Breaking News
  • भारत की लगातार दूसरी जीत, इटली पहली बार जीता, श्रीलंका 105 रन से नेपाल को हराया
  • दुनिया के सबसे शक्तिशाली पासपोर्टों की रैंकिंग में भारत का पासपोर्ट 75वें स्थान पर पहुंचा
  • बांग्लादेश चुनाव में हिंसा- एक की मौत, दो वोटिंग सेंटर के बाहर बम धमाके
  • चांदी आज 5,835 गिरकर 2.61 लाख किलो हुई, सोना 1,175 गिरकर1.56 लाख पर आया
  • हरिद्वार-ऋषिकेश के मंदिरों में फटी जींस-स्कर्ट में नहीं मिलेगी एंट्री
  • बांग्लादेश में चुनाव की पूर्व संध्या पर एक और हिंदू की हत्या
  • वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण राज्यसभा में बजट पर चर्चा का जवाब देंगी
  • बांग्लादेश में वोटिंग जारी, सुबह-सुबह मतदान केंद्रों पर वोटर्स की लंबी कतार
  • नई श्रम संहिता के खिलाफ देशभर में हड़ताल पर ट्रेड यूनियन, आज भारत बंद

होम > देश

मनरेगा की जगह ‘विकसित भारत-जी राम जी’: 20 साल पुरानी योजना में बड़ा बदलाव

मनरेगा की जगह ‘विकसित भारत-जी राम जी’: 20 साल पुरानी योजना में बड़ा बदलाव

मोदी सरकार मनरेगा की जगह नया ग्रामीण रोजगार कानून ला रही है। 125 दिन काम, नाम बदला, विपक्ष ने उठाए सवाल।

मनरेगा की जगह ‘विकसित भारत-जी राम जी’ 20 साल पुरानी योजना में बड़ा बदलाव

गांवों में काम की तलाश, साल के सौ दिन की गारंटी और मजदूरी की लाइन मनरेगा सिर्फ एक योजना नहीं, बल्कि करोड़ों ग्रामीण परिवारों की रोजमर्रा की ज़रूरत बन चुकी है। अब उसी योजना को लेकर केंद्र सरकार बड़ा बदलाव किया है । मोदी सरकार मनरेगा की जगह एक नया ग्रामीण रोजगार कानून लाने की तैयारी में है। शीतकालीन सत्र में इस पर चर्चा की योजना है और सांसदों के बीच इसका ड्राफ्ट भी पहुंच चुका है।

नया नाम, नया कानून और नई सोच

लोकसभा सांसदों को जो बिल सर्कुलेट किया गया है, उसका नाम है ‘विकसित भारत–गारंटी फॉर रोजगार एंड आजीविका मिशन (ग्रामीण) बिल, 2025’ संक्षेप में VB-G RAM G Bill. सरकार का दावा है कि यह कानून ‘विकसित भारत 2047’ के लक्ष्य के अनुरूप ग्रामीण रोजगार की दिशा बदल देगा। 


काम के दिन बढ़ेंगे

नए बिल में एक बड़ा बदलाव यह है कि अब हर ग्रामीण परिवार को 100 नहीं, बल्कि 125 दिन का रोजगार देने का प्रावधान किया गया है.  यानी काम के दिन बढ़ेंगे और आय में भी इज़ाफे की उम्मीद है। 

क्यों बदला जा रहा है मनरेगा?

बिल के उद्देश्य में साफ लिखा है कि पिछले करीब 20 वर्षों में मनरेगा ने ग्रामीण इलाकों में रोजगार देने में अहम भूमिका निभाई है, लेकिन अब गांवों की सामाजिक और आर्थिक स्थिति पहले जैसी नहीं रही। सरकार मानती है कि गांवों में श्रम का स्वरूप बदला है, आजीविका के नए मॉडल की जरूरत है । पुराने ढांचे को अपडेट करना जरूरी हो गया है , इसी सोच के तहत मनरेगा को पूरी तरह नए कानून में बदलने की बात कही जा रही है।



नाम बदलने पर सियासी घमासान

इस फैसले को लेकर राजनीतिक बहस भी तेज हो गई है।  कांग्रेस सांसद प्रियंका गांधी ने सरकार पर सीधा हमला बोला। उनका कहना है अगर योजना को मजबूत करना ही मकसद है, तो फिर महात्मा गांधी का नाम क्यों हटाया जा रहा है? कांग्रेस का आरोप है कि सरकार योजनाओं से महात्मा गांधी का नाम धीरे-धीरे हटाने की कोशिश कर रही है।

पहले भी आई थी नाम बदलने की खबर

गौर करने वाली बात यह है कि 12 दिसंबर को भी खबर आई थी कि केंद्रीय कैबिनेट ने मनरेगा का नाम बदलकर ‘पूज्य बापू ग्रामीण रोजगार योजना’ करने को मंजूरी दी है हालांकि, उस समय कोई आधिकारिक नोटिफिकेशन सामने नहीं आया था। अब नए बिल के सामने आने के बाद साफ हो गया है कि सरकार सिर्फ नाम नहीं, पूरा कानून बदलने की दिशा में आगे बढ़ चुकी है।

Related to this topic: