरा
प्रधानमंत्री ने सभी मंत्रालयों को निर्देश दिए हैं कि वे जून 2024, यानी तीसरी बार सरकार बनने के बाद किए गए प्रमुख सुधारों की विस्तृत सूची तैयार करें। अगली कैबिनेट बैठक में हर मंत्री को अपने मंत्रालय के तीन बड़े सुधारों और उनके प्रभाव पर प्रस्तुति देनी होगी. यह कैबिनेट बैठक इसी सप्ताह होने की संभावना है। इसके चलते इन दिनों मंत्रालयों में तेज़ी से फाइलें खंगाली जा रही हैं और सुधारों का डेटा जुटाया जा रहा है।
पीएम की नजर में असर और परिणाम
सरकार के सूत्रों के मुताबिक, पीएम मोदी यह जानना चाहते हैं कि किस मंत्रालय के सुधारों से ज़मीनी स्तर पर क्या बदला। सवाल यही होगा कि क्या इन फैसलों से आम आदमी को राहत मिली, प्रक्रियाएं आसान हुईं और सिस्टम में पारदर्शिता आई या नहीं.सेवा तीर्थ में 24 फरवरी को हुई कैबिनेट की पहली बैठक में ही प्रधानमंत्री ने मंत्रियों को इस दिशा में काम शुरू करने के संकेत दे दिए थे। तभी कहा गया था कि हर मंत्रालय अपने सुधारों को केवल कागज़ी नहीं, बल्कि परिणामों के साथ पेश करे।
प्रमुख मंत्रालयों पर खास फोकस
इस समीक्षा से मंत्रालयों की जवाबदेही बढ़ने की बात कही जा रही है। उदाहरण के तौर पर सड़क परिवहन मंत्रालय ने सैटेलाइट आधारित टोल प्रणाली और फास्टैग के नए नियम लागू किए हैं। सरकार का दावा है कि इससे यात्रा आसान हुई है और टोल वसूली में पारदर्शिता भी बढ़ी है.ऐसे ही अन्य मंत्रालयों से भी अपेक्षा की जा रही है कि वे अपने-अपने क्षेत्रों में किए गए सुधारों के ठोस नतीजे सामने रखें। माना जा रहा है कि इस पूरी प्रक्रिया के बाद सरकार के कामकाज की दिशा और रफ्तार दोनों पर असर दिखेगा, और जिन मंत्रालयों का प्रदर्शन कमजोर रहा, उनसे कड़े सवाल भी पूछे जा सकते हैं।