प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने महिला आरक्षण बिल पास न होने पर देश से माफी मांगी। विपक्ष पर तीखा हमला करते हुए इसे नारी शक्ति के साथ अन्याय बताया, कहा कि बिल पास होता तो राज्यों की सीटें बढ़तीं।
नई दिल्ली: महिला आरक्षण विधेयक संसद में पास न हो पाने के बाद प्रधानमंत्री Narendra Modi ने शनिवार रात देश को संबोधित किया। उन्होंने इस मुद्दे पर देश की महिलाओं से माफी मांगते हुए कहा कि सरकार की मंशा स्पष्ट थी, लेकिन संशोधन पारित नहीं हो सका। प्रधानमंत्री ने अपने संबोधन में कहा, “मैं देश की माताओं-बहनों से क्षमा मांगता हूं। यह केवल एक बिल नहीं था, बल्कि नारी शक्ति को उनका अधिकार देने का प्रयास था।”
विपक्ष ने नारी शक्ति के साथ अन्याय किया
प्रधानमंत्री ने कांग्रेस, टीएमसी, डीएमके और समाजवादी पार्टी जैसे दलों पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि इन दलों ने राजनीतिक स्वार्थ के कारण महिला आरक्षण का विरोध किया।उन्होंने आरोप लगाया कि संसद में बिल गिरने के बाद विपक्ष ने जश्न मनाया, जो नारी सम्मान के खिलाफ है। पीएम ने कहा कि यह केवल राजनीतिक विरोध नहीं, बल्कि “नारी स्वाभिमान पर चोट” है।
‘आधी आबादी का अधिकार छीना गया’
प्रधानमंत्री ने कहा कि यह विधेयक देश की लगभग 50 प्रतिशत आबादी को राजनीतिक प्रतिनिधित्व देने की दिशा में एक बड़ा कदम था। उन्होंने इसे समय की मांग बताते हुए कहा कि इससे महिलाओं को नई ऊर्जा और अवसर मिलने वाले थे। उन्होंने यह भी कहा कि विपक्ष ने “झूठ और भ्रम फैलाकर” इस विधेयक को रोकने का प्रयास किया और परिसीमन को लेकर लोगों को गुमराह किया।
बिल पास होता तो राज्यों को मिलता बड़ा फायदा
प्रधानमंत्री ने अपने संबोधन में यह भी कहा कि यह विधेयक केवल महिलाओं के अधिकार तक सीमित नहीं था, बल्कि राज्यों के विकास और प्रतिनिधित्व से भी जुड़ा था। उन्होंने कहा, “अगर यह बिल पास हो जाता तो पश्चिम बंगाल, उत्तर प्रदेश, केरल समेत सभी राज्यों की लोकसभा सीटें बढ़तीं। इससे ज्यादा लोगों को प्रतिनिधित्व का मौका मिलता।”
पीएम ने आरोप लगाया कि विपक्षी दलों ने अपने ही राज्यों के हितों के साथ समझौता किया। उन्होंने कहा कि डीएमके और टीएमसी के पास अपने-अपने राज्यों के लोगों को अधिक प्रतिनिधित्व देने का अवसर था, लेकिन उन्होंने इसे गंवा दिया। समाजवादी पार्टी पर निशाना साधते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि पार्टी इस मुद्दे पर अपनी छवि सुधारने का मौका भी खो बैठी। उन्होंने यह भी कहा कि इस फैसले से समाजवादी विचारधारा के मूल सिद्धांतों को भी नुकसान पहुंचा है।
‘कांग्रेस एंटी-रिफॉर्म पार्टी’
प्रधानमंत्री ने कांग्रेस पर तीखा हमला करते हुए कहा कि यह पार्टी हमेशा सुधारों का विरोध करती रही है। उन्होंने कहा, “कांग्रेस ने फिर साबित कर दिया कि वह एंटी-रिफॉर्म पार्टी है। 21वीं सदी के भारत के निर्माण से जुड़े फैसलों को वह लगातार खारिज करती आई है।”उन्होंने इसे “निगेटिव पॉलिटिक्स” बताते हुए कहा कि ऐसी राजनीति देश के विकास में बाधा बनती है।
‘जनता देगी जवाब’
अपने संबोधन में पीएम मोदी ने स्पष्ट संकेत दिया कि महिला आरक्षण का मुद्दा आने वाले समय में राजनीतिक रूप से अहम रहेगा। उन्होंने कहा कि देश की महिलाएं सब देख रही हैं और सही समय पर जवाब देंगी। प्रधानमंत्री ने कहा, “21वीं सदी की नारी जागरूक है, वह हर घटना को समझती है और निर्णय भी लेती है।”