नोएडा हिंसा मामले में मुख्य आरोपी आदित्य आनंद गिरफ्तार। STF का दावा- मजदूरों का डेटा जुटाकर हिंसा की साजिश रची गई। जांच जारी।
नोएडा: नोएडा में हुए श्रमिक हिंसक आंदोलन के मामले में सुरक्षा एजेंसियों की जांच में कई चौंकाने वाले खुलासे हुए हैं। मुख्य आरोपी आदित्य आनंद के पास नोएडा की फैक्ट्रियों और मजदूरों का विस्तृत डेटा होने की बात सामने आई है।
बिहार से नौकरी के लिए आया, फिर जुड़ा संगठनों से
जानकारी के अनुसार, आदित्य आनंद करीब पांच साल पहले बिहार से नोएडा नौकरी करने आया था। बीटेक पास होने के बाद वह एक सॉफ्टवेयर इंजीनियर के तौर पर काम कर रहा था। इसी दौरान सोशल मीडिया के जरिए वह मजदूरों से जुड़े संगठन मजदूर बिगुल से जुड़ा और धीरे-धीरे सक्रिय भूमिका निभाने लगा।
रिपोर्टिंग के बहाने जुटाया इंडस्ट्री का डेटा
जांच एजेंसियों के मुताबिक, आदित्य ने संगठन से जुड़कर नोएडा की फैक्ट्रियों में हो रही घटनाओं की रिपोर्टिंग शुरू की। इसी दौरान उसकी मुलाकात रुपेश राय से हुई। दोनों ने मिलकर इंडस्ट्री और मजदूरों से जुड़ा विस्तृत डेटा तैयार किया, जो बाद में हिंसक गतिविधियों की योजना में इस्तेमाल हुआ।
STF का दावा: 5 संगठनों की बैठक में बनी साजिश
स्पेशल टास्क फोर्स (STF) के अनुसार, 30 मार्च से 1 अप्रैल के बीच सेक्टर-37 स्थित एक कमरे में पांच संगठनों के लोग इकट्ठा हुए। इनमें ‘मजदूर बिगुल’, ‘दिशा संगठन’, ‘आरडब्लूपीआई’, ‘नौजवान भारत सभा’ और ‘एकता संघर्ष समिति’ शामिल बताए जा रहे हैं। जांच में सामने आया है कि इसी बैठक में श्रमिक आंदोलन की आड़ में हिंसा, आगजनी और सार्वजनिक संपत्तियों को नुकसान पहुंचाने की रणनीति बनाई गई।
व्हाट्सएप ग्रुप के जरिए जुटाई गई भीड़
STF के अनुसार, आदित्य ने अपनी तकनीकी समझ का इस्तेमाल करते हुए व्हाट्सएप ग्रुप बनाए और मजदूरों को जोड़कर भीड़ तैयार की। 9 से 10 अप्रैल के बीच डिजिटल माध्यम से लोगों को एकजुट किया गया, जिसके बाद प्रदर्शन हिंसक हो गया। हिंसक प्रदर्शन के दौरान प्रदर्शनकारियों ने पुलिस पर पथराव किया और सरकारी वाहनों में तोड़फोड़ की। काफी मशक्कत के बाद स्थिति को काबू में किया गया।
तिरुचिरापल्ली स्टेशन से गिरफ्तारी
घटना के बाद आरोपी के खिलाफ गैर-जमानती वारंट जारी हुआ और उस पर एक लाख का इनाम घोषित किया गया। फरार होने के बाद वह चेन्नई होते हुए तिरुचिरापल्ली जा रहा था, जहां STF ने उसे रेलवे स्टेशन से गिरफ्तार कर लिया। फिलहाल जांच एजेंसियां इस पूरे नेटवर्क की गहराई से पड़ताल कर रही हैं। यह पता लगाने की कोशिश की जा रही है कि इस साजिश में और कौन-कौन लोग शामिल थे और क्या इसके पीछे कोई बड़ा संगठित तंत्र काम कर रहा था।