वडोदरा की MSU यूनिवर्सिटी ने समाजशास्त्र के सिलेबस में ‘मोदी तत्व’ और हिंदू समाजशास्त्र को शामिल किया। छात्रों को मैक्स वेबर के करिश्माई नेतृत्व सिद्धांत से तुलना कराई जाएगी।
वड़ोदरा। महाराजा सयाजीराव (एमएस) यूनिवर्सिटी ने समाजशास्त्र के पाठ्यक्रम में बड़ा बदलाव किया है। नई व्यवस्था के तहत ‘मोदी तत्व’, और भारतीय ज्ञान परंपरा जैसे विषयों को शामिल किया गया है। ये विषय अब बीए समाजशास्त्र के चौथे वर्ष और एमए के पहले वर्ष में पढ़ाए जाएंगे। कुल 10 पेपर्स में इन नए मॉड्यूल्स को जोड़ा गया है। इनमें सोशियोलॉजी ऑफ भारत, हिंदू सोशियोलॉजी और सोशियोलॉजी ऑफ पैट्रियटिज्म शामिल हैं। हर मॉड्यूल चार क्रेडिट का होगा। यह बदलाव जून से शुरू होने वाले नए शैक्षणिक सत्र से लागू किया जाएगा। विश्वविद्यालय का उद्देश्य शिक्षा को भारतीय संदर्भ और सामाजिक वास्तविकताओं से जोड़ना है। इसी को ध्यान में रखते हुए यह पाठ्यक्रम तैयार किया गया है।
भारतीय ज्ञान प्रणाली और राष्ट्रवाद पर जोर
इस नए पाठ्यक्रम में भारतीय ज्ञान परंपरा को विशेष महत्व दिया गया है। इसके साथ ही हिंदू धर्म और राष्ट्रीयता से जुड़े विषयों को भी पढ़ाया जाएगा। विश्वविद्यालय का कहना है कि यह बदलाव भारत की सभ्यतागत विरासत के अनुरूप है। साथ ही, यह समकालीन शासन व्यवस्था और सामाजिक जीवन को समझने में मदद करेगा। इस पहल के जरिए छात्रों को भारतीय समाज की गहराई से समझ विकसित करने का लक्ष्य है। यह पारंपरिक पश्चिमी दृष्टिकोण से हटकर भारतीय दृष्टिकोण को बढ़ावा देता है।
नई नीति को शिक्षा में स्थानीय संदर्भों को शामिल करने की दिशा में कदम माना जा रहा है। इससे छात्रों को अपने समाज के करीब से अध्ययन करने का अवसर मिलेगा।
करिश्माई नेतृत्व के रूप में पढ़ाया जाएगा मोदी तत्व
मोदी तत्व को सोशियोलॉजी ऑफ पैट्रियटिज्म कोर्स का हिस्सा बनाया गया है। इसमें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व का अध्ययन किया जाएगा। यह अध्ययन जर्मन समाजशास्त्री मैक्स वेबर के करिश्माई नेतृत्व के सिद्धांत पर आधारित होगा। डॉ. वीरेंद्र सिंह के अनुसार, मोदी को एक केस स्टडी के रूप में पढ़ाया जाएगा। इसमें उनकी नीतियों, जनसमर्थन और नेतृत्व शैली का विश्लेषण होगा। उन्होंने कहा कि पीएम मोदी आज राष्ट्रीय और वैश्विक राजनीति में प्रमुख भूमिका निभा रहे हैं। इसलिए छात्रों को अभी उनके नेतृत्व को समझना जरूरी है। यह अध्ययन भविष्य की बजाय वर्तमान में ही विश्लेषण करने का प्रयास है।
संघ पर फील्डवर्क आधारित अध्ययन
पाठ्यक्रम में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ को भी एक महत्वपूर्ण केस स्टडी के रूप में शामिल किया गया है। यह विचार गुजरात के ग्रामीण क्षेत्रों में किए गए फील्डवर्क के दौरान सामने आया। छात्रों ने वहां संघ की गतिविधियों और प्रभाव को करीब से देखा। कोर्स में इसे संगठन, जनसंपर्क और सामाजिक नेटवर्क के उदाहरण के रूप में पढ़ाया जाएगा।