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Bhagwat in Vrindavan: Remarks on Cow Protection

गौहत्या रोकने समाज के भीतर से आवाज आना जरूरी-डॉ. मोहन भागवत

वृंदावन में मलूकदास जयंती महोत्सव में सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवत ने गौहत्या रोकने और समाज में जागरूकता बढ़ाने पर जोर दिया। संत परंपरा पर भी चर्चा की।


गौहत्या रोकने समाज के भीतर से आवाज आना जरूरी-डॉ मोहन भागवत 

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवत ने कहा कि भारत एक आध्यात्मिक राष्ट्र है और यहां पर विशाल संत परंपरा है। संत परंपरा में हर कालखंड में समाज का मार्गदर्शन किया है और आगे भी संतों के बताए मार्ग का अनुसरण करके भारत अवश्य ही विश्वगुरु बनेगा। सरसंघचालक डॉ. भागवत मंगलवार को वृंदावन में श्रीपहाड़ी बाबा भक्तमाली गौशाला में आयोजित श्रीमद्भगद्‌गुरु द्वाराचार्य मलूकदास जी महाराज के 452वें जयंती महोत्सव में उपस्थित संतगणों को संबोधित कर रहे थे।

अपने संबोधन में भारत अवश्य विश्व गुरु बनेगा और यह संतों द्वारा दिखाई गई राह के अनुसरण से ही संभव होगा। डॉ. भागवत ने कहा कि जिस तरह श्रीराम मंदिर के लिए संपूर्ण समाज से आवाज आई, उसी तरह समाज को गौभक्त बनाना पड़ेगा। समाज के गौभक्त बनने के बाद गौहत्या अपने आप रुक जाएगी। उन्होंने कहा कि यह एक साहसी कदम होगा।

जब गौहत्या के विरोध में देश में जनभावना खड़ी हो गई तो सरकार को भी कदम उठाना पड़ेगा। इसके लिए लोगों में जागृति करनी होगी। गाय के तत्वों को जन-जन तक पहुंचाना होगा और संघ उसी दिशा में कार्य करेगा। सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवत ने पश्चिम एशिया में अशांति की ओर इंगित करते हुए कहा कि अब समय आ गया है कि भारत विश्व गुरु बनेगा और विश्व को नई, सुखी और सुंदर दुनिया बनाएगा। इसके लिए संघ संतों के साथ मिलकर प्रयास करेगा।

उन्होंने कहा कि देश के 142 करोड़ लोग संतत्व को प्राप्त हों, यह संभव नहीं है, लेकिन सभी का सुचिता पूर्ण जीवन हो, इसके लिए प्रयास करना है।

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