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Parliament Session 2026: PM Modi on Delimitation B

संसद विशेष सत्र 2026: परिसीमन बिल पर टकराव, पीएम मोदी ने कहा- किसी राज्य के साथ अन्याय नहीं होगा

संसद के विशेष सत्र में परिसीमन बिल पर बहस तेज। पीएम मोदी ने कहा- किसी राज्य के साथ भेदभाव नहीं होगा। विपक्ष ने उठाए सवाल।


संसद विशेष सत्र 2026 परिसीमन बिल पर टकराव पीएम मोदी ने कहा- किसी राज्य के साथ अन्याय नहीं होगा

 नई दिल्लीः संसद के विशेष सत्र के पहले ही दिन लोकसभा में परिसीमन बिल को लेकर सत्ता और विपक्ष आमने-सामने नजर आए। बिल पेश होते ही सदन में जोरदार हंगामा हुआ, वहीं दोपहर बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने चर्चा में हिस्सा लेते हुए स्पष्ट किया कि इस प्रक्रिया में किसी भी राज्य के साथ भेदभाव नहीं किया जाएगा।

 

विपक्ष का विरोध, सरकार का बचाव

सत्र की शुरुआत से ही विपक्षी दलों ने परिसीमन बिल का विरोध किया। कांग्रेस, समाजवादी पार्टी और डीएमके के नेताओं ने सरकार की मंशा पर सवाल उठाए। सपा नेता अखिलेश यादव ने कहा कि महिला आरक्षण का समर्थन है, लेकिन परिसीमन को उससे जोड़ना राजनीतिक रणनीति का हिस्सा हो सकता है। वहीं कांग्रेस नेता जयराम रमेश ने प्रधानमंत्री के भाषण पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि मुख्य मुद्दों पर स्पष्ट जवाब नहीं दिया गया।

पीएम मोदी का बयान: “देश को टुकड़ों में नहीं देख सकते”

लोकसभा में बोलते हुए प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि देश को क्षेत्रीय आधार पर नहीं, बल्कि एक इकाई के रूप में देखना चाहिए। उन्होंने कहा, 

मैं वादा और गारंटी देता हूं कि इस बिल में किसी राज्य के साथ अन्याय नहीं होगा और मौजूदा अनुपात में भी कोई बदलाव नहीं किया जाएगा।

उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि महिला आरक्षण से जुड़ी प्रक्रिया को आगे बढ़ाने के लिए परिसीमन जरूरी है और इसमें देरी नहीं की जानी चाहिए।

महिला आरक्षण पर जोर

प्रधानमंत्री ने अपने संबोधन में महिला सशक्तिकरण को प्रमुख मुद्दा बताया। उन्होंने कहा कि देश की आधी आबादी को नीति निर्धारण में भागीदारी देना समय की मांग है। पीएम मोदी ने विपक्ष से अपील की कि इस मुद्दे को राजनीतिक नजरिए से न देखें।

क्या है विवाद की वजह

विपक्ष का कहना है कि परिसीमन को जनगणना और महिला आरक्षण से जोड़ने से प्रक्रिया में देरी हो सकती है। साथ ही कुछ राज्यों को प्रतिनिधित्व में संभावित बदलाव को लेकर भी आशंका जताई जा रही है। वहीं सरकार का दावा है कि परिसीमन पूरी तरह संवैधानिक प्रक्रिया के तहत होगा और सभी राज्यों के हितों का ध्यान रखा जाएगा। लोकसभा में पेश तीनों विधेयकों पर चर्चा जारी रहेगी और 17 अप्रैल को वोटिंग प्रस्तावित है। 

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